Ghanshyam Prasad Singh Tribute : 71 के युद्ध में लुंगी पहनकर जासूसी करने वाले वीर घनश्याम प्रसाद का निधन, पाकिस्तानी सिग्नल इंटरसेप्ट कर जीत दिलाई थी

जमशेदपुर के वीर सपूत और 1971 के युद्ध नायक हवलदार घनश्याम प्रसाद सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। मुक्तिवाहिनी के साथ मिलकर दुश्मन के छक्के छुड़ाने और भेष बदलकर जासूसी करने वाली उनकी अदम्य साहस की पूरी शौर्य गाथा यहाँ मौजूद है वरना आप कदमा के इस 'युद्धवीर' के महान बलिदान से अनजान रह जाएंगे।

Feb 16, 2026 - 14:01
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Ghanshyam Prasad Singh Tribute : 71 के युद्ध में लुंगी पहनकर जासूसी करने वाले वीर घनश्याम प्रसाद का निधन, पाकिस्तानी सिग्नल इंटरसेप्ट कर जीत दिलाई थी
Ghanshyam Prasad Singh Tribute : 71 के युद्ध में लुंगी पहनकर जासूसी करने वाले वीर घनश्याम प्रसाद का निधन, पाकिस्तानी सिग्नल इंटरसेप्ट कर जीत दिलाई थी

जमशेदपुर/कदमा, 16 फरवरी 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर ने आज अपने एक और गौरवशाली सपूत को खो दिया है। 1971 के भारत-पाक युद्ध के नायक और अदम्य साहस के प्रतीक, हवलदार घनश्याम प्रसाद सिंह का 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। कदमा निवासी घनश्याम जी का जाना केवल उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र और सैन्य बिरादरी के लिए एक अपूरणीय क्षति है। सोमवार को अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सदस्यों ने नम आंखों से अपने इस 'युद्धवीर' को अंतिम विदाई दी।

भेष बदलकर जासूसी: जब पाकिस्तानी सेना को दी मात

घनश्याम प्रसाद सिंह केवल एक सैनिक नहीं, बल्कि एक चतुर रणनीतिकार भी थे। 1971 के युद्ध की आधिकारिक घोषणा से पहले ही वे अपनी जान हथेली पर रखकर मैदान में उतर चुके थे:

  • लुंगी-टीशर्ट में मिशन: नायक घनश्याम बताते थे कि सिग्नल कोर में होने के कारण उन्हें 33 कोर के साथ मिलकर गुप्त सूचनाएं जुटाने का जिम्मा मिला था। वे बांग्लादेशी नागरिकों की तरह दिन भर लुंगी और टी-शर्ट पहनकर अलग-अलग घरों में छिपे रहते थे ताकि पाकिस्तानी फौज उन्हें पहचान न सके।

  • सिग्नल इंटरसेप्ट करना: पूरी रात वे मुक्तिवाहिनी के सैनिकों के साथ क्षेत्रों का भ्रमण करते थे। उनका मुख्य काम पाकिस्तानी सिग्नल को 'इंटरसेप्ट' करना और उनकी फौजी गाड़ियों की लोकेशन 33 कोर को भेजना था।

  • अदम्य साहस: बांग्ला भाषा न आने के बावजूद भेष बदलकर जासूसी करना किसी मौत के कुएं में उतरने जैसा था, लेकिन उन्होंने इसे बखूबी निभाया।

सम्मान और पदक: शौर्य की विरासत

घनश्याम प्रसाद सिंह 22 फरवरी 1967 को पटना में सेना के सिग्नल कोर में भर्ती हुए थे। उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें कई गौरवशाली पदकों से नवाजा गया:

  1. ईस्टर्न स्टार मेडल

  2. संग्राम मेडल

  3. विदेश सेवा मेडल

युद्धवीर घनश्याम प्रसाद: एक नजर में (Legacy Snapshot)

विवरण प्रमुख जानकारी (Key Facts)
नाम हवलदार घनश्याम प्रसाद सिंह (युद्धवीर 1971)
निवास कदमा, जमशेदपुर
यूनिट सिग्नल कोर (सेना)
भर्ती तिथि 22 फरवरी 1967
विशेष योगदान 33 कोर के साथ इंटेलिजेंस और जासूसी

संगठन की क्षति: पूर्व सैनिकों ने दी विदाई

अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जमशेदपुर के लिए यह एक दुखद घड़ी है। हाल ही में संगठन ने अपने एक और सक्रिय सदस्य केशव कुमार सिंह को भी खोया है। श्रद्धांजलि सभा में नरसिंह सिंह, परशुराम सिंह, ओ पी प्रसाद, वरुण कुमार, डीएन सिंह और राकेश चौधरी सहित कई पूर्व सैनिकों ने कहा कि घनश्याम जी का अनुशासन और सेवाभाव आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय रहेगा।

हमेशा जीवित रहेंगे आदर्श

हवलदार घनश्याम प्रसाद सिंह अब हमारे बीच भौतिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा 1971 की रणभूमि में दिखाया गया शौर्य सदा अमर रहेगा। राष्ट्र अपने इस वीर सपूत के प्रति सदैव ऋणी रहेगा।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।