Jamshedpur Encounter: जमशेदपुर में पुलिस मुठभेड़! खाली क्वार्टर में छिपे अपराधियों पर फायरिंग, गोपला घायल और लालू गिरफ्तार, रंगदारी के पीछे ये बड़ी साजिश!
जमशेदपुर के बारीडीह में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ क्यों हुई? खाली क्वार्टर के अंदर से गोली चलने पर पुलिस ने आत्मरक्षा में क्या किया? घायल रवि महानंद उर्फ गोपला और गिरफ्तार आकाश सिंह उर्फ लालू का गैंगस्टर प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा से क्या कनेक्शन है? व्यवसायी हरेराम सिंह के घर पर हुई फायरिंग का असली कारण शराब के ठेके की किस अधूरी डील से जुड़ा है? पूरे षड्यंत्र की चौंकाने वाली जानकारी पढ़ें!
जमशेदपुर, 29 अक्टूबर 2025 – टाटा नगरी जमशेदपुर में अपराधियों को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिससे शहर के व्यवसायी वर्ग में संदेह और भय का माहौल है। सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के बारीडीह स्थित एक खाली पड़े टाटा स्टील के क्वार्टर में बुधवार को पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक शूटर घायल हो गया, जबकि उसके एक अन्य साथी को फरार होने के बाद दबोचा गया। सिटी एसपी ने संवाददाता सम्मेलन में इस पूरे मामले से पर्दा उठाया और बताया कि रंगदारी के पीछे प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा गैंग के साथ एक गहरे षड्यंत्र की जड़ें जुड़ी हुई थीं।
के-2 क्वार्टर में फायरिंग के बाद गोपला घायल
पुलिस को सूचना मिली थी कि के-2 क्वार्टर में कुख्यात अपराधी छिपे हुए हैं। पुलिस टीम ने तुरंत इलाके की घेराबंदी की और क्वार्टर का दरवाजा खुलवाने की कोशिश की।
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जवाबी कार्रवाई: पुलिस के अनुसार, क्वार्टर के भीतर छिपे अपराधियों ने जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा भी जवाबी गोली चलाई गई, जिसमें अपराधी रवि महानंद उर्फ गोपला घायल हो गया। उसके पैर में गोली लगी है और उसका इलाज एमजीएम अस्पताल में चल रहा है।
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बरामदगी: घटनास्थल से पुलिस ने एक पिस्तौल, गोली, खोखा सहित शराब की बोतल, डिस्पोजल ग्लास और मिक्सचर जैसी चीजें बरामद की हैं, जो दर्शाती हैं कि अपराधी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने से पहले योजना बना रहे थे।
फरार लालू गिरफ्तार: रंगदारी की पूरी कहानी खुली
मुठभेड़ के दौरान एक अपराधी मौके से फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने 28 अक्टूबर की रात सीतारामडेरा स्लैग रोड में घेराबंदी करके गिरफ्तार कर लिया। इसका नाम आकाश सिंह उर्फ लालू है।
गोपला और लालू की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में जो खुलासा हुआ, वह चौंकाने वाला है:
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व्यवसायी से दुश्मनी: आकाश सिंह उर्फ लालू और दशरथ शुक्ला (जो पहले ही गिरफ्तार हो चुका है) व्यवसायी हरेराम सिंह और उनके बेटे हरीश सिंह के कारोबार में सालों से सहयोग कर रहे थे और ₹10,000 प्रति माह वेतन पाते थे।
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शराब ठेके की डील: छह महीने पहले झारखंड में सरकारी शराब दुकान का ठेका होने वाला था। हरीश सिंह ने लालू और दशरथ को ठेका मिलने पर काम देने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने मध्य प्रदेश के ग्वालियर के प्रेम नारायण शिवहरे को वह काम दे दिया।
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बदले की भावना: इस धोखे से निराश होकर, बदले की भावना में दोनों ने कुख्यात अपराधी सुजीत सिन्हा से संपर्क किया और हरेराम सिंह के परिवार से रंगदारी वसूलने की योजना बनाई।
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गैंगस्टर कनेक्शन: सुजीत सिन्हा ने फिर दुबई में बैठे गैंगस्टर प्रिंस खान से संपर्क किया और रंगदारी का षड्यंत्र रचा। इसके बाद वॉट्सएप और कॉल के जरिए रंगदारी मांगी गई।
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फायरिंग: रंगदारी न देने पर 10 अक्टूबर को हरेराम सिंह के घर पर फायरिंग की गई, जिसके लिए लालू और दशरथ रांची जाकर सुजीत सिन्हा गिरोह के रिया सिन्हा और बबलू खान से हथियार लाए थे।
पुलिस ने दावा किया है कि इस मुठभेड़ और गिरफ्तारी से शहर के अपराधियों का मनोबल गिरा है और इस अवैध अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसने व्यक्तिगत बदले के लिए बड़े गैंगस्टरों का सहारा लिया।
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