Jamshedpur Demolition Drive : एक्शन शुरू! हाई कोर्ट का आदेश और सुप्रीम कोर्ट का वो 'शॉक', 24 इमारतों पर टली बड़ी शामत

जमशेदपुर में हाई कोर्ट के आदेश पर गरजने ही वाले थे बुलडोजर, लेकिन ऐन वक्त पर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने सबको हैरान कर दिया! आखिर साकची और बिष्टुपुर की उन 24 इमारतों का अब क्या होगा?

Feb 2, 2026 - 17:25
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Jamshedpur Demolition Drive : एक्शन शुरू! हाई कोर्ट का आदेश और सुप्रीम कोर्ट का वो 'शॉक', 24 इमारतों पर टली बड़ी शामत
Jamshedpur Demolition Drive : एक्शन शुरू! हाई कोर्ट का आदेश और सुप्रीम कोर्ट का वो 'शॉक', 24 इमारतों पर टली बड़ी शामत

जमशेदपुर: लौहनगरी में उस समय खलबली मच गई जब प्रशासन की टीमें हथौड़े और मजदूरों के साथ शहर की आलीशान इमारतों के सामने खड़ी हो गईं। झारखंड हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद जमशेदपुर अक्षेस (JNAO) ने शहर की उन 24 विवादित इमारतों के अवैध हिस्सों को ढहाने की प्रक्रिया शुरू की, जो लंबे समय से रडार पर थीं। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब शाम ढलते-ढलते दिल्ली (सुप्रीम कोर्ट) से एक ऐसी खबर आई जिसने पूरी कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

साकची से बिष्टुपुर तक मची अफरातफरी

कार्रवाई की शुरुआत साकची बाराद्वारी स्थित भवन संख्या 47 और बिष्टुपुर के पॉश इलाके में होटल रामाडा के बगल वाली पटियाला हाउस बिल्डिंग से हुई। जमशेदपुर अक्षेस के पदाधिकारी कृष्ण कुमार की मौजूदगी में जैसे ही मजदूरों ने अवैध हिस्सों पर चोट करनी शुरू की, पूरे इलाके में मजमा लग गया।

चूंकि पूरी बिल्डिंग अवैध नहीं थी, बल्कि उसके कुछ नक्शे के बाहर के हिस्से अवैध थे, इसलिए भारी मशीनों (बुलडोजर) की जगह मजदूरों को लगाया गया। प्रशासन का इरादा साफ था—कोर्ट की अवमानना नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट का स्टे और 4 बजे का वो 'इंतजार'

जैसे-जैसे दिन चढ़ा, हवा में एक ही बात तैरने लगी— "सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है!" हालांकि, अधिकारी बिना किसी लिखित दस्तावेज के पीछे हटने को तैयार नहीं थे। मजदूरों के हथौड़े चलते रहे और बिल्डिंग मालिकों की सांसें अटकी रहीं। आखिर में शाम 4 बजे सुप्रीम कोर्ट की लिखित कॉपी पहुंचते ही प्रशासन के हाथ रुक गए। फिलहाल, इस तोड़फोड़ पर पूरी तरह रोक लग गई है और अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के फाइनल फैसले पर हैं।

जमशेदपुर में अवैध निर्माण का इतिहास: नक्शा और रसूख का खेल

जमशेदपुर में नक्शे के विपरीत निर्माण की समस्या आज की नहीं है। टाटा स्टील की लीज भूमि और फिर शहरी विकास की दौड़ में कई रसूखदारों ने बेसमेंट को दुकान बना दिया तो कहीं पार्किंग की जगह छज्जे निकाल लिए।

इतिहास गवाह है कि 2011-12 के दौर में भी जमशेदपुर में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चला था, जिसमें कई मॉल और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के हिस्सों को तोड़ा गया था। तब से लेकर आज तक, यह लड़ाई 'विकास बनाम नियम' के बीच झूल रही है। हाई कोर्ट द्वारा चिह्नित ये 24 इमारतें उसी पुरानी फाइल का हिस्सा हैं जो अब फिर से खुल गई हैं।

क्या वाकई बच पाएंगी ये इमारतें?

सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत फिलहाल एक "लाइफलाइन" की तरह है। जमशेदपुर के आम लोगों के बीच यह चर्चा का विषय है कि क्या प्रशासन वाकई बड़े रसूखदारों पर कार्रवाई कर पाएगा? बाराद्वारी और बिष्टुपुर जैसे इलाकों में पार्किंग की कमी और अवैध निर्माण की वजह से सड़कें संकरी हो गई हैं, जिससे जनता परेशान है।

अब बड़ा सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट इमारतों को गिराने का आदेश बरकरार रखता है या फिर कोई भारी जुर्माना लगाकर इन्हें 'रेगुलराइज' करने का रास्ता निकालता है।

अगला कदम क्या होगा?

जमशेदपुर अक्षेस के अधिकारियों का कहना है कि वे कोर्ट के आदेश के पाबंद हैं। जैसे ही दिल्ली से हरी झंडी मिलेगी या कोई नया निर्देश आएगा, कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है। शहर के बिल्डरों और कारोबारियों के बीच इस वक्त भारी तनाव है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।