Birsanagar Tragedy : निर्माणाधीन मकान की ऊपरी मंजिल से गिरा मजदूर, बिना सेफ्टी उपकरण के कराया जा रहा था काम, मौत के बाद परिजनों का हंगामा
जमशेदपुर के बिरसानगर जोन नंबर 5 में निर्माणाधीन मकान से गिरकर धालभूमगढ़ के मजदूर गौरव हेंब्रम की दर्दनाक मौत हो गई है। बिना सेफ्टी बेल्ट के काम कराने वाले ठेकेदार और मुआवजे की मांग को लेकर मचे कोहराम की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर, 16 मई 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के बिरसानगर थाना क्षेत्र में एक बार फिर बिल्डरों और ठेकेदारों की घोर लापरवाही ने एक गरीब मजदूर की जान ले ली है। बिरसानगर जोन नंबर पांच में चल रहे एक आवासीय भवन के निर्माण के दौरान ऊंचाई से गिरने के कारण एक आदिवासी युवक की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने शहर के भीतर चल रहे कंस्ट्रक्शन साइट्स पर मजदूरों की जीवन सुरक्षा और लेबर रिफॉर्म्स (श्रम कानूनों) की धज्जियां उड़ाने वाले ठेकेदारों को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है।
वारदात की दास्तां: तीसरी मंजिल से सीधे कंक्रीट के फर्श पर गिरा गौरव
यह दर्दनाक हादसा शनिवार को बिरसानगर जोन नंबर पांच की एक संकरी गली में बन रही बहुमंजिला इमारत में हुआ।
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बिना सुरक्षा के जोखिम भरा काम: चश्मदीदों के मुताबिक, धालभूमगढ़ के सरविला गांव का रहने वाला 20-22 वर्षीय युवा मजदूर गौरव हेंब्रम ऊपरी मंजिल पर सेंट्रिंग या प्लास्टर का काम कर रहा था। साइट पर उसे न तो कोई सेफ्टी बेल्ट (Safety Belt) दी गई थी और न ही सिर पर हेलमेट था।
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अचानक बिगड़ा संतुलन: काम के दौरान अचानक पैर फिसलने से गौरव सीधे ऊपरी मंजिल से नीचे कंक्रीट के पक्के फर्श पर आ गिरा। गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग सहम गए।
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अस्पताल में दम तोड़ा: लहूलुहान हालत में सह-मजदूरों और स्थानीय लोगों ने उसे तुरंत उठाकर पास के टाटा मोटर्स अस्पताल (Tata Motors Hospital) पहुंचाया। हालांकि, सिर पर लगी गंभीर आंतरिक चोटों के कारण डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
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उजड़ गया परिवार: गौरव अपने पीछे एक दुधमुंही बच्ची और रोती-बिलखती पत्नी को छोड़ गया है। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है और वह बार-बार एक ही बात कह रही है कि 'अब घर का चूल्हा कैसे जलेगा।'
प्रशासनिक रुख: मुआवजे की मांग पर अड़े परिजन, जांच में जुटी पुलिस
घटना की भनक लगते ही मृतक के भाई और धालभूमगढ़ से अन्य ग्रामीण सीधे बिरसानगर पहुंचे।
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मुआवजे पर गतिरोध: परिजनों का साफ कहना है कि जब तक ठेकेदार और मकान मालिक पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और बच्ची की पढ़ाई-लिखाई की लिखित जिम्मेदारी नहीं लेते, तब तक वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
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पुलिसिया तफ्तीश: बिरसानगर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य को रुकवा दिया है। पुलिस ठेकेदार के लाइसेंस और साइट पर सुरक्षा मानकों की जांच कर रही है।
केवल कागजी कार्रवाई या मिलेगा न्याय?
गौरव हेंब्रम की मौत एक दुर्घटना मात्र नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर ठेकेदारों के लालच द्वारा की गई हत्या है। एक गरीब मजदूर की जिंदगी की कीमत केवल कुछ हजार रुपये देकर नहीं चुकाई जा सकती। बिरसानगर पुलिस को चाहिए कि वे गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर दोषी ठेकेदार को जेल भेजें ताकि शहर के अन्य बिल्डरों को एक कड़ा संदेश मिले। जब तक मजदूरों की जान की कीमत तय नहीं होगी, तब तक लौहनगरी की ये गगनचुंबी इमारतें गरीबों के खून से यूं ही लाल होती रहेंगी।
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