SIR Voter Revision 2025: 51 करोड़ वोटरों की जांच, DMK की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती – क्या यह 'बैकडोर NRC' है या लोकतंत्र की मजबूती?

भारत के 12 राज्यों-UTs में SIR शुरू: 4 नवंबर से 51 करोड़ वोटरों का घर-घर सत्यापन। तमिलनाडु में DMK ने SC में याचिका दायर, असम अलग। बिहार मॉडल पर विवाद – क्या वोटरों का हक छिनेगा? पूरी डिटेल्स, टाइमलाइन और प्रभाव।

Nov 4, 2025 - 10:56
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SIR Voter Revision 2025: 51 करोड़ वोटरों की जांच, DMK की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती – क्या यह 'बैकडोर NRC' है या लोकतंत्र की मजबूती?
SIR Voter Revision 2025: 51 करोड़ वोटरों की जांच, DMK की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती – क्या यह 'बैकडोर NRC' है या लोकतंत्र की मजबूती?

नई दिल्ली, 4 नवंबर 2025 (न्यूज एडिटर डेस्क): भारतीय लोकतंत्र की नींव माने जाने वाली मतदाता सूची को मजबूत करने का एक और बड़ा कदम आज से उठ गया है। देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हो गई। यह बिहार में जून 2025 से चले पहले चरण के बाद दूसरा दौर है, जो 51 करोड़ से अधिक वोटरों को कवर करेगा। लेकिन इस अभियान के साथ ही राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ DMK ने इसे 'असंवैधानिक' बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है, जबकि असम को नागरिकता सत्यापन के कारण अलग रखा गया है। क्या यह प्रक्रिया वोटरों के अधिकारों की रक्षा करेगी या लाखों को मताधिकार से वंचित कर देगी? आइए, इसकी गहराई में उतरें।

चुनाव आयोग (ECI) के अनुसार, SIR एक व्यापक, जन-केंद्रित अभ्यास है, जो मतदाता सूचियों को सटीक, समावेशी और अद्यतन बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 27 अक्टूबर 2025 को घोषणा की थी कि यह पुनरीक्षण 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलेगा। इसके बाद 9 दिसंबर को मसौदा सूची जारी होगी, दावा-आपत्तियां 9 दिसंबर से 8 जनवरी 2026 तक दर्ज होंगीं, और अंतिम सूची 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। क्वालीफाइंग डेट 1 जनवरी 2026 रखा गया है, यानी 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष पूरे करने वाले सभी नागरिक पात्र होंगे।

इस चरण में शामिल 9 राज्य हैं: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़, गोवा, राजस्थान और गुजरात। केंद्रशासित प्रदेश: अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप तथा पुडुचेरी। इनमें तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में 2026 के मार्च-मई में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, जबकि बाकी राज्यों में अगले 2-3 वर्षों में। कुल 51 करोड़ वोटर प्रभावित होंगे, जिनमें प्रवासी मजदूर, नए युवा मतदाता और अल्पसंख्यक समुदाय प्रमुख हैं। ECI ने 5.33 लाख बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) और 7 लाख से अधिक राजनीतिक दलों के एजेंट्स (BLAs) को तैनात किया है। प्रक्रिया में घर-घर जाकर सत्यापन होगा, जिसमें BLO तीन बार विजिट करेंगे।

SIR का महत्व समझना जरूरी है। स्वतंत्रता के बाद यह नौवां ऐसा अभियान है; पिछला 2002-04 में हुआ था। मतदाता सूचियां समय के साथ पुरानी हो जाती हैं – मृत्यु, स्थानांतरण, डुप्लिकेट एंट्रीज या नए वोटरों की अनुपस्थिति से। ECI के मुताबिक, यह संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21 के तहत किया जा रहा है। बिहार के पहले चरण में 8 करोड़ वोटरों की जांच हुई: 47 लाख नाम डिलीट हुए (मृत/स्थानांतरित/डुप्लिकेट), जबकि 21 लाख नए जोड़े गए। अंतिम सूची में 7.42 करोड़ नाम बचे। लेकिन इसी प्रक्रिया ने विवाद खड़ा कर दिया। विपक्ष ने इसे 'बैकडोर NRC' कहा, क्योंकि 2003 की पुरानी सूची को बेसलाइन मानकर बाद के वोटरों से सख्त दस्तावेज मांगे गए। सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया जारी रखने की इजाजत दी, लेकिन आधार, राशन कार्ड जैसे दस्तावेज जोड़ने को कहा।

