Giridih Action : टेलीग्राम पर बांग्लादेश और यूएई तक फैला था बाल यौन शोषण का गंदा धंधा, सीआईडी ने दबोचे दो मुख्य सरगना
झारखंड सीआईडी और साइबर पुलिस ने गिरिडीह में छापेमारी कर टेलीग्राम के जरिए विदेशों में बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) बेचने वाले वहाब और हसन को दबोच लिया है। क्यूआर कोड भुगतान और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के इस खौफनाक सच की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
राँची/गिरिडीह, 16 मई 2026 – झारखंड पुलिस की अपराध अनुसंधान शाखा (CID) के अधीन संचालित साइबर अपराध थाना पुलिस ने इंटरनेट की दुनिया में चल रहे सबसे घिनौने और काले साम्राज्य का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) की खरीद-बिक्री और उसके अवैध प्रसार में शामिल एक बड़े अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए गिरिडीह जिले से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह टेलीग्राम ऐप के सीक्रेट चैनलों के जरिए भारत ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार तक मासूमों के शोषण का धंधा ऑपरेट कर रहा था।
वारदात की दास्तां: टेलीग्राम चैनल, क्लाउड स्टोरेज और विदेशों तक लिंक
सीआईडी को इस रैकेट के संबंध में एक अत्यंत पुख्ता और गुप्त इनपुट मिला था, जिसके बाद 30 मार्च 2026 को साइबर अपराध थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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कोलडीह में छापेमारी: पुलिस की विशेष टीम ने गिरिडीह जिले के कोलडीह इलाके में रणनीतिक घेराबंदी कर दो आरोपियों को दबोचा। इनकी पहचान गिरिडीह निवासी वहाब अंसारी और हसन रजा के रूप में की गई है।
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बरामद हुए डिजिटल हथियार: आरोपियों के पास से कई स्मार्टफोन और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। शुरुआती फोरेंसिक जांच में इन डिवाइसों के भीतर भारी मात्रा में ऑनलाइन बाल यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक और प्रतिबंधित सामग्री मिलने की पुष्टि हो चुकी है।
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ग्लोबल कस्टमर बेस: पूछताछ में जो सच सामने आया उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया। ये आरोपी टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए ओमान, बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों के ग्राहकों से सीधे जुड़े हुए थे।
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स्मार्टफोन बना 'ब्लैक मार्केट': ये लोग देश के विभिन्न राज्यों से ऐसी आपत्तिजनक सामग्री मंगवाते थे, उसे डिलीट होने से बचाने के लिए सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज पर अपलोड करते थे और फिर खरीदारों को सीधे उसका एक्सेस (लिंक) बेच देते थे।
पेमेंट का तरीका: क्यूआर कोड और संदिग्ध बैंक खाते
इस धंधे को पूरी तरह डिजिटल और ट्रैक-फ्री रखने के लिए आरोपी ग्राहकों से सीधे कैश नहीं लेते थे। वे पेमेंट के लिए यूपीआई क्यूआर कोड (QR Code) का इस्तेमाल करते थे। जैसे ही पैसे खाते में आते, क्लाउड का पासवर्ड शेयर कर दिया जाता था। सीआईडी ने आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिसमें विदेशों और दूसरे राज्यों से आए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।
प्रशासन की सख्त चेतावनी और जनता से अपील
सीआईडी अब इस नेटवर्क के मूल स्रोत (जहां ये वीडियो बनाए जा रहे थे) और इसमें शामिल सफेदपोश खरीदारों की तलाश में देशव्यापी छापेमारी कर रही है। झारखंड पुलिस ने आम नागरिकों से एक बेहद महत्वपूर्ण अपील जारी की है। अगर आपको इंटरनेट या सोशल मीडिया पर ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल से जुड़ी कोई भी संदिग्ध गतिविधि, लिंक या चैनल दिखाई दे, तो चुप न रहें। तुरंत 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' के 'वुमैन एंड चाइल्ड सेक्शन' में जाकर अपनी पहचान छुपाकर शिकायत दर्ज कराएं ताकि इस सामाजिक अभिशाप को जड़ से खत्म किया जा सके।
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