Saranda Blast: सारंडा के जंगलों में नक्सलियों का आईईडी ब्लास्ट, कोबरा बटालियन का जवान गंभीर रूप से घायल, एयरलिफ्ट कर रांची भेजा गया
पश्चिमी सिंहभूम के छोटानागरा थाना अंतर्गत सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए प्रेशर आईईडी की चपेट में आने से कोबरा 205 बटालियन का जवान घायल हो गया है। एयरलिफ्ट कर रांची के राज अस्पताल भेजने और एसपी अमित रेणु के बड़े बयान की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
चाईबासा/पश्चिमी सिंहभूम, 6 अप्रैल 2026 – एशिया के सबसे घने जंगलों में शुमार सारंडा एक बार फिर बारूदी धमाके से दहल उठा है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे निरंतर सर्च ऑपरेशन के दौरान एक शक्तिशाली आईईडी (IED) विस्फोट हुआ है। इस खौफनाक घटना में सीआरपीएफ (CRPF) की प्रतिष्ठित कोबरा 205 बटालियन का एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। नक्सलियों की इस कायराना हरकत के बाद सुरक्षा बलों ने तत्काल मोर्चा संभाला और घायल जवान को घने जंगलों के बीच से रेस्क्यू कर हेलीकॉप्टर के जरिए एयरलिफ्ट किया। फिलहाल जवान का इलाज रांची के राज अस्पताल में चल रहा है, जहाँ उनकी स्थिति पर डॉक्टरों की टीम नजर बनाए हुए है।
जंगल में बिछा था मौत का जाल: सर्च ऑपरेशन के दौरान फटा प्रेशर आईईडी
सोमवार को सुरक्षा बल सारंडा के उन दुर्गम वन क्षेत्रों में दाखिल हो रहे थे जहाँ नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी।
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अचानक विस्फोट: जैसे ही कोबरा बटालियन की टीम सावधानी से जंगल के भीतर आगे बढ़ रही थी, तभी नक्सलियों द्वारा जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए प्रेशर आईईडी पर एक जवान का पैर पड़ गया।
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जोरदार धमाका: विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि इसकी गूंज दूर तक सुनाई दी। धमाके के साथ ही इलाके में धूल और धुएं का गुबार छा गया।
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तत्परता से रेस्क्यू: साथी जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए घायल साथी को तुरंत सुरक्षित घेरे में लिया और प्राथमिक उपचार दिया। ऊबड़-खाबड़ रास्तों के बावजूद जवान को एयरलिफ्ट पॉइंट तक पहुँचाया गया, जहाँ से उन्हें सीधे रांची भेजा गया।
एसपी अमित रेणु का कड़ा प्रहार: 'कायराना हरकत' से बौखलाए नक्सली
जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) अमित रेणु ने इस घटना की पुष्टि करते हुए नक्सलियों को सख्त चेतावनी दी है।
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बौखलाहट का नतीजा: एसपी ने कहा कि सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव से नक्सली अपनी हार देख रहे हैं, इसलिए वे इस तरह के आईईडी प्लांट कर रहे हैं।
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ग्रामीणों को भी खतरा: उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इन आईईडी की चपेट में न केवल सुरक्षा बल, बल्कि अक्सर बेगुनाह ग्रामीण और मवेशी भी आ जाते हैं, जो नक्सलियों की अमानवीयता को दर्शाता है।
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अभियान होगा तेज: इस हमले के बाद सारंडा के जंगलों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियों को तैनात कर दिया गया है। नक्सलियों की घेराबंदी के लिए रणनीतिक बदलाव किए गए हैं।
सारंडा का रक्तरंजित इतिहास: नक्सलियों का अंतिम गढ़ और आईईडी का खतरा
सारंडा का जंगल दशकों से नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष का केंद्र रहा है। यहाँ का भूगोल नक्सलियों को छिपने में मदद करता है।
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700 पहाड़ियों का घर: सारंडा को 'सात सौ पहाड़ियों का क्षेत्र' कहा जाता है। यहाँ की घनी हरियाली के नीचे नक्सलियों ने जगह-जगह 'लैंडमाइंस' और 'प्रेशर आईईडी' का जाल बिछा रखा है ताकि सुरक्षा बलों की रफ्तार रोकी जा सके।
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कोबरा बटालियन की भूमिका: कोबरा (Commando Battalion for Resolute Action) बटालियन को विशेष रूप से जंगल युद्ध के लिए तैयार किया गया है। सारंडा में नक्सलियों के प्रभाव को कम करने में इस यूनिट ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
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शांति की राह में रोड़ा: पिछले कुछ वर्षों में चाईबासा पुलिस ने कई नक्सली कैंपों को ध्वस्त किया है, जिससे बौखलाकर नक्सली अब 'सरेंडर' करने के बजाय छिपकर वार करने की रणनीति अपना रहे हैं।
नक्सल विरोधी अभियान जारी: पीछे नहीं हटेंगे सुरक्षा बल
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह के धमाके सुरक्षा बलों के हौसले पस्त नहीं कर सकते।
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अतिरिक्त बल की तैनाती: छोटानागरा और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सर्च ऑपरेशन को और अधिक सघन बना दिया गया है। ड्रोन कैमरों की मदद से नक्सलियों की मूवमेंट ट्रैक की जा रही है।
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प्रशासन का संकल्प: झारखंड सरकार और पुलिस प्रशासन का लक्ष्य है कि सारंडा के सुदूर गांवों तक सड़क और बिजली पहुँचाई जाए, जिसमें नक्सली आईईडी बिछाकर सबसे बड़ी बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
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रांची में इलाज: घायल जवान की पहचान गुप्त रखते हुए पुलिस ने बताया कि उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा रही है और उनके परिवार को भी सूचित कर दिया गया है।
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