Dumka Double Murder: दुमका में दादी-पोती की हत्या, लेकिन 6 महीने की मासूम रह गई जिंदा – रहस्य गहराया
झारखंड के दुमका में घर में घुसकर 71 साल की महिला और 20 साल की पोती की हत्या, 6 महीने की बच्ची बिना खरोंच के मिली। दुमका के पुराने अपराधों का इतिहास और पुलिस जांच की सनसनीखेज डिटेल, क्या ये पारिवारिक साजिश है?
झारखंड मर्डर की खबरें तो अक्सर सुर्खियां बनती हैं, लेकिन दुमका जिले में हुआ ये डबल मर्डर किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगता। कल्पना कीजिए, एक घर में दो महिलाओं की बेरहमी से हत्या हो जाती है, लेकिन उसी कमरे में खेल रही 6 महीने की मासूम बच्ची पर एक खरोंच तक नहीं आती। क्या हत्यारे बच्ची को जानबूझकर छोड़ गए? या पीछे कोई गहरा राज छिपा है? शुक्रवार रात अमचुआ गांव में मिले शवों ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। क्या ये पारिवारिक दुश्मनी का नतीजा है या कुछ और? आइए, इस झारखंड मर्डर की परतें खोलते हैं, जहां इतिहास की काली साये और आज की जांच की रोशनी टकरा रही है।
दुमका का इतिहास अपराधों से भरा पड़ा है, जो इस झारखंड मर्डर को और रहस्यमयी बनाता है। 2022 में दुमका में ही एक किशोरी अंकिता सिंह की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जहां एक स्टॉकर ने उसे जिंदा जला दिया। उस मामले में भी महिला सुरक्षा पर सवाल उठे थे। फिर 2024 में एक स्पेनिश पर्यटक महिला के साथ गैंगरेप की घटना ने दुमका को अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। और हाल ही में मई 2025 में एक महिला को पड़ोसी ने तलवार से सिर काटकर मार डाला, जो नाली विवाद से जुड़ा था। 2013 में माओवादी हमले में पुलिसकर्मी अमरजीत बलिहार की हत्या का केस भी दुमका से जुड़ा है, जिस पर 2025 में हाईकोर्ट में फैसला आया। सितंबर 2022 में एक आदिवासी लड़की की रेप के बाद हत्या भी इसी जिले में हुई। ये इतिहास बताता है कि दुमका में महिलाओं पर हमले और पारिवारिक विवादों से जुड़े अपराध आम हैं। क्या ये नया झारखंड मर्डर भी उसी चेन का हिस्सा है, या कुछ नया ट्विस्ट?
अब इस ताजा झारखंड मर्डर की डिटेल पर नजर डालें। शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के अमचुआ गांव में 71 साल की सोना बास्के और उनकी 20 साल की पोती सोना मुर्मू की घर में घुसकर हत्या कर दी गई। पुलिस को शुक्रवार रात शव मिले, और शनिवार को मामला सामने आया। सोना मुर्मू के पति राजू सोरेन का दावा है कि वह दोपहर में फुटबॉल खेलने गए थे, और शाम को लौटे तो घर में शव पड़े थे। राजू अपने ससुराल में रहते हैं – क्या ये पारिवारिक रिश्तों में कोई दरार का संकेत है? थाना प्रभारी अमित कुमार लाकड़ा ने बताया कि प्रथम दृष्टया हत्या धारदार हथियार या डंडे से लगती है। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात – सोना मुर्मू की 6 महीने की बेटी उसी घर में थी, और पूरी तरह सुरक्षित पाई गई। क्या बच्ची ने हत्यारों को देखा? या हत्यारों ने जानबूझकर उसे नहीं छुआ? ये सवाल जांच को और पेचीदा बना रहे हैं।
पुलिस ने झारखंड मर्डर का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शवों को फुलो झानो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई गई है, जो घर की हर चीज की जांच करेगी। क्या फिंगरप्रिंट्स या डीएनए से कोई क्लू मिलेगा? थाना प्रभारी ने कहा, "हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं।" लेकिन सवाल ये है – राजू सोरेन का फुटबॉल खेलने जाना क्या संयोग था या प्लान? गांववाले क्या कहते हैं? अमचुआ जैसे ग्रामीण इलाकों में अक्सर जमीन या पारिवारिक झगड़ों से ऐसी घटनाएं होती हैं, लेकिन बच्ची का सुरक्षित रहना सबको चौंका रहा है। क्या हत्यारे परिवार के सदस्य थे, जो बच्ची को जानते थे?
ये झारखंड मर्डर न सिर्फ दुमका की सुरक्षा पर सवाल उठाता है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा पर भी। इतिहास से सीखकर क्या पुलिस इस बार जल्दी आरोपी पकड़ेगी? 2022 के अंकिता केस में आरोपी को सजा मिली, लेकिन कई मामले अभी लंबित हैं। क्या ये डबल हत्या भी लंबी जांच का शिकार होगी? आप क्या सोचते हैं – कमेंट में बताएं! अगर आपके इलाके में ऐसी कोई घटना हुई, तो शेयर करें। क्या 6 महीने की बच्ची जांच में कोई भूमिका निभाएगी, या ये रहस्य अनसुलझा रहेगा? पुलिस जांच का इंतजार है, लेकिन दुमका का ये डबल मर्डर अभी और सवाल पैदा कर रहा है। झारखंड मर्डर की ये कहानी हमें सतर्क करती है – घर की सुरक्षा पर ध्यान दें, क्योंकि खतरा कभी भी दस्तक दे सकता है।
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