Sakchi Unity: शाही इमाम का बड़ा संदेश, गुरुद्वारे से मस्जिद तक गूंजी भाईचारे की आवाज, जमशेदपुर में नफरत के खिलाफ एकजुटता

पंजाब के शाही इमाम मौलाना उस्मान साहब लुधियानवी ने जमशेदपुर के साकची गुरुद्वारे और मस्जिद से देश को जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक संदेश दिया है। गंगा-जमुनी तहजीब और युवाओं के लिए उनके इस खास आह्वान की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी समाज को नई दिशा देने वाले इस बड़े अपडेट से अनजान रह जाएंगे।

Jan 19, 2026 - 13:31
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Sakchi Unity: शाही इमाम का बड़ा संदेश, गुरुद्वारे से मस्जिद तक गूंजी भाईचारे की आवाज, जमशेदपुर में नफरत के खिलाफ एकजुटता
Sakchi Unity: शाही इमाम का बड़ा संदेश, गुरुद्वारे से मस्जिद तक गूंजी भाईचारे की आवाज, जमशेदपुर में नफरत के खिलाफ एकजुटता

जमशेदपुर, 19 जनवरी 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर की फिजाओं में आज प्रेम और सौहार्द की एक नई लहर देखने को मिली। पंजाब के शाही इमाम मौलाना उस्मान साहब लुधियानवी ने साकची स्थित सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (CGPC) के कार्यालय और आम बगान मस्जिद से एक ऐसा सशक्त संदेश दिया, जिसने नफरत की राजनीति करने वालों को कड़ा जवाब दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता और आपसी सम्मान में है। गुरुद्वारे की चौखट से मस्जिद के मिंबर तक, मौलाना का एक ही नारा गूंजा—"इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।"

गुरुद्वारे से एकता की हुंकार: "धर्म जोड़ता है, तोड़ता नहीं"

साकची गुरुद्वारा कार्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शाही इमाम ने समाज के हर वर्ग को आईना दिखाया।

  • असली ताकत: मौलाना उस्मान ने कहा कि भारत की गंगा-जमुनी तहजीब ही इसकी पहचान है। हमें नफरत और विभाजन की राजनीति से ऊपर उठकर एक-दूसरे का हाथ थामना होगा।

  • युवाओं से अपील: उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे नकारात्मक सोच और सोशल मीडिया की अफवाहों से दूर रहें। देश का निर्माण ईमानदारी, इंसाफ और भाईचारे से ही संभव है।

  • सांझा उत्सव: इमाम साहब ने सभी धर्मों के लोगों से एक-दूसरे की परंपराओं और त्योहारों का सम्मान करने का आग्रह किया।

मस्जिद में गूँजी अमन की दुआ: "इंसानियत का रास्ता ही सही"

गुरुद्वारे में संवाद के बाद मौलाना उस्मान साकची के आम बगान मस्जिद पहुँचे। वहां उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म कभी दीवारें खड़ी नहीं करता।

  1. सकारात्मक भूमिका: उन्होंने लोगों को समाज निर्माण में सकारात्मक योगदान देने और हर धर्म के प्रति सम्मान भाव रखने की नसीहत दी।

  2. सौहार्द का संकल्प: कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने एक स्वर में सामाजिक एकता और शांति को मजबूत करने का संकल्प लिया।

  3. देश के लिए दुआ: कार्यक्रम का समापन भारत में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली की सामूहिक दुआ के साथ हुआ।

जमशेदपुर एकता मिशन: मुख्य अंश (Event Highlights)

स्थान प्रमुख गतिविधि मुख्य संदेश
साकची गुरुद्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस और संवाद गंगा-जमुनी तहजीब की रक्षा
आम बगान मस्जिद धार्मिक व सामाजिक संबोधन नफरत छोड़ो, इंसानियत जोड़ो
मुख्य अतिथि शाही इमाम मौलाना उस्मान एकता और ईमानदारी की अपील
सहयोगी काशिफ़ रज़ा (ASP) सामाजिक न्याय और वंचितों का साथ

इतिहास का पन्ना: जमशेदपुर की साझी विरासत और गुरुद्वारा-मस्जिद का मेल

जमशेदपुर, जिसे 'स्टील सिटी' के नाम से जाना जाता है, का इतिहास हमेशा से ही औद्योगिक विकास के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव का रहा है। 1907 में टाटा स्टील की स्थापना के बाद देश के कोने-कोने से लोग यहाँ आए, जिससे यहाँ एक लघु भारत (Mini India) बस गया। इतिहास गवाह है कि साकची का इलाका हमेशा से यहाँ की साझी संस्कृति का केंद्र रहा है। यहाँ गुरुद्वारे और मस्जिद का एक साथ होना केवल भौगोलिक निकटता नहीं, बल्कि उस रूहानी रिश्ते का प्रतीक है जिसे जमशेदपुर के पूर्वजों ने सींचा था। शाही इमाम का लुधियाना से जमशेदपुर आना और इन दोनों स्थानों से संवाद करना, 1947 के विभाजन के जख्मों पर मरहम लगाने जैसी उन कोशिशों की याद दिलाता है जो महात्मा गांधी और अन्य महान नेताओं ने की थी। 2026 में यह संदेश इसलिए जरूरी है क्योंकि आधुनिक दौर के डिजिटल विभाजन को केवल ऐसे ही जमीनी संवाद से भरा जा सकता है।

काशिफ़ रज़ा का समर्थन: "दलित-अल्पसंख्यक एकता ही भविष्य"

आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक प्रत्याशी काशिफ़ रज़ा ने भी इस मौके पर अपनी बात रखी।

  • नया सवेरा: रज़ा ने शाही इमाम के संदेश की सराहना करते हुए कहा कि आज देश को सामाजिक एकता की सबसे अधिक जरूरत है।

  • न्याय का भरोसा: उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों समेत हर वंचित वर्ग की आवाज बुलंद करेंगे और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ेंगे।

  • प्रतिनिधि मंडल: इस दौरान शकील, फैयाज आलम, सनत सिंह, सरदार राशिद खान और कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने इस मुहिम को घर-घर पहुँचाने का वादा किया।

नफरत हारेगी, भाईचारा जीतेगा

जमशेदपुर की धरती से शाही इमाम मौलाना उस्मान साहब लुधियानवी का यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है। जब गुरुद्वारे की शांति और मस्जिद की दुआएं एक सुर में मिलती हैं, तो समाज में नफरत के लिए कोई जगह नहीं बचती।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।