Adityapur Strike: डोंगे नष्ट, दोमुहानी नदी घाट पर प्रशासन का बड़ा हल्ला बोल, 8 नावें जमींदोज, बालू माफियाओं के सिंडिकेट में मचा हड़कंप
सरायकेला-खरसावां प्रशासन ने आदित्यपुर के सापड़ा दोमुहानी नदी घाट पर गुप्त छापेमारी कर अवैध बालू उत्खनन में लगी 8 नावों को मौके पर ही नष्ट कर दिया है। गम्हरिया अंचलाधिकारी के नेतृत्व में हुई इस सर्जिकल स्ट्राइक और माफियाओं के भागने की पूरी सनसनीखेज हकीकत यहाँ दी गई है वरना आप भी नदियों के सीने को छलनी करने वाले इस खौफनाक कारोबार के सच से अनजान रह जाएंगे।
आदित्यपुर (सरायकेला), 24 दिसंबर 2025 – औद्योगिक नगरी आदित्यपुर से सटे सापड़ा दोमुहानी नदी घाट पर बुधवार को प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' चलाकर बालू माफियाओं की कमर तोड़ दी। उपायुक्त के कड़े निर्देशों के बाद गम्हरिया अंचलाधिकारी (CO) प्रवीण कुमार और खनन विभाग की संयुक्त टीम ने नदी के बीचों-बीच चल रहे अवैध साम्राज्य पर धावा बोला। इस अचानक हुई छापेमारी में बालू निकालने के काम में लगे 8 डोंगा (देशी नावें) को पकड़ा गया और उन्हें मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। प्रशासन की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने उन सफेदपोश सिंडिकेट्स को हिलाकर रख दिया है जो रात के अंधेरे और सुबह की धुंध में स्वर्णरेखा के आंचल को छलनी कर रहे थे।
इतिहास: दोमुहानी का संगम और बालू की 'काली' विरासत
ऐतिहासिक रूप से स्वर्णरेखा और खरकई नदियों का संगम स्थल यानी 'दोमुहानी' जमशेदपुर और आदित्यपुर के लिए आस्था और पर्यावरण का केंद्र रहा है। 1900 के दशक में जब टाटा स्टील की नींव पड़ी, तब इन नदियों का पानी और रेत शहर निर्माण की रीढ़ बना। हालांकि, पिछले दो दशकों में विकास की अंधी दौड़ ने यहाँ 'बालू माफिया' को जन्म दिया। 2010 के बाद जब निर्माण कार्यों में तेजी आई, तो पारंपरिक नावों की जगह 'डोंगा' ने ले ली, जो नदी की गहराई से रेत खींचने के लिए डिजाइन किए गए हैं। सापड़ा का यह इलाका हमेशा से तस्करी का 'हॉटस्पॉट' रहा है क्योंकि यहाँ से शहर के भीतर प्रवेश करना आसान होता है। आज की कार्रवाई इसी अवैध विरासत को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा प्रहार है।
छापेमारी का मंजर: नदी के बीच जब गरजी प्रशासन की मशीनें
गम्हरिया अंचलाधिकारी को गुप्त सूचना मिली थी कि धुंध का फायदा उठाकर माफियाओं ने दर्जनों डोंगा सापड़ा घाट पर उतार दिए हैं।
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अचानक घेराबंदी: पुलिस बल और अंचल कर्मियों ने घाट की ओर जाने वाले रास्तों को ब्लॉक किया और नदी तट पर मोर्चा संभाला।
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माफियाओं का पलायन: प्रशासन की टीम को देखते ही नदी में मौजूद नाविक और मजदूर पानी में कूदकर भागने लगे।
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नावों का विनाश: मौके पर पाए गए 8 विशाल डोंगा, जिनका उपयोग गहराई से बालू निकालने के लिए किया जा रहा था, उन्हें कुल्हाड़ियों और मशीनों के जरिए टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया ताकि उनका दोबारा उपयोग न हो सके।
पर्यावरण और प्रशासन: 'जीरो टॉलरेंस' का संदेश
अंचलाधिकारी प्रवीण कुमार ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल सांकेतिक नहीं है।
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नदी का स्वरूप: अवैध खनन के कारण सापड़ा और दोमुहानी के पास नदी की धारा बदल रही है और जलस्तर नीचे गिर रहा है।
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खनन इंस्पेक्टर की रिपोर्ट: खनन विभाग ने उन लोगों की सूची बनानी शुरू कर दी है जो इन डोंगा मालिकों को 'प्रोटेक्शन' देते हैं।
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सख्त चेतावनी: अधिकारियों ने साफ कह दिया है कि अगर फिर से नाव उतारी गईं, तो न केवल सामग्री नष्ट होगी, बल्कि एफआईआर दर्ज कर कड़ी जेल की सजा भी सुनिश्चित की जाएगी।
दोमुहानी ऑपरेशन का संक्षिप्त विवरण (Quick Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| प्रमुख स्थल | सापड़ा दोमुहानी नदी घाट, आदित्यपुर |
| टीम का नेतृत्व | प्रवीण कुमार (CO गम्हरिया) एवं खनन इंस्पेक्टर |
| बरामदगी/नष्ट | 08 बालू निकालने वाले डोंगा (नाव) |
| मुख्य उद्देश्य | अवैध बालू उत्खनन पर रोक और नदी संरक्षण |
| आगामी कदम | क्षेत्र में 24/7 निगरानी और सख्त एफआईआर |
माफियाओं का नेटवर्क: अब रडार पर 'बड़े नाम'
सापड़ा घाट की यह छापेमारी तो महज एक ट्रेलर है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासन अब उन ट्रेक्टर मालिकों और ट्रांसपोर्टर्स की कुंडली खंगाल रहा है जो इन नावों के जरिए नदी का बालू शहर के बड़े बिल्डरों तक पहुँचाते हैं। बालू के इस 'काले खेल' में शामिल कुछ सफेदपोशों के नाम भी जांच के घेरे में हैं। डीसी के कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि पर्यावरण की कीमत पर जेब भरने वालों की अब खैर नहीं है।
प्रशासन का खौफ जरूरी है
दोमुहानी घाट पर हुई इस कार्रवाई ने फिलहाल अवैध बालू के शोर को शांत कर दिया है। 8 नावों का नष्ट होना माफियाओं के लिए बड़ा आर्थिक झटका है। लेकिन असली चुनौती इस कार्रवाई की निरंतरता को बनाए रखना है, ताकि स्वर्णरेखा और खरकई का सीना फिर से छलनी न हो सके।
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