Bihar Politics : भाजपा के 18 से अधिक विधायकों के टिकट पर संकट, शाह की नई रणनीति से मच गया हड़कंप

बिहार चुनाव 2025 में भाजपा ने बड़ा दांव खेला है। 18 से ज्यादा विधायकों के टिकट कट सकते हैं। जानिए अमित शाह की नई रणनीति और किन सीटों पर बदल सकता है खेल।

Sep 29, 2025 - 15:34
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Bihar Politics  : भाजपा के 18 से अधिक विधायकों के टिकट पर संकट, शाह की नई रणनीति से मच गया हड़कंप
Bihar Politics : भाजपा के 18 से अधिक विधायकों के टिकट पर संकट, शाह की नई रणनीति से मच गया हड़कंप

बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस बार खबरें आ रही हैं कि भाजपा अपने ही कई विधायकों का टिकट काट सकती है। पार्टी सूत्रों की मानें तो करीब 18 से ज्यादा विधायकों की स्थिति पार्टी के लिए जोखिमभरी बताई जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण है – अपने ही क्षेत्र में जनता का विरोध और एंटी-इनकंबेंसी।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार में भाजपा इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन लगभग 35 सीटें ऐसी थीं, जहां पार्टी बहुत कम अंतर से हार गई थी।

अमित शाह की गुप्त मीटिंग और नई रणनीति

पार्टी के अंदर से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 145 से 150 सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर मंथन पूरा कर लिया है। इसका ऐलान 6 अक्टूबर के बाद किया जा सकता है, जब निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीखें घोषित करेगा।

माना जा रहा है कि इस बार भाजपा मध्य प्रदेश चुनाव मॉडल को फॉलो करेगी। यानी, मौजूदा विधायकों के अलावा पूर्व सांसदों और नए चेहरों को मैदान में उतारा जाएगा।

किन सीटों पर बदल सकता है खेल?

सूत्र बताते हैं कि बेतिया, समस्तीपुर, अररिया और सीमांचल क्षेत्र की कई सीटों पर पार्टी बड़े बदलाव कर सकती है।

  • मनेर सीट से भाजपा निखिल आनंद को उम्मीदवार बनाने की तैयारी में है। वे भाजपा के राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के महासचिव हैं और लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं।

  • इसी तरह सारण से सांसद राजीव प्रताप रूडी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, रामकृपाल यादव और आरके सिंह जैसे दिग्गज नेताओं को भी इस बार विधानसभा चुनाव में उतारने की चर्चा तेज है।

महिलाओं और युवाओं पर फोकस

भाजपा की रणनीति इस बार नारी शक्ति और युवा शक्ति पर भी केंद्रित है। पार्टी चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा सीटों पर महिलाएं और युवा उम्मीदवार उतारे जाएं, ताकि विपक्ष को चौंकाया जा सके।

इतिहास गवाह है कि बिहार की राजनीति में महिला वोटरों ने कई बार चुनावी नतीजे बदल डाले हैं। 2005 और 2010 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जेडीयू को महिला वोटरों का जबरदस्त समर्थन मिला था। भाजपा उसी ट्रेंड को दोहराने की कोशिश में है।

2020 की हार से सबक

2020 में भाजपा ने सीवान, राघोपुर, किशनगंज और भागलपुर जैसी सीटों पर मामूली अंतर से हार झेली थी। यह वही समय था जब महागठबंधन ने भाजपा-जेडीयू को कड़ी टक्कर दी थी। पार्टी अब इस हार से सबक लेते हुए “नो-रिस्क टिकट स्ट्रैटेजी” अपना रही है।

टिकट कटेगा या बदलेगा समीकरण?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा जब अपने ही विधायकों के टिकट काटेगी, तो इससे पार्टी के अंदर बगावत भी हो सकती है। लेकिन रणनीतिकार मानते हैं कि जनता के मूड को देखते हुए यह फैसला जरूरी है।

6 अक्टूबर के बाद जब उम्मीदवारों की सूची सामने आएगी, तब असली तस्वीर साफ होगी कि आखिर भाजपा ने बिहार में किस तरह का खेला खेला है। फिलहाल इतना तय है कि इस बार का चुनाव सिर्फ राजद बनाम एनडीए नहीं, बल्कि नए चेहरों बनाम पुराने चेहरों की लड़ाई भी होने वाला है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।