Chaibasa CRPF: परेड के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत, बेटे को पदस्थ कराकर लौटे जवान का निधन

चाईबासा में सीआरपीएफ जवान गोपालजी सिंह की हृदयगति रुकने से मौत क्यों हुई। ड्यूटी पर लौटने के एक दिन बाद क्यों हुआ यह दुखद हादसा। बेटे को आईटीबीपी में उप-निरीक्षक बनाकर लौटे इस बहादुर सैनिक की कहानी। शहादत की खबर सुनकर कैंप और पैतृक गाँव गोरखपुर में क्यों छाया सन्नाटा।

Dec 9, 2025 - 14:56
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Chaibasa CRPF: परेड के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत, बेटे को पदस्थ कराकर लौटे जवान का निधन
Chaibasa CRPF: परेड के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत, बेटे को पदस्थ कराकर लौटे जवान का निधन

चाईबासा, 9 दिसंबर 2025 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा में केंद्रीय आरक्षित पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 197 वीं वाहिनी के जवान गोपालजी सिंह (46) का अचानक हृदयगति रुकने से निधन हो गया। यह घटना उस समय हुई, जब वह अपने बेटे को एक बड़ी जिम्मेदारी पर पदस्थ कराकर कर्तव्य पर लौटे ही थे। इस दुखद हादसे से पूरे वाहिनी में शोक का माहौल छा गया है।

परंतु के मैदान में बिगड़ी तबीयत

वाहिनी के अन्य जवानों ने बताया कि मंगलवार सुबह डेरे में सभी सैनिक नियमित परंतु कर रहे थे, तभी गोपालजी सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गई। बिना किसी देरी के उन्हें चाईबासा के सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जाँच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

  • गौरवपूर्ण वापसी: गोपालजी सिंह कुछ दिनों की छुट्टी पर थे। इस अवकाश का कारण अत्यंत गौरवपूर्ण था—वह अपने बेटे को इंडो तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), दिल्ली में उप-निरीक्षक के पद पर कार्यभार ग्रहण कराने गए थे। वह रविवार को ही चाईबासा लौटे थे और सोमवार से उन्होंने पुनः अपना कर्तव्य शुरू किया था। कर्तव्य पर लौटने के एक दिन बाद ही उनका इस तरह से दुनिया से चले जाना हर किसी को झकजोर गया।

वाहिनी से गोरखपुर तक शोक की लहर

गोपालजी सिंह के निधन की खबर से पूरे सीआरपीएफ डेरे में गहरा सन्नाटा छा गया है। जवानों ने कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके शव को उनके पैतृक गांव गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) के बेलघाट स्थित सिसवा बाबू गाँव भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।

  • परिवार की चिंता: उनकी मृत्यु की खबर से उनके परिवार और उनके पैतृक गाँव में शोक की लहर दौड़ गई है। सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनकी सेवा को याद किया और शोक व्यक्त करते हुए उनके परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। यह हादसा सैनिकों की कठिन सेवा और उनके परिवारों की बड़ी चिंताओं को दर्शाता है। गोपालजी सिंह जैसे जवान सारंडा वन क्षेत्र में उग्रवादियों के खिलाफ लगातार तलाशी अभियान चलाकर देश की सेवा कर रहे थे। राष्ट्र उनकी इस शहादत को सलाम करता है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।