Jamshedpur Shame: उलीडीह में उत्पीड़न! विवाहिता से लगातार दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला, आरोपी बापी दास के डर से चुप रही पीड़िता, न्यायालय के आदेश पर FIR
जमशेदपुर के उलीडीह थाना क्षेत्र में एक महिला ने पटमदा के बापी दास पर 5 फरवरी 2024 से लगातार डरा-धमकाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। लंबे उत्पीड़न के बाद पीड़िता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसके आदेश पर FIR दर्ज हुई। पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
जमशेदपुर के उलीडीह थाना क्षेत्र से मानवीय संबंधों को तार-तार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला को डर और धमकी के साए में लंबे समय तक जबरन उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा। यह मामला केवल अपराध का नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि समाज में महिलाओं को अपनी आवाज उठाने के लिए कितना लंबा और संघर्षपूर्ण रास्ता तय करना पड़ता है।
झारखंड में महिला उत्पीड़न के कई मामलों में देखा गया है कि आरोपी पीड़िता के जानकार होते हैं, जो उनके डर और सामाजिक कलंक के भय का फायदा उठाते हैं। इस मामले में भी महिला ने लगातार उत्पीड़न झेलने के बाद हिम्मत जुटाकर कानून का दरवाजा खटखटाया।
5 फरवरी 2024 से शुरू हुआ उत्पीड़न का सिलसिला
पीड़िता की शिकायत पर उलीडीह थाना पुलिस ने पटमदा थाना क्षेत्र के गोबरघुसी निवासी आरोपी बापी दास के विरुद्ध दुष्कर्म, जान से मारने की धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।
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डर और धमकी: पीड़िता ने अपनी शिकायत में खुलकर बताया कि आरोपी बापी दास ने 5 फरवरी 2024 से ही उसे लगातार डरा-धमकाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जब भी महिला ने विरोध करने की हिम्मत की, तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी।
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लंबी खामोशी: महिला ने बताया कि आरोपी के खौफ के चलते वह लंबे समय तक चुप रही। लगातार उत्पीड़न और धमकियों से तंग आकर आखिरकार उसने कानून की मदद लेने का फैसला किया।
न्यायालय के आदेश पर FIR दर्ज, पुलिस कर रही छापेमारी
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पीड़िता को सीधे पुलिस के पास जाने के बजाय न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। न्यायालय के निर्देश पर ही उलीडीह थाना पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध मामला दर्ज किया।
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जांच शुरू: उलीडीह थाना प्रभारी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उसके बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
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आरोपी फरार: फिलहाल, आरोपी बापी दास फरार है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के लिए उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। थाना प्रभारी ने दावा किया है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
यह घटना समाज में बढ़ते यौन उत्पीड़न और महिलाओं की असुरक्षा को दर्शाती है। पीड़िता का अदालत तक पहुंचना खुद में एक बड़ी लड़ाई है। अब पुलिस की तेज कार्रवाई ही पीड़िता को न्याय दिलाने और अन्य उत्पीड़ित महिलाओं के लिए विश्वास बहाल करने में मदद कर सकती है।
आपकी राय में, जब पीड़िता को डर के कारण सीधे पुलिस के बजाय न्यायालय का सहारा लेना पड़े, तो पुलिस के कामकाज में विश्वास बहाल करने के लिए कौन से दो कदम उठाने चाहिए?
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