Sonari Dispute: मकान मालकिन की मौत के बाद खूनी जंग, 15 साल पुराने किराएदार और 'कथित भाई' के बीच बवाल, वसीयत और जेवर लूटने के आरोपों से दहला सोनारी
सोनारी के परदेसी पाड़ा में एक मकान को लेकर चल रहा विवाद अब मारपीट और लूटपाट तक पहुंच गया है। मृतका की सेवा करने वाले किराएदार और अचानक आए 'भाई' के दावों के बीच फंसी इस सनसनीखेज कहानी की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप जमशेदपुर की इस सबसे बड़ी प्रॉपर्टी जंग के पीछे का कड़वा सच मिस कर देंगे।
जमशेदपुर/सोनारी, 16 फरवरी 2026 – लौहनगरी के पॉश इलाके सोनारी में एक ऐसी फिल्मी और अजीबो-गरीब स्थिति पैदा हो गई है, जिसने पुलिस प्रशासन के भी कान खड़े कर दिए हैं। सोनारी परदेसी पाड़ा बी-ब्लॉक में एक मकान के मालिकाना हक को लेकर 'वसीयत बनाम खून के रिश्ते' की ऐसी जंग छिड़ी है कि मामला तोड़फोड़, मारपीट और लाखों की लूट तक जा पहुंचा है। घर के मुख्य दरवाजे पर ताला लगाकर खुद को कैद कर चुका महानंद परिवार अब दहशत के साये में जीने को मजबूर है।
15 साल की सेवा और वो 'रहस्यमयी' वसीयत
घटना की जड़ें 15 साल पुरानी वफादारी से जुड़ी हैं। सुरेश महानंद और उनकी पत्नी रोहिणी महानंद पिछले डेढ़ दशक से इस मकान में रह रहे थे।
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मालिक का परिचय: मकान के मालिक बिलासपुर के डॉ. सपन कुमार बासु और टेल्को लेडी इंदर स्कूल की शिक्षिका कोनिका बासु थे।
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कैंसर और देखभाल: डॉ. सपन की मौत के बाद कोनिका बासु अकेली पड़ गई थीं। जब उन्हें चेस्ट कैंसर हुआ, तो किराएदार रोहिणी और सुरेश ने ही उनकी दिन-रात सेवा की।
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वसीयत का दावा: महानंद परिवार का दावा है कि उनकी सेवा से खुश होकर कोनिका ने एक वसीयत बनाई थी, जिसमें उनके बाद इस मकान में रहने का अधिकार महानंद परिवार को दिया गया था।
अचानक 'भाई' की एंट्री और कोहराम
कोनिका बासु की मौत के बाद करीब दो साल तक सब शांत रहा, लेकिन अचानक संजय सोम नामक व्यक्ति ने घर पहुंचकर खुद को कोनिका का भाई बताया। महानंद परिवार का कहना है कि उन्होंने 15 वर्षों में इस व्यक्ति को कभी कोनिका के आसपास भी नहीं देखा था।
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तांडव और लूटपाट: आरोप है कि संजय सोम ने कुछ महिलाओं और साथियों के साथ मिलकर घर पर धावा बोला। दीवारें तोड़ दी गईं, सामान बाहर फेंक दिया गया और महिलाओं के साथ मारपीट की गई।
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5 लाख के जेवर गायब: सुरेश महानंद ने पुलिस को बताया कि इस हमले के दौरान संजय सोम और उसके साथी 5 लाख रुपये के सोने के जेवर, कांसे के बर्तनों से भरा बक्सा, किचन का सामान और सबसे महत्वपूर्ण—वसीयत के असली कागजात व आधार कार्ड लूट ले गए।
सोनारी विवाद: मुख्य बिंदु (Conflict Snapshot)
| पक्ष | मुख्य दावा (Main Claim) | आरोप (Allegation) |
| किराएदार (महानंद) | 15 साल की सेवा और लिखित वसीयत | मारपीट, घर में तोड़फोड़ और जेवरों की लूट |
| कथित भाई (संजय) | मृतका का सगा भाई होने का अधिकार | घर पर अवैध कब्जा करने की कोशिश |
| पुलिस की भूमिका | मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला | मामले की गहन जांच और कागजों का सत्यापन |
खुद के घर में 'कैद' परिवार: जान का खतरा
रविवार को एक बार फिर महिला नेत्रियों की भीड़ ने घर पर हमला किया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। महानंद परिवार इतना डरा हुआ है कि उन्होंने मुख्य गेट पर ताला लगा लिया है और अंदर ही कैद हैं। उन्हें डर है कि कथित भाई और उसके गुंडे कभी भी उनके साथ कोई अनहोनी कर सकते हैं।
कानून के तराजू में वफादारी या वारिस?
यह मामला अब केवल एक मकान का नहीं, बल्कि कानून और मानवीय संवेदनाओं की परीक्षा बन गया है। क्या 15 साल की सेवा और वसीयत का दावा टिक पाएगा? या फिर अचानक प्रकट हुआ 'भाई' बाजी मार ले जाएगा? इसका फैसला अब पुलिस की जांच और अदालत के दस्तावेजों पर निर्भर है।
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