Bahragora Rescue: 80 लोगों को लहूलुहान करने वाला 'आतंकी' बंदर गिरफ्तार, वन विभाग ने बिछाया जाल और खत्म हुआ 3 महीने का खौफ
बहरागोड़ा में 80 लोगों को घायल करने वाले आदमखोर बंदर को वन विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद पिंजरे में कैद कर लिया है। बाजार में पसरे सन्नाटे के खत्म होने और बंदर की गिरफ्तारी की पूरी रोमांचक रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप इलाके की इस सबसे बड़ी राहत भरी खबर से चूक जाएंगे।
बहरागोड़ा, 7 फरवरी 2026 – पिछले 90 दिनों से बहरागोड़ा की गलियों में जिस 'आतंक' का राज था, उसका आज अंत हो गया। वन विभाग के जांबाज कर्मियों ने शनिवार दोपहर एक बेहद हाई-वोल्टेज और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को अंजाम देते हुए उस बंदर को पिंजरे में कैद कर लिया, जिसने करीब 80 लोगों को काट-काटकर लहूलुहान कर दिया था। इस बंदर के खौफ से बहरागोड़ा का मुख्य बाजार क्षेत्र शाम होते ही श्मशान जैसा दिखने लगता था। आज जैसे ही यह 'आतंकी' बंदर पिंजरे में बंद हुआ, स्थानीय निवासियों ने तालियां बजाकर वन विभाग का आभार जताया।
दुर्गा मंडप के पास बिछाया गया जाल: ऐसे हुआ 'गिरफ्तार'
वन विभाग की टीम पिछले कई हफ्तों से इस बंदर को पकड़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वह हर बार चकमा देकर भाग निकलता था।
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सटीक लोकेशन: शनिवार दोपहर वन विभाग को सूचना मिली कि बंदर रॉजलाबांध दुर्गा मंडप के पास देखा गया है।
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घेराबंदी: टीम ने बिना देरी किए पूरे इलाके की घेराबंदी की और उसे खाने का लालच देकर पिंजरे की ओर आकर्षित किया।
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ऑपरेशन सक्सेस: जैसे ही बंदर पिंजरे के भीतर गया, वन कर्मियों ने फुर्ती दिखाते हुए उसे लॉक कर दिया। इसके तुरंत बाद उसे विशेष वाहन के जरिए सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया।
80 घायलों की चीखें और 3 महीने का सन्नाटा
यह कोई साधारण बंदर नहीं था। इसने बहरागोड़ा के बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को अपना निशाना बनाया था। कई लोग तो इतने गंभीर रूप से घायल हुए थे कि उन्हें टांके लगवाने पड़े। आज इस रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने कहा कि अब वे चैन की नींद सो पाएंगे।
बहरागोड़ा मंकी रेस्क्यू: मुख्य विवरण (Rescue Snapshot)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Facts) |
| आतंक की अवधि | पिछले 3 महीने (90 दिन) |
| घायलों की संख्या | लगभग 80 लोग |
| लोकेशन | रॉजलाबांध दुर्गा मंडप, बहरागोड़ा |
| विभाग की योजना | घने जंगल (प्राकृतिक आवास) में छोड़ना |
| वर्तमान स्थिति | बंदर सुरक्षित, इलाका आतंक मुक्त |
अब कहाँ जाएगा यह 'विद्रोही' बंदर?
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बंदर को इंसानी आबादी से मीलों दूर एक ऐसे घने जंगल में छोड़ा जाएगा जहाँ उसे पर्याप्त भोजन और पानी मिल सके। विभाग का मानना है कि एकांत और प्राकृतिक वातावरण में रहने से बंदर का व्यवहार फिर से सामान्य हो सकता है।
ग्रामीणों ने किया वन कर्मियों का सम्मान
बंदर की गिरफ्तारी के बाद पूरे बहरागोड़ा बाजार में उत्सव जैसा माहौल दिखा। लोगों ने वन विभाग की रेस्क्यू टीम की कार्यकुशलता को सलाम किया। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि पिछले तीन महीनों में उनके व्यापार पर भी बुरा असर पड़ा था क्योंकि लोग बंदर के डर से बाजार आने से कतराते थे।
दहशत का अंत, नई शुरुआत
बहरागोड़ा के लिए आज की दोपहर किसी बड़ी जीत से कम नहीं है। 80 लोगों के जख्म अब धीरे-धीरे भरेंगे, लेकिन यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक है कि वन्यजीवों के साथ इस संघर्ष को रोकने के लिए ठोस और स्थाई नीति की जरूरत है।
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