TSDAV Event: टीएस डीएवी स्कूल में दीपावली और छठ पर भव्य रंगारंग कार्यक्रम, रंगोली, छठ गीत और दीया मेकिंग ने जीता सबका दिल

टीएस डीएवी पब्लिक स्कूल में शनिवार को दीपावली और छठ पर्व के अवसर पर छात्रों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। गणेश स्तुति से शुरू हुए इस कार्यक्रम में छठ के मनमोहक गीत, रंगोली, दीया मेकिंग जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं। प्राचार्य मुकेश कुमार ने बच्चों को पर्वों के नैतिक मूल्यों को समझने के लिए प्रेरित किया।

Oct 18, 2025 - 14:48
 0
TSDAV Event: टीएस डीएवी स्कूल में दीपावली और छठ पर भव्य रंगारंग कार्यक्रम, रंगोली, छठ गीत और दीया मेकिंग ने जीता सबका दिल
TSDAV Event: टीएस डीएवी स्कूल में दीपावली और छठ पर भव्य रंगारंग कार्यक्रम, रंगोली, छठ गीत और दीया मेकिंग ने जीता सबका दिल

जमशेदपुर स्थित टीएस डीएवी पब्लिक स्कूल में शनिवार को एक अत्यंत मनमोहक और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन आगामी दो महान पर्वों - प्रकाश के पर्व दीपावली और सूर्य की उपासना के महापर्व छठ को समर्पित था। स्कूल की विशेष प्रार्थना सभा को छात्रों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से एक छोटे भारत की झलक में बदल दिया। बच्चों का उत्साह और कलात्मकता देखकर शिक्षक और अभिभावक दोनों ही गदगद हो गए।

कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय परंपरा के अनुसार शुभ और मांगलिक गणेश स्तुति से हुई। संगीत और ताल के बीच छात्रों ने गणेश वंदना करके कार्यक्रम को दिव्य और शांत वातावरण दिया। इसके बाद आयोजन को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रखते हुए ज्ञानवर्धक बनाया गया।

पर्वों का ज्ञान और कला का प्रदर्शन

दीपावली, धनतेरस और छठ से जुड़ी एक रोचक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। बच्चों ने सिर्फ प्रस्तुतियां ही नहीं दीं, बल्कि पर्वों के इतिहास और धार्मिक महत्व पर आधारित प्रश्नों के तेज जवाब दिए, जिससे यह साबित हुआ कि वे अपनी संस्कृति के प्रति कितने जागरूक हैं।

  • छठ का जादू: कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण छठ के मनमोहक गीतों की प्रस्तुति थी। छात्रों ने जब बिहार और झारखंड की लोक संस्कृति से जुड़े छठ गीत गाए, तो पूरे सभा भवन में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बन गया। छठ पर्व की साफ-सफाई, संयम और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को बच्चों ने सजीव कर दिया।

  • कला प्रतियोगिताएं: दीपावली के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में छात्रों ने अपनी रचनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया। इनमें रंगोली, तोरण द्वार, फेस पेंटिंग्स और दीया मेकिंग जैसी प्रतियोगिताएं शामिल थीं। रंगोली के माध्यम से बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण और भारतीय कला को उकेरा, वहीं दीया मेकिंग प्रतियोगिता ने उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका दिया।

प्राचार्य का बहुमूल्य संदेश

सभी प्रतियोगिताओं में शिक्षकों की एक विशेष कमेटी ने निर्णायक की भूमिका निभाई और प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को पुरस्कृत किया।

सभा के अंत में, स्कूल के प्राचार्य मुकेश कुमार ने अपने बहुमूल्य शब्दों से बच्चों को संस्कारों और पर्वों के नैतिक महत्व को समझाया। उन्होंने प्रेरित किया कि बच्चे सिर्फ पर्व न मनाएं, बल्कि उनके मूल्यों - जैसे छठ का संयम और दीपावली का अंधकार पर प्रकाश की जीत के सिद्धांत - को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने सभी को आगामी पर्वों के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं दीं। टीएस डीएवी पब्लिक स्कूल का यह आयोजन सांस्कृतिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा के बीच एक सुंदर तालमेल का उदाहरण था।

आपकी राय में, बच्चों को पारंपरिक पर्वों के नैतिक मूल्यों को सिर्फ भाषणों के बजाय व्यवहारिक रूप से समझाने और सिखाने के लिए स्कूल प्रशासन को कौन से दो सबसे प्रभावी और क्रियात्मक कदम उठाने चाहिए?

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।