Potka Action: पोटका के तुड़ी मौजा में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा जमींदोज, अंचलाधिकारी के सख्त तेवर से ठेकेदारों में मचा हड़कंप
पोटका अंचलाधिकारी निकिता बाला के निर्देश पर तुड़ी मौजा में रंजीत मिश्रा और जमशेदपुर रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण पर प्रशासन का बुलडोजर चला है। जेपीएलई के तहत कार्रवाई और सरकारी जमीन खाली कराने की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
पोटका/जमशेदपुर, 7 अप्रैल 2026 – पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका थाना क्षेत्र अंतर्गत तुड़ी मौजा में मंगलवार को प्रशासन का रौद्र रूप देखने को मिला। अंचलाधिकारी (CO) निकिता बाला के कड़े रुख के बाद सरकारी जमीन को माफियाओं और रसूखदार ठेकेदारों के चंगुल से छुड़ाने के लिए बुलडोजर गरजा। प्रशासन की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने उन लोगों को कड़ा संदेश दिया है जो सरकारी संपत्ति को निजी जागीर समझकर अवैध निर्माण कर रहे थे। भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और उन ठेकेदारों के पसीने छुड़ा दिए हैं जो समय सीमा बीतने के बाद भी कब्जा जमाए बैठे थे।
तुड़ी मौजा में 'ऑपरेशन क्लीन': रसूखदारों के अवैध निर्माण ध्वस्त
मंगलवार दोपहर जब प्रशासन की टीम बुलडोजर और पुलिस बल के साथ तुड़ी मौजा पहुँची, तो वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
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अवैध कार्य पर ब्रेक: सूचना मिली थी कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर ठेकेदार रंजीत मिश्रा, जमशेदपुर रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड एवं मनोज कुमार सिंह द्वारा अवैध निर्माण कर व्यवसायिक कार्य किया जा रहा था।
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नोटिस की अनदेखी: अंचलाधिकारी निकिता बाला ने पहले ही जेपीएलई (JPLE) के तहत केस दायर कर सभी को अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया था। लेकिन रसूख के नशे में चूर कब्जाधारियों ने इस नोटिस को हल्के में लिया और समय सीमा समाप्त होने के बाद भी जमीन खाली नहीं की।
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दंडाधिकारी की तैनाती: जिला प्रशासन के निर्देश पर सीआई हेमंत कुमार और राजस्व कर्मचारी शांति राम षाड़ंगी को दंडाधिकारी के रूप में तैनात किया गया। सुरक्षा बलों ने घेराबंदी की और देखते ही देखते अवैध ढांचों को मिट्टी में मिला दिया गया।
निकिता बाला का अल्टीमेटम: अब कहीं नहीं बचेगा अतिक्रमण
इस बड़ी कार्रवाई के बाद पोटका की अंचलाधिकारी निकिता बाला ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के दिन अब लद चुके हैं।
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जेपीएलई एक्ट का शिकंजा: प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जहां भी अतिक्रमण की सूचना मिलेगी, वहां झारखंड लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम (JPLE) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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नियमों का पालन: निकिता बाला ने बताया कि सभी अतिक्रमणकारियों को अपना पक्ष रखने और अवैध निर्माण खुद हटाने का मौका दिया गया था। कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब और नरमी नहीं बरती जाएगी।
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अगला टारगेट: पोटका के अन्य मौजों में भी सरकारी जमीनों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। रंजीत मिश्रा और मनोज कुमार सिंह जैसे बड़े नामों पर हुई इस कार्रवाई ने छोटे अतिक्रमणकारियों में भी खौफ पैदा कर दिया है।
खनिज संपदा और जमीन विवाद का केंद्र
पोटका प्रखंड हमेशा से अपनी खनिज संपदा और औद्योगिक गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है, जिससे यहाँ जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं।
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अवैध डंपिंग और कंस्ट्रक्शन: यहाँ अक्सर देखा गया है कि निजी कंपनियां और ठेकेदार सरकारी खदानों या रास्तों के पास की जमीनों पर अवैध रूप से अपने प्लांट या स्टॉकयार्ड बना लेते हैं। तुड़ी मौजा की घटना इसी प्रवृत्ति का एक उदाहरण है।
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प्रशासनिक सख्ती की कमी: पिछले कुछ वर्षों में पोटका में अतिक्रमण की शिकायतें बढ़ी थीं, लेकिन वर्तमान अंचलाधिकारी की सक्रियता ने भू-माफियाओं के सिंडिकेट को हिला कर रख दिया है।
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जनता का समर्थन: स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि सरकारी जमीन खाली होने से आने वाले समय में यहाँ स्कूल, अस्पताल या सामुदायिक भवनों का निर्माण संभव हो सकेगा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: पुलिस और प्रशासन का तालमेल
कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पोटका थाना पुलिस ने मोर्चा संभाल रखा था।
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विरोध की कोशिश नाकाम: शुरुआत में कुछ समर्थकों ने कार्रवाई में बाधा डालने का प्रयास किया, लेकिन भारी संख्या में तैनात सुरक्षा बलों के आगे उनकी एक न चली।
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पूरी तरह सफाई: प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि रंजीत मिश्रा और जमशेदपुर रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए अतिक्रमण का एक-एक हिस्सा हटा दिया जाए।
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रिकॉर्ड में दर्ज: राजस्व विभाग की टीम ने जमीन की पुनः नापी कर उसे सरकारी रिकॉर्ड में सुरक्षित कर लिया है और वहां चेतावनी बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पोटका के तुड़ी मौजा में चला यह बुलडोजर केवल ईंट-पत्थर गिराने के लिए नहीं, बल्कि कानून के इकबाल को बुलंद करने के लिए चला है। रंजीत मिश्रा और मनोज कुमार सिंह जैसे रसूखदारों पर हुई यह चोट बताती है कि निकिता बाला के नेतृत्व में पोटका प्रशासन अब 'नो टॉलरेंस' की नीति पर चल रहा है। सरकारी जमीन को अपनी निजी संपत्ति समझना अब महंगा साबित होगा। प्रशासन की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि समय सीमा समाप्त होने के बाद सिर्फ और सिर्फ बुलडोजर ही बात करेगा।
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