Palamu Dowry: पलामू में दहेज लोभी पति ने तोड़ी मर्यादा, बाइक और एक लाख के लिए सुषमा को किया मजबूर, जहर खाकर दी जान
पलामू के छतरपुर में दहेज की वेदी पर एक और बेटी की बलि चढ़ गई है। बाइक और नकदी की मांग के कारण जहर खाने वाली सुषमा की मौत और आरोपी पति की गिरफ्तारी की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी समाज में फैले इस खौफनाक अपराध और एक हंसते-खेलते परिवार के उजड़ने की हकीकत जानने से चूक जाएंगे।
पलामू, 20 जनवरी 2026 – झारखंड के पलामू जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ दहेज के दानवों ने एक और विवाहिता की जिंदगी छीन ली। छतरपुर थाना क्षेत्र के सूशीगंज में एक लाख रुपये और बाइक की लालच ने एक सुखी वैवाहिक जीवन को श्मशान में तब्दील कर दिया। दहेज के लिए लगातार मिल रही प्रताड़ना से तंग आकर सुषमा कुमारी नामक महिला ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पति को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
दहेज की अंतहीन मांग: बाइक और कैश का दबाव
लातेहार जिले के भरवाडीह थाना क्षेत्र स्थित मंगरा गांव के निवासी प्रेम परहिया ने अपनी बेटी सुषमा की शादी साल 2020 में छतरपुर के धर्मेंद्र परहिया से बड़े अरमानों के साथ की थी।
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हैसियत से ज्यादा दान: पिता ने शादी के समय अपनी सामर्थ्य के अनुसार कोई कमी नहीं छोड़ी थी, लेकिन पति धर्मेंद्र की नजरें मायके की जमीन और संपत्ति पर टिकी थीं।
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मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न: शादी के कुछ समय बाद ही धर्मेंद्र ने एक लाख रुपये नकद और एक नई बाइक की मांग शुरू कर दी। सुषमा को बार-बार मायके जाकर पैसे लाने के लिए मजबूर किया जाता और मना करने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी।
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आखरी गुहार: सुषमा ने कई बार फोन पर अपने पिता को ससुराल के खौफनाक हालात की जानकारी दी थी, लेकिन किसे पता था कि यह अंत इतना दर्दनाक होगा।
अस्पताल में तोड़ा दम, आरोपी पति पहुँचा जेल
प्रताड़ना जब बर्दाश्त से बाहर हो गई, तो सुषमा ने घर में रखा जहर खा लिया।
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इलाज के दौरान मौत: गंभीर हालत में उसे मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (MMCH) में भर्ती कराया गया, जहाँ जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए उसने दम तोड़ दिया।
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पुलिस की कार्रवाई: मृतका के पिता के आवेदन पर छतरपुर थाने में दहेज हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने बिना देर किए आरोपी पति धर्मेंद्र परहिया को धर दबोचा और उसे जेल भेज दिया गया है।
पलामू दहेज कांड: मुख्य विवरण (Crime Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| पीड़ित | सुषमा कुमारी (मायका: मंगरा, लातेहार) |
| मुख्य आरोपी | पति धर्मेंद्र परहिया (गिरफ्तार) |
| विवाद की जड़ | ₹1 लाख नकद और एक बाइक की मांग |
| शादी का साल | 2020 (5 साल पुराना रिश्ता) |
| थाना क्षेत्र | छतरपुर, पलामू |
इतिहास का पन्ना: पलामू में 'परहिया' जनजाति और सामाजिक कुरीतियाँ
पलामू का सामाजिक ढांचा ऐतिहासिक रूप से अत्यंत समृद्ध रहा है, जहाँ परहिया जनजाति को प्रकृति का संरक्षक माना जाता रहा है। 19वीं शताब्दी के गजेटियर के अनुसार, परहिया जनजाति में महिलाओं का स्थान बहुत ऊंचा होता था और दहेज जैसी प्रथाएं यहाँ न के बराबर थीं। लेकिन 20वीं सदी के अंत और 21वीं सदी की शुरुआत में आधुनिकता और दिखावे की होड़ ने इन जनजातीय समुदायों में भी 'दहेज' जैसी कुरीति को जहर की तरह घोल दिया। इतिहास गवाह है कि पलामू और लातेहार के सीमावर्ती इलाकों में शिक्षा के अभाव का फायदा उठाकर सामाजिक कुरीतियाँ गहरी होती गईं। सुषमा की मौत केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन जनजातीय मूल्यों की भी हार है जहाँ कभी महिलाओं का सम्मान सर्वोपरि था। 2026 में ऐसी घटना होना यह साबित करता है कि कानून से ज्यादा अब सामाजिक चेतना की जरूरत है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: "सब कुछ तो दिया था"
सुषमा के पिता प्रेम परहिया का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जमा-पूंजी बेटी की शादी में लगा दी थी। "हमने सोचा था कि बेटी सुखी रहेगी, लेकिन हमें क्या पता था कि हमने उसे एक कसाई के हाथों में सौंप दिया है।"
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पुलिस का रुख: छतरपुर पुलिस अब इस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है कि क्या इस प्रताड़ना में घर के अन्य सदस्य भी शामिल थे।
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सामाजिक रोष: इस घटना के बाद छतरपुर और सूशीगंज इलाके के लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय समाजसेवियों ने आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग की है।
कब खत्म होगा दहेज का दानव?
सुषमा की मौत ने एक बार फिर समाज के माथे पर कलंक लगा दिया है। जब तक बाइक और चंद रुपयों के लिए बेटियों को मरना पड़ेगा, तब तक हमारा समाज खुद को 'शिक्षित' कहने का हकदार नहीं है। आरोपी धर्मेंद्र तो जेल चला गया, लेकिन सुषमा की कमी उसके बूढ़े मां-बाप को ताउम्र खलेगी।
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