अब दूसरे चरण में दस्तावेजों की सूची 13 हो गई है (संकेतात्मक, पूर्ण नहीं): जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, सरकारी आईडी, पेंशन ऑर्डर, बैंक पासबुक, शैक्षिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र आदि। आधार को 9 सितंबर 2025 के निर्देशों के तहत शामिल किया गया। BLO फॉर्म भरने में मदद करेंगे, लेकिन अनुपस्थिति पर डिफॉल्ट डिलीशन का खतरा है। ECI का दावा: "यह वोटर-फ्रेंडली है, कोई पेपरलेस नहीं।" लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि ग्रामीण/अशिक्षित वोटरों के लिए चुनौतीपूर्ण।

तमिलनाडु में विवाद सबसे तीखा है। सत्तारूढ़ DMK ने 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, ECI की 27 अक्टूबर और 24 जून 2025 की अधिसूचनाओं को रद्द करने की मांग की। DMK संगठन सचिव आर.एस. भारती ने इसे "संवैधानिक अतिक्रमण" और "डी फैक्टो NRC" बताया। याचिका में कहा गया कि जनवरी 2025 में स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) हो चुका, जिसमें स्थानांतरण/मृत्यु पर अपडेट किया गया। फिर SIR क्यों? यह अनुच्छेद 14 (समानता), 19 (अभिव्यक्ति), 21 (जीवन), 325-326 (चुनाव) का उल्लंघन है। DMK का आरोप: BLO फॉर्म ROPA 1950 या 1960 नियमों के तहत मान्य नहीं; सिटीजनशिप प्रूफ की मांग ECI के दायरे से बाहर; टाइमलाइन (2 माह) अवास्तविक, लाखों वोटर डिफॉल्ट डिलीट हो सकते हैं। CM एम.के. स्टालिन ने इसे BJP की "साजिश" कहा: "बिहार में लाखों असली वोटर हटाए, अब TN दोहराना चाहते हैं।" उन्होंने ऑल-पार्टी मीटिंग बुलाई, जहां रेजोल्यूशन पास हुआ। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने भी विरोध किया। याचिका पर इस सप्ताह सुनवाई संभावित; अगर रुका, तो 2026 TN चुनाव प्रभावित।

मद्रास हाईकोर्ट को ECI ने बताया कि SIR से TN में "फ्रेश वोटर लिस्ट" बनेगी, SSR से अलग। विपक्षी AIADMK पर स्टालिन ने तंज कसा: "BJP से डरते हैं, डबल गेम खेल रहे।" केरल में भी चिंता: 2.78 करोड़ वोटर, 2002 की पुरानी लिस्ट (2.24 करोड़) बेस; लोकल बॉडी चुनावों से ओवरलैप। पश्चिम बंगाल में 'बैकडोर NRC' का डर।

असम का मामला अनोखा। मार्च-अप्रैल 2026 चुनाव के बावजूद इसे SIR से बाहर रखा गया। कारण: सुप्रीम कोर्ट निगरानी में चल रही नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया और सिटिजनशिप एक्ट का विशेष प्रावधान (सेक्शन 6A)। 2019 NRC से 19 लाख नाम बाहर; ड्राफ्ट NRC री-वेरिफिकेशन पर SC में याचिका लंबित। CEC कुमार: "अलग आदेश जारी होगा, NRC पूरा होने पर।" असम सरकार ने ECI से कहा: NRC को SIR दस्तावेज मानें। CPI(M) ने मांग की: "NRC फाइनलाइज करें, फिर SIR।" 'D' वोटर्स (डाउटफुल) की समस्या बरकरार; फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में लाखों केस। यह SIR को 'मिनी-NRC' बनाने का खतरा पैदा करता है, खासकर गरीब/अशिक्षितों के लिए।

SIR के फायदे स्पष्ट: डुप्लिकेट हटाना, नए वोटर जोड़ना, प्रवासियों को अपडेट। लेकिन चुनौतियां: 2003 जैसी पुरानी लिस्ट पर निर्भरता से बाद के वोटरों पर बोझ; दस्तावेजों की कमी से डिसेनफ्रैंचाइजमेंट। बिहार में 65 लाख डिलीट हुए, जिनमें 10,000 बिना कारण (सुपौल/किशनगंज में)। ECI ने AI/LLM से वोटर एनालिसिस का जिक्र किया, लेकिन प्राइवेसी चिंता। राजनीतिक रूप से, यह NDA vs INDIA का मुद्दा: BJP इसे 'क्लीन रोल' कहती, विपक्ष 'वोट सप्रेशन'।

2026 चुनावों से पहले SIR लोकतंत्र को मजबूत कर सकता, लेकिन अगर SC ने DMK याचिका स्वीकारी, तो नया टर्न। वोटर सतर्क रहें: BLO से संपर्क करें, हेल्पलाइन 1950 डायल। क्या यह प्रक्रिया समावेशी बनेगी? नजरें SC पर।

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Team India मैंने कई कविताएँ और लघु कथाएँ लिखी हैं। मैं पेशे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हूं और अब संपादक की भूमिका सफलतापूर्वक निभा रहा हूं।