Chaibasa Tragedy: चाईबासा में उप मुखिया के घर मातम, 3 साल के मासूम की तालाब में डूबने से मौत, चप्पल देखकर पिता को लगा शक, खेल-खेल में कैसे हुआ बड़ा हादसा
चाईबासा के बायकोड़ा गांव में उप मुखिया गोला सुरीन के 3 वर्षीय बेटे की तालाब में डूबने से मौत हो गई। पिता खेत में नाली निर्माण का काम कर रहे थे। बच्चे का चप्पल तालाब के पास मिलने पर पिता को अनहोनी का शक हुआ। ग्रामीणों ने तालाब में छलांग लगाकर मासूम राम को बाहर निकाला, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
चाईबासा, 20 नवंबर 2025 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (West Singhbum) जिले के चाईबासा में आज एक दर्दनाक हादसे ने पूरे बायकोड़ा गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है। सोनुआ थाना क्षेत्र के बायकोड़ा गांव में उप मुखिया गोला सुरीन के 3 वर्षीय मासूम पुत्र की तालाब में डूबने से मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब पिता खेत में काम कर रहे थे और मासूम खेलते-खेलते मौत के करीब पहुँच गया। बेटे को आवाज देने पर जब तालाब के किनारे चप्पल मिली, तो पिता को जो शक हुआ, उसने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। ग्रामीणों की तत्काल मदद के बावजूद भी बच्चे को बचाया नहीं जा सका और सोनुआ अस्पताल (Sonua Hospital) में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
खेल-खेल में मौत तक: जब पिता का ध्यान हटा
उप मुखिया गोला सुरीन अपने 3 वर्षीय बेटे मासूम राम को लेकर खेत में गए थे, जहां नाली निर्माण का कार्य चल रहा था।
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लापरवाही नहीं थी: पिता गोला सुरीन खेत में काम में व्यस्त थे और बच्चा उनके आसपास ही खेल रहा था। लेकिन खेलते-खेलते मासूम तालाब के किनारे पहुंच गया। यह हादसा सिर्फ कुछ मिनटों की लापरवाही का परिणाम है, जो किसी भी परिवार को तोड़ सकता है।
चप्पल ने दिया पहला संकेत: जब पूरा गांव तालाब में कूदा
जब उप मुखिया गोला सुरीन का ध्यान अपने पुत्र पर गया, तो उन्होंने उसे आवाज लगानी शुरू की।
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शक गहराया: आवाज लगाने पर भी जब बेटे का कोई जवाब नहीं आया, तो पिता को तालाब के पास मासूम का चप्पल मिला। यह देखते ही उन्हें किसी अनहोनी का शक हुआ और वह चीखने लगे।
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ग्रामीणों का सहयोग: चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर ग्रामीण तुरंत दौड़कर आए। देरी न करते हुए कई ग्रामीणों ने तालाब में छलांग लगायी और काफी तलाश के बाद मासूम राम को बाहर निकाला।
अस्पताल में मृत घोषित: रो-रोकर बुरा हाल
ग्रामीणों ने आनन-फानन में बच्चे को सोनुआ अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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डॉक्टरों ने पुष्टि की: अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद मासूम को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही उप मुखिया और उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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शोक की लहर: घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे बायकोड़ा गांव में गहरी शोक की लहर है।
इस दुखद घटना ने माता-पिता के लिए एक बड़ी चेतावनी दी है कि बच्चों को पानी के स्रोतों (Water bodies) के पास अकेला छोड़ना कितना खतरनाक हो सकता है।
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