Bangladesh Horror: गैरेज में बंद कर हिंदू युवक को जिंदा जलाया, बांग्लादेश में 40 दिन के भीतर 10 हिंदुओं का कत्ल, चुनाव से पहले भड़काऊ भाषणों ने फैलाई आग
बांग्लादेश के नरसिंदी में हिंदू युवक चंचल भौमिक को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की रूह कंपा देने वाली रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों पर हो रहे सुनियोजित हमलों और कट्टरपंथी नेताओं के भड़काऊ बयानों का पूरा सच विस्तार से पढ़िए वरना आप पड़ोसी देश में सुलग रही नफरत की इस खौफनाक हकीकत को जानने से चूक जाएंगे।
ढाका/नरसिंदी, 25 जनवरी 2026 – पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक ऐसी खबर आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। नरसिंदी जिले में एक और हिंदू युवक चंचल भौमिक को मजहबी नफरत की भेंट चढ़ा दिया गया। चंचल को उसके ही गैरेज के भीतर शटर बंद कर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया। 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का यह नंगा नाच थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले मात्र 40 दिनों के भीतर 10 हिंदुओं की नृशंस हत्या की जा चुकी है, जिससे वहां रह रहे अल्पसंख्यक समुदाय में भारी दहशत का माहौल है।
जिंदा जलाया गया परिवार का इकलौता सहारा
चंचल भौमिक अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। वह रात को अपने गैरेज के अंदर सो रहा था, तभी अज्ञात हमलावरों ने बाहर से शटर गिराया और पेट्रोल डालकर आग लगा दी।
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बेसहारा हुआ परिवार: चंचल के पीछे अब उसकी बीमार माँ, एक दिव्यांग बड़ा भाई और एक छोटा भाई रह गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार चंचल बेहद सीधा व्यक्ति था और उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी।
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सुनियोजित साजिश: चंचल के परिवार का आरोप है कि यह महज कोई दुर्घटना नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है, जिसका मकसद हिंदुओं के मन में डर पैदा करना है।
40 दिन और 10 लाशें: नरसिंदी बना 'किलिंग फील्ड'
नरसिंदी जिले में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 5 जनवरी को 40 वर्षीय हिंदू दुकानदार शरत मणि चक्रवर्ती की धारदार हथियारों से काटकर हत्या कर दी गई थी। बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाने का एक खौफनाक पैटर्न सामने आ रहा है:
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राणा प्रताप बैरागी: हिंदू पत्रकार को उनकी बर्फ फैक्ट्री से बाहर बुलाकर सरेआम सिर में गोलियां मारी गईं।
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समीर कुमार दास: 28 साल के युवक की पीट-पीटकर हत्या की गई और उसका ऑटो लूट लिया गया।
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दीपू दास: उन पर कथित ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाकर भीड़ ने उनकी जान ले ली।
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भीड़ का न्याय: अमृत मंडल, बज्रेंद्र विश्वास और खोकोन दास जैसे लोगों को भी इसी तरह मौत के घाट उतारा गया है।
बांग्लादेश अल्पसंख्यक हिंसा: एक नजर में (Violence Tracker)
| मृतक का नाम | हत्या का तरीका | जिला/स्थान |
| चंचल भौमिक | पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया | नरसिंदी |
| राणा प्रताप | दिनदहाड़े गोली मारी गई | पत्रकार |
| शरत मणि | धारदार हथियार से हमला | दुकानदार |
| दीपू दास | भीड़ द्वारा लिंचिंग | ईशनिंदा का आरोप |
| खोकोन दास | जिंदा जलाया गया | कारोबारी |
इतिहास का पन्ना: 1971 से 2026 तक हिंदुओं का घटता वजूद
बांग्लादेश के गठन (1971) के समय वहां हिंदुओं की जनसंख्या लगभग 13.5% थी, जो आज घटकर मात्र 7-8% के करीब रह गई है। इतिहास गवाह है कि जब भी बांग्लादेश में चुनाव नजदीक आते हैं, कट्टरपंथी ताकतें ध्रुवीकरण के लिए अल्पसंख्यकों को सॉफ्ट टारगेट बनाती हैं। 1992 के दंगे और 2021 की दुर्गा पूजा हिंसा ऐतिहासिक उदाहरण हैं जहाँ राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए मंदिरों और घरों को फूँका गया। आज 2026 में, जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों का पुनरुत्थान उसी काले इतिहास को दोहरा रहा है। बर्गुना-2 सीट से उम्मीदवार अफजल हुसैन का यह बयान कि "मुस्लिम देश की संसद में गैर-मुस्लिमों की जगह नहीं होनी चाहिए", बांग्लादेश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के ताबूत में आखिरी कील जैसा है।
कट्टरपंथ का खुला ऐलान: "हमें संविधान नहीं, कुरान चाहिए"
चुनाव प्रचार के दौरान कट्टरपंथी नेता खुलेआम भड़काऊ भाषण दे रहे हैं। अफजल हुसैन ने भीड़ से सवाल पूछा, "आपको कुरान चाहिए या भटकाव?" उन्होंने वादा किया है कि चुनाव जीतने पर वे 'चोरी करने वालों के हाथ काटने' जैसी मध्यकालीन सजाएं लागू करेंगे। संविधान को नकार कर 'शरिया आधारित शासन' की यह मांग हिंदुओं के अस्तित्व के लिए सीधा खतरा बन गई है।
न्याय की उम्मीद या पलायन का रास्ता?
चंचल भौमिक की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई है कि अगले हमले की आहट सुनाई देने लगी है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी और स्थानीय प्रशासन की ढिलाई बांग्लादेशी हिंदुओं को एक बार फिर पलायन की ओर धकेल रही है।
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