Parsudih Violence: खूनी रंजिश, अवैध शराब का विरोध करने पर माफिया का तांडव, पूरे परिवार को बेरहमी से पीटा, परसुडीह में तनाव
जमशेदपुर के परसुडीह में अवैध शराब माफियाओं ने विरोध करने वाले एक ही परिवार के तीन सदस्यों पर जानलेवा हमला कर दिया है। 15 गुर्गों द्वारा लाठी-डंडों से किए गए इस बर्बर हमले और इलाके में पसरे खौफ की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी मोहल्ले में फैलते इस 'जहरीले' धंधे और माफिया की दबंगई के सच से अनजान रह जाएंगे।
जमशेदपुर, 17 जनवरी 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर का परसुडीह थाना क्षेत्र शुक्रवार को रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। छोला गौड़ा के दुमका गोड़ा इलाके में अवैध शराब के खिलाफ आवाज उठाना एक परिवार को बेहद महंगा पड़ा। शराब माफिया ने अपने करीब 15 गुर्गों के साथ मिलकर विरोध करने वाले टिंकू, उनकी पत्नी श्याम और उनकी बुजुर्ग मां पर जानलेवा हमला कर दिया। लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस हमलावरों ने सरेराह इस परिवार को लहूलुहान कर दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और दहशत का माहौल है, वहीं पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विरोध की सजा खून: 15 गुर्गों ने घेरकर किया हमला
दुमका गोड़ा इलाके में अवैध शराब की बिक्री वर्षों से स्थानीय लोगों के लिए जी का जंजाल बनी हुई है।
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साहस पड़ा भारी: शुक्रवार को टिंकू और उनका परिवार जब शराब माफिया के अड्डे पर विरोध करने पहुँचा, तो माफिया ने बातचीत के बजाय हिंसा का रास्ता चुना।
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फिल्मी अंदाज में घेराबंदी: माफिया ने एक इशारे पर अपने 10 से 15 गुर्गों को मौके पर बुला लिया। देखते ही देखते गुर्गों ने टिंकू के परिवार पर हमला बोल दिया।
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बर्बरता की हदें पार: प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावर चीख रहे थे और परिवार के सदस्यों को जान से मारने की धमकी दे रहे थे। शोर सुनकर जब मोहल्ले वाले दौड़े, तब जाकर हमलावर वहां से भाग निकले।
सदर अस्पताल में भर्ती: "पुलिस संरक्षण में चल रहा है धंधा"
घायलों को आनन-फानन में स्थानीय लोगों ने सदर अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।
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गंभीर आरोप: घायल श्याम ने अस्पताल के बिस्तर से पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया के हौसले इसलिए बुलंद हैं क्योंकि उन्हें 'स्थानीय संरक्षण' प्राप्त है।
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शिकायतों की अनदेखी: परिवार का दावा है कि उन्होंने कई बार परसुडीह पुलिस से लिखित शिकायत की, लेकिन धंधा बंद होने के बजाय माफिया और भी ज्यादा हिंसक हो गए।
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जांच शुरू: घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम अस्पताल पहुँची और घायलों के बयान दर्ज किए हैं।
परसुडीह शराब माफिया हमला: मुख्य विवरण (Crime Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| स्थान | दुमका गोड़ा, छोला गौड़ा, परसुडीह |
| पीड़ित परिवार | टिंकू, उनकी पत्नी श्याम और मां |
| हमलावर | शराब माफिया और उसके 15 गुर्गे |
| हथियार | लाठी-डंडे और धारदार हथियार |
| मुख्य कारण | अवैध शराब बिक्री का विरोध |
इतिहास का पन्ना: परसुडीह और शराब माफियाओं का पुराना 'सिंडिकेट'
परसुडीह और घाघीडीह का इलाका ऐतिहासिक रूप से जमशेदपुर के उन क्षेत्रों में रहा है जहाँ घनी बस्तियों के कारण अवैध शराब (चुलाई और विदेशी) का धंधा जड़ें जमा चुका है। 1990 के दशक में जब जमशेदपुर का विस्तार हो रहा था, तब इन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में 'हड़िया' और 'महुआ' शराब के नाम पर माफियाओं ने अपना साम्राज्य खड़ा किया। इतिहास गवाह है कि साल 2012 और 2017 में भी परसुडीह में शराब माफियाओं के खिलाफ महिलाओं ने उग्र आंदोलन किए थे, जिनमें कई बार हिंसक झड़पें हुईं। यह इलाका सेंट्रल जेल (घाघीडीह) के करीब होने के कारण भी अपराधियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। आज की घटना ने साबित कर दिया कि 2026 में भी यह 'सिंडिकेट' इतना मजबूत है कि वह आम नागरिकों की जान लेने से भी नहीं हिचक रहा।
दहशत के साये में दुमका गोड़ा: प्रशासन से कड़ी मांग
हमले के बाद इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग डरे हुए हैं कि अगर माफिया ने एक परिवार पर ऐसा हमला किया है, तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित रहेंगे।
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महिला शक्ति का रोष: स्थानीय महिलाओं ने चेतावनी दी है कि अगर 24 घंटे के भीतर हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे परसुडीह थाने का घेराव करेंगी।
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माफिया का साम्राज्य: लोगों का कहना है कि अवैध शराब के कारण यहाँ शाम के बाद महिलाओं और बच्चों का निकलना दूभर हो गया है।
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सुरक्षा की गुहार: निवासियों ने एसएसपी से मांग की है कि इस क्षेत्र में पुलिस पिकेट बनाई जाए और माफियाओं के अड्डों को बुलडोजर से ध्वस्त किया जाए।
सिस्टम पर लगा गहरा दाग
शराब माफिया का एक पूरे परिवार को लहूलुहान कर देना कानून व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। टिंकू और श्याम ने जो साहस दिखाया है, उसे दबने नहीं देना चाहिए। अब गेंद परसुडीह पुलिस के पाले में है—क्या वे आरोपियों को जेल भेजेंगे या माफिया का यह 'जहरीला साम्राज्य' यूँ ही फलता-फूलता रहेगा?
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