Ranchi Tragedy: सगे भाइयों के साथ नाले में डूबी खुशियां, 2 साल के मासूम की मौत और 3 साल का अरहान बाल-बाल बचा
रांची की मौलाना आजाद कॉलोनी में खुले नाले ने दो सगे भाइयों को निगलने की कोशिश की, जिसमें एक मासूम की जान चली गई। नगर निगम की लापरवाही और इस दर्दनाक हादसे की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी अपने मोहल्ले की सुरक्षा और प्रशासन की इस बड़ी अनदेखी के सच को जानने से चूक जाएंगे।
रांची, 20 जनवरी 2026 – राजधानी रांची के सदर थाना क्षेत्र स्थित मौलाना आजाद कॉलोनी में आज एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने पूरे शहर की रूह कपा दी। रोड नंबर 7 में खेलते-खेलते दो मासूम सगे भाई अचानक मौत के खुले नाले में समा गए। मोहल्ले वालों की जांबाजी ने एक बच्चे को तो यमराज के चंगुल से खींच लिया, लेकिन 2 साल का नन्हा मासूम जिंदगी की जंग हार गया। इस हादसे ने एक बार फिर रांची नगर निगम और जिला प्रशासन के उन दावों की पोल खोल दी है, जिसमें शहर को सुरक्षित और स्मार्ट बनाने की बात कही जाती है।
खेलते-खेलते उजड़ गई दुनिया: कैसे हुआ हादसा?
मंगलवार की दोपहर हर दिन की तरह सामान्य थी। कॉलोनी के बच्चे गलियों में खेल रहे थे। तभी घर के पास बने एक गहरे और खुले नाले के करीब पहुंचे दो भाइयों का संतुलन बिगड़ गया।
-
मौत का नाला: देखते ही देखते 2 साल का मासूम और उसका 3 साल का बड़ा भाई मो. अरहान गहरे नाले में गिर गए।
-
चीख-पुकार और रेस्क्यू: बच्चों के डूबने की खबर लगते ही मोहल्ले में कोहराम मच गया। स्थानीय लोग बिना अपनी जान की परवाह किए नाले में उतर गए।
-
एक बचा, एक गया: काफी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला गया। 3 वर्षीय अरहान को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन उसका छोटा भाई बेदम हो चुका था। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
गुस्से में मोहल्ला: "साहब, ये नाला है या मौत का जाल?"
हादसे के बाद मौलाना आजाद कॉलोनी के निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को कई बार इन खुले नालों की शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला।
-
नगर निगम की लापरवाही: राजधानी के कई इलाकों में आज भी नालों को ढका नहीं गया है, जो मानसून या बारिश के समय और भी खतरनाक हो जाते हैं।
-
पुलिसिया तफ्तीश: सदर थाना की पुलिस मौके पर पहुँच चुकी है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल वही है कि क्या इस मासूम की मौत का जिम्मेदार कोई अधिकारी भी होगा?
-
शोक का माहौल: परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक ही पल में हंसते-खेलते घर की रौनक मातम में बदल गई।
हादसे की कड़वी हकीकत (Incident Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| स्थान | मौलाना आजाद कॉलोनी, रोड नंबर 7, रांची |
| पीड़ित | दो सगे भाई (2 साल के बच्चे की मौत) |
| जीवित बचा बच्चा | मो. अरहान (3 वर्ष) |
| कारण | असुरक्षित और खुला नाला |
| वर्तमान स्थिति | पुलिस जांच जारी, मोहल्ले में भारी तनाव |
इतिहास का पन्ना: रांची के नालों का खौफनाक रिकॉर्ड और अनदेखी का सफर
रांची के शहरी विकास का इतिहास जितना गौरवशाली रहा है, इसके नालों का इतिहास उतना ही खौफनाक है। साल 1979 में जब रांची नगर निगम की स्थापना हुई थी, तब शहर की आबादी कम थी और ड्रेनेज सिस्टम खुले होने के बावजूद बड़े खतरे नहीं थे। लेकिन 2000 में झारखंड राज्य बनने के बाद जिस तेजी से आबादी बढ़ी, ड्रेनेज सिस्टम उस रफ़्तार से अपग्रेड नहीं हो सका। इतिहास गवाह है कि पिछले एक दशक में रांची के हिंदपीढ़ी, सदर और लोअर बाजार इलाकों में खुले नालों के कारण दर्जनों बच्चों ने अपनी जान गंवाई है। 2018 और 2022 में भी इसी तरह के हादसों के बाद प्रशासन ने 'नालों को ढंकने का अभियान' शुरू किया था, लेकिन 2026 की यह घटना बताती है कि वह अभियान केवल फाइलों तक ही सीमित रहा। आज भी रांची का ड्रेनेज सिस्टम 'प्लानिंग' के बजाय 'हादसों' के इंतजार में चलता नजर आता है।
प्रशासन से तीखे सवाल: अब कब जागेंगे जिम्मेदार?
इस दर्दनाक हादसे ने कुछ गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जिनका जवाब रांची की जनता मांग रही है:
-
क्या नगर निगम को इन घनी आबादी वाले इलाकों के खुले नालों की जानकारी नहीं थी?
-
एक मासूम की मौत के बाद क्या संबंधित वार्ड पार्षद और अधिकारियों पर जवाबदेही तय होगी?
-
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कोई ठोस 'सेफ्टी ऑडिट' किया जाएगा?
सिस्टम की भेंट चढ़ा एक और बचपन
मौलाना आजाद कॉलोनी का यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। 2 साल का बच्चा तो चला गया, लेकिन उसका भाई अरहान अब उम्र भर उस खौफनाक मंजर को याद रखेगा। अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो शहर के ये खुले नाले न जाने और कितने घरों के चिराग बुझाएंगे।
What's Your Reaction?


