DEE Development Engineers IPO: निवेश से पहले जानें जरूरी जानकारी

DEE Development Engineers IPO: निवेश से पहले जानें जरूरी जानकारी

Jun 19, 2024 - 15:39
Jun 19, 2024 - 15:45
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DEE Development Engineers IPO: निवेश से पहले जानें जरूरी जानकारी
DEE Development Engineers IPO: निवेश से पहले जानें जरूरी जानकारी

DEE डेवलपमेंट इंजीनियर्स लिमिटेड (DEE Development Engineers Ltd.) का IPO 19 जून को रिटेल निवेशकों के लिए खुल गया है। कंपनी इस IPO के जरिए 418 करोड़ रुपये जुटाएगी। कंपनी 1.6 करोड़ फ्रेश शेयर जारी करेगी, इसके अलावा 93 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए भी बेचेगी।

19 से 21 जून तक चलने वाले इस IPO का प्राइस बैंड 193-203 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

इश्यू की जानकारी

  • निवेश की तारीख: 19-21 जून
  • इश्यू प्राइस: 193-203 रुपये प्रति शेयर
  • फ्रेश इश्यू: 325 करोड़ रुपये
  • ऑफर फॉर सेल: 93.01 करोड़ रुपये
  • कुल इश्यू साइज: 418.01 करोड़ रुपये
  • लॉट साइज: 73 शेयर
  • लिस्टिंग: BSE और NSE पर

कहां होगा पैसे का इस्तेमाल?

DEE डेवलपमेंट इंजीनियर्स IPO से होने वाली कमाई का अधिकतर हिस्सा कर्ज चुकाने में करेगी। कंपनी प्री-पेमेंट और रीपेमेंट में 175 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके साथ ही, कंपनी कैपिटल बढ़ाने में 75 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इतनी ही राशि जनरल कॉरपोरेट कामकाज में भी इस्तेमाल की जाएगी।

कंपनी का बिजनेस

DDEL कंपनी ऑयल एंड गैस, पावर और केमिकल्स जैसे सेक्टर के लिए पाइपिंग सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। कंपनी पाइपिंग प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग करती है, जिसमें हाई-प्रेशर पाइपिंग सिस्टम्स, पाइपिंग पूल और हाई-फ्रीक्वेंसी इंडक्शन पाइप बेंड्स शामिल हैं।

कंपनी के पास 7 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी हैं, जिसमें 1 बैंकॉक में और 3 हरियाणा के पलवल में हैं। कंपनी अपने बिजनेस वर्टिकल को बढ़ा रही है। ये पलवल फैसिलिटी III में पायलट प्लांट्स को ऑफर, डिजाइन, इंजीनियरिंग, फैब्रिकेशन और मैन्युफैक्चरिंग कर रही है।

कंपनी के फाइनेंशियल्स

FY21 और FY23 के बीच में, DDEL का रेवेन्यू 9.66% बढ़कर 595.5 करोड़ रुपये रहा था। मार्च 2023 के वित्त वर्ष में कंपनी ने 12.97 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था।

कंपनी पर रिस्क

  • IPO का बड़ा हिस्सा कंपनी के कर्ज को चुकाने में किया जाएगा।
  • ऑयल एंड गैस, पावर, प्रोसेस इंडस्ट्रीज और केमिकल सेक्टर में किसी परेशानी से कंपनी के ऑर्डर, रेवेन्यू और वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है।
  • अंडरयूटिलाइजेशन से कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर असर पड़ सकता है।
  • नए इंजीनियरिंग सर्विस कॉन्ट्रैक्ट्स नहीं मिलने से कंपनी की वित्तीय परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है।