Bahragora Tragedy: बहरागोड़ा में बहन की डोली से पहले उठी भाई की अर्थी, आर्थिक तंगी में अनिमेष ने काजू बागान में दी जान
बहरागोड़ा के उईनाला गांव में बहन की शादी से 4 दिन पहले भाई अनिमेष साहू ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के कारण हुए इस हृदयविदारक हादसे की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
बहरागोड़ा/पूर्वी सिंहभूम, 18 अप्रैल 2026 – पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा थाना क्षेत्र से एक ऐसी मार्मिक और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने नियति की क्रूरता को बेनकाब कर दिया है। जिस घर में 21 अप्रैल को शहनाइयां गूंजनी थीं और बहन की विदाई की रस्में निभाई जानी थीं, वहां आज भाई का शव देख चीख-पुकार मची है। उईनाला गांव निवासी 23 वर्षीय अनिमेष साहू ने आर्थिक तंगी और बहन की शादी की चिंता में शुक्रवार रात पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास काजू बागान में फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि बढ़ती बेरोजगारी और मध्यमवर्गीय परिवारों के आर्थिक बोझ की एक दर्दनाक तस्वीर है।
शहनाई की जगह मातम: काजू के पेड़ से झूलता मिला शव
अनिमेष साहू बीती 17 अप्रैल से अचानक लापता हो गया था। परिवार को अंदेशा था कि वह शादी की तैयारियों के सिलसिले में कहीं गया होगा, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।
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तकनीकी सेल की मदद: पुलिस की टेक्निकल सेल ने अनिमेष के मोबाइल लोकेशन को ट्रैक किया, जिससे पता चला कि उसका अंतिम लोकेशन बहरागोड़ा पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास था।
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खौफनाक बरामदगी: शनिवार सुबह जब पुलिस और परिजन बागान पहुँचे, तो अनिमेष का शव एक काजू के पेड़ से लटका मिला।
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पंचनामा और पोस्टमार्टम: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए घाटशिला भेज दिया है। इस मंजर को देखकर बागान में मौजूद हर ग्रामीण की आंखें नम हो गईं।
आर्थिक तंगी बनी काल: पिता का छलका दर्द
मृतक के पिता महादेव साहू ने पुलिस को दिए बयान में अपनी बेबसी और अनिमेष के तनाव की पूरी कहानी बयां की।
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शादी की चिंता: अनिमेष अपनी इकलौती बहन की शादी को लेकर बहुत भावुक था। वह चाहता था कि बहन की विदाई धूमधाम से हो, लेकिन घर की माली हालत ठीक नहीं थी।
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पैसों का इंतजाम: शादी में होने वाले खर्च और पैसों का इंतजाम न हो पाने के कारण वह पिछले कई दिनों से गहरे मानसिक अवसाद (Depression) में था।
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हौसला टूटा: 21 अप्रैल को होने वाली शादी के लिए वह हर मुमकिन कोशिश कर रहा था, लेकिन अंततः अपनी गरीबी से हारकर उसने मौत को गले लगा लिया।
समाज से सवाल: क्या मध्यमवर्गीय परिवार सुरक्षित हैं?
इस घटना ने समाज और प्रशासन के सामने कई कड़वे सवाल खड़े कर दिए हैं।
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कर्ज और दबाव: शादियों में दिखावे और भारी खर्च के सामाजिक दबाव ने अनिमेष जैसे कितने ही युवाओं को मौत के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
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मानसिक स्वास्थ्य: क्या हम अपने घर के बेटों के मानसिक तनाव को समय रहते समझ पा रहे हैं? 23 साल की उम्र में जान देना एक बड़े मानसिक संकट की ओर इशारा करता है।
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प्रशासनिक सहायता: क्या ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों के लिए ऐसी कोई ठोस सरकारी योजना नहीं है, जो उन्हें ऐसी विषम परिस्थितियों में संबल दे सके?
बहरागोड़ा के उईनाला गांव में आज जो सन्नाटा है, वह बहुत कुछ कह रहा है। अनिमेष साहू की अर्थी उस बहन की डोली से पहले उठ रही है, जिसकी सुरक्षा का वादा उसने कभी किया था। आर्थिक तंगी ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए दफन कर दिया है। महादेव साहू के आंसू और बहन की वो लाल जोड़ा आज सिस्टम और समाज से जवाब मांग रहे हैं। फिलहाल, घाटशिला में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चल रही है और पूरा गांव अनिमेष को अंतिम विदाई देने के लिए खड़ा है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमारे आस-पास के युवाओं को पैसों से ज्यादा हमारे साथ और भरोसे की जरूरत है।
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