Gumla Trap: कैशियर के घर में घुसी एसीबी, 20 हजार की रिश्वत लेते राहुल सिंह रंगे हाथ गिरफ्तार, तबादले के बाद भी कुर्सी से चिपक कर कर रहा था 'कमीशन' का खेल
गुमला लघु सिंचाई कार्यालय के कैशियर राहुल सिंह को एसीबी की टीम ने रिश्वत लेते हुए उसके सरकारी आवास से दबोच लिया है। लोहरदगा ट्रांसफर होने के बावजूद विरमित न होने के पीछे छिपे कमीशन के खेल और इस पूरी ट्रैप कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप विभाग के इस बड़े भ्रष्टाचार से अनजान रह जाएंगे।
गुमला, 14 फरवरी 2026 – भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शनिवार को गुमला में एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। लघु सिंचाई कार्यालय में तैनात कैशियर राहुल सिंह को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। एसीबी की 9 सदस्यीय टीम ने यह जाल बिछाया था, जिसने न केवल एक भ्रष्ट कर्मचारी को बेनकाब किया बल्कि सरकारी तंत्र में ट्रांसफर के बाद भी कुर्सी से चिपके रहने की 'मलाईदार' वजह को भी सार्वजनिक कर दिया।
आवास में बिछाया गया जाल: 20 हजार और गिरफ्तारी
पूरा मामला एक भुगतान से जुड़ा है। घाघरा निवासी ठेकेदार प्रवीण साहू ने एसएस बालिका विद्यालय में एक सरकारी योजना के तहत काम किया था। इस काम के भुगतान का चेक काटने के बदले कैशियर राहुल सिंह लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था।
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एसीबी की छापेमारी: शनिवार को जब एसीबी की टीम ऑफिस पहुंची, तो राहुल वहां नहीं था। टीम ने उसे उसके कार्यालय परिसर स्थित आवास पर घेरा।
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रंगे हाथ दबोचा: जैसे ही ठेकेदार ने राहुल को 20 हजार रुपये थमाए, पहले से घात लगाकर बैठी एसीबी टीम ने उसे धर दबोचा।
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दफ्तर में अफरा-तफरी: गिरफ्तारी के बाद कैशियर को दफ्तर लाया गया, जहां फाइलों की जांच शुरू होते ही अन्य कर्मचारी अपनी कुर्सियां छोड़कर भाग खड़े हुए।
ट्रांसफर के बाद भी 'मोह': विरमित न होने का रहस्य
इस गिरफ्तारी ने विभाग के भीतर एक बड़े प्रशासनिक झोल को उजागर किया है। जांच में पता चला कि राहुल सिंह का तबादला 31 जुलाई 2025 को ही लोहरदगा कर दिया गया था।
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विरमित न होना: करीब 7 महीने बीत जाने के बाद भी कार्यपालक अभियंता ने उसे विरमित (Relieve) नहीं किया था।
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संदेह के घेरे में अफसर: तबादले के बावजूद राहुल ही कार्यालय के चेक काटने और फाइलों के निष्पादन का काम कर रहा था। एसीबी अब इस एंगल की जांच कर रही है कि क्या बड़े अफसरों की शह पर उसे कमीशनखोरी के लिए रोका गया था।
गुमला एसीबी ट्रैप: मुख्य विवरण (Action Snapshot)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Facts) |
| गिरफ्तार आरोपी | राहुल सिंह (कैशियर) |
| रिश्वत की राशि | ₹20,000 (नकद) |
| शिकायतकर्ता | प्रवीण साहू (ठेकेदार) |
| विभाग | लघु सिंचाई कार्यालय, गुमला |
| टीम की संख्या | 9 सदस्यीय एसीबी टीम |
जांच की आंच: अब बड़े अफसरों की बारी
एसीबी के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह जांच केवल कैशियर तक सीमित नहीं रहेगी। जिस चेक के बदले रिश्वत मांगी गई थी, उस पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों और राहुल को विरमित न करने वाले कार्यपालक अभियंता की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है। अगर किसी और की संलिप्तता मिलती है, तो विभाग में एक और बड़ी गिरफ्तारी संभव है।
सिस्टम की सफाई का संदेश
गुमला में हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार चाहे सरकारी आवास की चहारदीवारी के भीतर हो या दफ्तर के केबिन में, एसीबी की नजर से बच पाना मुश्किल है। ठेकेदार प्रवीण साहू की हिम्मत और एसीबी की मुस्तैदी ने भ्रष्ट तंत्र को कड़ा सबक दिया है।
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