Ranchi Murder: रांची के रातू में पिता-पुत्र ने गोद ली हुई 13 साल की बेटी का घोंटा गला, सबूत मिटाने एम्बुलेंस से पहुंचे बिहार
रांची के रातू में सुबोध पाठक और उसके बेटे राहुल ने अपनी 13 वर्षीय गोद ली हुई बेटी की हत्या कर दी है। इंस्टाग्राम विवाद, साक्ष्य मिटाने के लिए बिहार में अंतिम संस्कार और पुलिस की वैज्ञानिक जांच के इस रोंगटे खड़े करने वाले सच की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/रातू, 6 अप्रैल 2026 – झारखंड की राजधानी रांची से सटे रातू थाना क्षेत्र के झखड़ाटांड गांव में मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने 'रिश्तों' के पवित्र बंधन पर कालिख पोत दी है। अपनी झूठी शान और तथाकथित 'साख' को बचाने के लिए एक पिता सुबोध पाठक और उसके पुत्र राहुल पाठक ने मिलकर अपनी ही 13 वर्षीय गोद ली हुई नाबालिग बेटी की गला घोंटकर हत्या कर दी। जिस बच्ची को उन्होंने 8 साल पहले सहारा दिया था, उसे ही 'लोक-लाज' की वेदी पर चढ़ा दिया। सोमवार को रांची पुलिस ने इस सनसनीखेज 'ऑनर किलिंग' का खुलासा करते हुए दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
साख के नाम पर मासूम की बलि: इंस्टाग्राम बना विवाद की वजह
पुलिस की पूछताछ में जो बातें सामने आई हैं, वे किसी भी संवेदनशील इंसान का दिल दहला देने के लिए काफी हैं।
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8 साल का साथ: मृतका पिछले 8 वर्षों से सुबोध पाठक के परिवार का हिस्सा थी। उसे बचपन में ही इन लोगों ने गोद लिया था।
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इंस्टाग्राम का विवाद: आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्हें शक था कि नाबालिग बच्ची इंस्टाग्राम के जरिए राहुल पाठक के साले के संपर्क में थी और उसके करीब आ गई थी।
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लोक-लाज का डर: सुबोध और राहुल को लगा कि अगर यह बात समाज में फैली, तो उनकी भारी बदनामी होगी। इसी 'झूठी शान' को बचाने के लिए उन्होंने मासूम की जान लेने का फैसला किया।
साक्ष्य मिटाने का खौफनाक 'ऑपरेशन बिहार'
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शातिर दिमाग का इस्तेमाल कर कानून की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की।
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एम्बुलेंस का खेल: पिता-पुत्र ने एक एम्बुलेंस (JH-01-AA-1245) किराए पर ली। उन्होंने चालक से झूठ बोला कि बच्ची की बीमारी के कारण मौत हो गई है।
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रांची से गया तक का सफर: साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से वे शव को रांची से दूर बिहार के गया ले गए। वहां उन्होंने आनन-फानन में शव का अंतिम संस्कार कर दिया ताकि कोई सबूत बाकी न रहे।
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गुमराह करने की साजिश: वापस लौटकर उन्होंने गांव में यह कहानी फैलाई कि लड़की कहीं भाग गई है। लेकिन ग्रामीणों को उनके व्यवहार पर संदेह हुआ।
रांची और 'ऑनर किलिंग' का काला इतिहास: रोंगटे खड़े करती यादें
रांची के ग्रामीण इलाकों में 'झूठी शान' के नाम पर हत्याओं का इतिहास पुराना है, जहाँ अक्सर अपनों ने ही अपनों का खून बहाया है।
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बौद्धिक अंधकार: यह घटना याद दिलाती है कि समाज चाहे कितना भी डिजिटल हो जाए, लेकिन 'ऑनर किलिंग' जैसी सामाजिक बुराई अभी भी जड़ें जमाए बैठी है।
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तकनीकी जांच की जीत: पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल लोकेशन और टोल प्लाजा के CCTV फुटेज के जरिए उनके झूठ की परतें उधेड़ दीं। टोल प्लाजा के रिकॉर्ड ने पुष्टि की कि एम्बुलेंस उसी समय गया की ओर गई थी जब आरोपियों ने लड़की के गायब होने की बात कही थी।
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FSL का अहम रोल: फोरेंसिक (FSL) टीम को घटनास्थल से ऐसे वैज्ञानिक साक्ष्य मिले, जिन्होंने साबित कर दिया कि मौत स्वाभाविक नहीं, बल्कि गला घोंटने के कारण हुई थी।
पुलिस की कार्रवाई: जब्त हुई एम्बुलेंस और मोबाइल
एसएसपी रांची द्वारा गठित विशेष टीम ने थाना प्रभारी आदिकांत महतो के नेतृत्व में इस ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री को महज कुछ ही घंटों में सुलझा लिया।
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बरामदगी: पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त एम्बुलेंस और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइलों की चैट और कॉल डिटेल्स से हत्या की साजिश के और भी गहरे राज खुलने की उम्मीद है।
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गिरफ्तारी: सुबोध पाठक और राहुल पाठक को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।
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ग्रामीणों का आक्रोश: झखड़ाटांड गांव में इस घटना के बाद से ही तनाव और दुख का माहौल है। ग्रामीणों ने पुलिस से आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग की है।
रातू की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। एक 13 साल की मासूम, जिसने अपने 'पिता' और 'भाई' में रक्षक देखे थे, उसे ही भक्षक बनते देर नहीं लगी। इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल एक बच्ची की जान लेने का बहाना बन गया, जबकि असली हत्यारी वह 'सोच' थी जो साख को जान से बड़ा मानती है। रांची पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने दोषियों को सलाखों के पीछे तो पहुँचा दिया है, लेकिन उस मासूम का बचपन और उसकी जिंदगी अब कभी लौटकर नहीं आएगी। यह मामला नाबालिगों की सुरक्षा और हमारे सामाजिक मूल्यों पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न है।
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