Giridih Raid: गिरिडीह में रिश्वतखोर जूनियर इंजीनियर एसीबी के हत्थे चढ़ा, मनरेगा में मांग रहा था कमीशन, रंगे हाथ दबोचा

गिरिडीह में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एसीबी ने मनरेगा जेई अंकुश कुमार को 5000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस पूरे सिंडिकेट और गिरफ्तारी की इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।

Apr 11, 2026 - 15:27
 0
Giridih Raid: गिरिडीह में रिश्वतखोर जूनियर इंजीनियर एसीबी के हत्थे चढ़ा, मनरेगा में मांग रहा था कमीशन, रंगे हाथ दबोचा
Giridih Raid: गिरिडीह में रिश्वतखोर जूनियर इंजीनियर एसीबी के हत्थे चढ़ा, मनरेगा में मांग रहा था कमीशन, रंगे हाथ दबोचा

गिरिडीह/झारखंड, 11 अप्रैल 2026 – भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने गिरिडीह में एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। शनिवार को एसीबी ने मनरेगा (MGNREGA) के कनीय अभियंता (JE) अंकुश कुमार को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। जेई की गिरफ्तारी के बाद पूरे प्रखंड मुख्यालय और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सरकारी योजनाओं में 'कमीशनखोरी' के इस खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब एक जागरूक ग्रामीण ने घूसखोरी की शिकायत एसीबी तक पहुंचाई।

फिल्मी अंदाज में ट्रैप: 5000 रुपये लेते ही घेरे में आए साहब

जेई अंकुश कुमार को गुमान भी नहीं था कि योजना की फाइल आगे बढ़ाने के बदले ली जा रही यह 'पांच हजार' की रकम उनके करियर पर कालिख पोत देगी।

  • योजना की पासिंग का खेल: जानकारी के अनुसार, मनरेगा के तहत चल रही एक योजना के कार्य के एवज में जेई ने शिकायतकर्ता से सुविधा शुल्क की मांग की थी। बार-बार चक्कर कटवाने के बाद सौदा पांच हजार रुपये पर तय हुआ।

  • एसीबी का जाल: शिकायतकर्ता ने चुपचाप हजारीबाग स्थित एसीबी कार्यालय में इसकी सूचना दी। सत्यापन के बाद एसीबी ने केमिकल युक्त नोटों के साथ जाल बिछाया।

  • रंगे हाथ गिरफ्तारी: जैसे ही अंकुश कुमार ने रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, सादे लिबास में तैनात एसीबी के जवानों ने उन्हें दबोच लिया। पानी में हाथ डालते ही जेई की उंगलियां गुलाबी हो गईं, जो उनकी रिश्वतखोरी का पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण है।

सिंडिकेट की जांच: क्या अकेले थे अंकुश या ऊपर तक है सेटिंग?

एसीबी की कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं रहने वाली है।

  1. कागजी कार्रवाई: गिरफ्तारी के बाद जेई को तत्काल हिरासत में लेकर एसीबी मुख्यालय ले जाया गया है, जहाँ उनके द्वारा हैंडल की जा रही सभी मनरेगा फाइलों की जांच की जा रही है।

  2. अन्य पर गाज: एसीबी के अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस रिश्वत कांड में कुछ अन्य कर्मचारियों और बिचौलियों की भूमिका संदिग्ध है।

  3. संपत्ति की जांच: संभावना जताई जा रही है कि एसीबी की टीम अब जेई के आवास और उनके बैंक खातों की भी तलाशी लेगी ताकि आय से अधिक संपत्ति के मामले की पुष्टि की जा सके।

गिरिडीह और मनरेगा: मज़दूरों के हक पर 'बाबूशाही' का पुराना साया

गिरिडीह जिला, जो अपनी अभ्रक (Mica) खदानों और पारसनाथ पहाड़ी के लिए प्रसिद्ध है, पिछले एक दशक से मनरेगा योजनाओं में गबन को लेकर भी चर्चा में रहा है।

  • मजदूरों का पलायन और भ्रष्टाचार: गिरिडीह से बड़े पैमाने पर मजदूरों का पलायन होता है। ऐसे में मनरेगा जैसी योजनाएं उनके लिए जीवनदान होती हैं, लेकिन बिचौलियों और जेई-मुंशी के सिंडिकेट ने इसे 'कमाई का जरिया' बना लिया है।

  • एसीबी का इतिहास: गिरिडीह में पहले भी कई प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और इंजीनियर भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जा चुके हैं। इतिहास गवाह है कि यहाँ मस्टर रोल (Master Roll) में हेराफेरी और फर्जी मजदूरों के नाम पर पैसे निकालने के बड़े रैकेट का खुलासा होता रहा है।

  • अंकुश कुमार का मामला: जेई अंकुश कुमार की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि छोटे स्तर पर भी भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं और कैसे विकास कार्यों का पैसा गरीब की जेब में जाने के बजाय अफसरों की तिजोरी में जा रहा है।

जेल की सलाखें और विभागीय सस्पेंशन

गिरफ्तारी के बाद अब जेई के खिलाफ कड़ी कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है।

  • न्यायिक हिरासत: जेई को विशेष एसीबी कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहाँ से उन्हें जेल भेजने की तैयारी है।

  • विभागीय गाज: इस गिरफ्तारी के बाद ग्रामीण विकास विभाग को रिपोर्ट भेजी जा रही है, जिसके आधार पर अंकुश कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया जाएगा।

  • जनता की अपील: एसीबी ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी सरकारी काम के बदले यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगता है, तो डरे नहीं और सीधे टोल-फ्री नंबर पर इसकी शिकायत करें।

गिरिडीह में जेई अंकुश कुमार की गिरफ्तारी उन तमाम अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो जनता की सेवा के बदले अपनी जेब गरम करने में विश्वास रखते हैं। एसीबी की इस कार्रवाई ने एक बार फिर आम आदमी का कानून पर भरोसा बहाल किया है। हालांकि, पांच हजार की यह छोटी रकम तो सिर्फ एक सिरा है, असली चुनौती उस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की है जो मनरेगा जैसी जनहितकारी योजनाओं को दीमक की तरह चाट रहा है। फिलहाल, एसीबी की जांच जारी है और गिरिडीह में भ्रष्टाचार के कई और 'पंडोरा बॉक्स' खुलने की उम्मीद है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।