Parsudih Cyber Crime: बैंक खाते से UPI के जरिए 80 हजार उड़ाए, पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत
परसुडीह के राजेश तिवारी के SBI खाते से UPI के जरिए 80 हजार रुपये निकाले, न कोई लेनदेन किया था न जानकारी दी थी, साइबर थाना जांच में जुटा।
Jamshedpur Cyber Shocker: जमशेदपुर के परसुडीह थाना क्षेत्र के राहरगोड़ा निवासी राजेश कुमार तिवारी के बैंक खाते से 80 हजार रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। यह रकम UPI के माध्यम से ट्रांसफर की गई, जबकि पीड़ित ने कोई भुगतान नहीं किया था।
28 अप्रैल को अचानक निकले 80 हजार रुपये
राजेश कुमार तिवारी टाटा मोटर्स में कार्यरत हैं। 28 अप्रैल को उनके एसबीआई (SBI) बैंक खाते से अचानक 80 हजार रुपये निकाल लिए गए। उन्होंने न तो कोई भुगतान किया था और न ही किसी को अपने खाते की जानकारी साझा की थी। जब उन्होंने बैंक से संपर्क किया, तो पता चला कि रकम UPI के माध्यम से ट्रांसफर हुई है।
कैसे हुआ यह साइबर अपराध?
PHISHING या SIM SWAP? अभी पुलिस जांच कर रही है। संभावित कारण:
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किसी APK (फर्जी ऐप) के जरिए फोन हैक किया गया हो।
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OTP किसी तरह पीड़ित के पास आया हो और उसने (बिना जानकारी) कहीं डाल दिया हो।
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SIM Card डुप्लिकेट कर ली गई हो।
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UPI से जुड़े किसी वेब पेज पर जानकारी लीक हो गई हो।
राजेश का कहना है कि उन्होंने कोई OTP शेयर नहीं किया। इसलिए, चौथा कारण ज्यादा प्रबल लगता है।
Family’s Panic: पीड़ित की चिंता और परिवार का डर
राजेश तिवारी परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। 80 हजार रुपये उनके लिए बड़ी रकम है। घटना के बाद से वे काफी चिंतित हैं। परिवार वालों को भी डर लग रहा है कि कहीं और रुपये न निकल जाएं। राजेश ने तुरंत बैंक को सूचित किया और खाता फ्रीज करा दिया।
साइबर थाने में दर्ज कराई शिकायत
राजेश ने इस मामले में जमशेदपुर के साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बैंक संबंधी रिकॉर्ड्स, लॉग और यूपीआई ट्रांजेक्शन के ट्रैसेबिलिटी पेपर खंगालना शुरू कर दिया है।
UPI ट्रांजेक्शन का पता लगाना मुश्किल, लेकिन नामुमकिन नहीं
एक बार UPI के माध्यम से पैसे निकल जाएं, तो उसे ट्रेस करना मुश्किल परन्तु नामुमकिन नहीं है। साइबर सेल अब न केवल पैसे ट्रांसफर करने वाले खाते की पहचान करेगा, बल्कि उस IP एड्रेस और डिवाइस का भी पता लगाएगा जहां से लेनदेन हुआ था। अक्सर ऐसे मामले बैंक के साथ मिलीभगत और बाद में पैसे वापस मिलने पर ही सुलझते हैं।
क्या विकल्प बचता है?
राजेश को दो विकल्प थे:
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बैंक से वापसी की उम्मीद करें (जो बहुत कम है)।
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पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं (जो उन्होंने किया)।
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RBI (रेज़र्व बैंक ऑफ इंडिया) में शिकायत करें।
पीड़ित ने अभी तक RBI में शिकायत नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, UPI फ्रॉड के मामलों में RBI के पास शिकायत दर्ज कराने से त्वरित कार्रवाई होती है।
क्या यह मामला सिर्फ लोगों को जगाने के लिए काफी है?
यह मामला उन लाखों लोगों के लिए एक चेतावनी है जो यूं ही UPI का उपयोग करते हैं और फोन पर कोई भी लिंक खोल देते हैं। राजेश तिवारी जैसा साधारण व्यक्ति जब एक दिन में 80 हजार रुपये गंवा देता है, तो इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है कि समय आ गया है कि हम डिजिटल लेनदेन को लेकर सतर्क हो जाएं।
आपकी राय क्या है – क्या बैंक को इस प्रकार के UPI फ्रॉड के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? कमेंट में बताएं।
अगर आपके साथ भी कभी ऐसा हो, तो तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें।
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