Potka Tragedy : आधी रात को गिरी कच्चे मकान की दीवार, दंपति गंभीर घायल
जमशेदपुर के पोटका थाना क्षेत्र में भारी बारिश से कच्चा मकान गिर गया। हादसे में दंपति गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि दो बच्चे बाल-बाल बचे। प्रशासन ने मौके पर राहत सामग्री और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की।
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में मानसून की बारीश ने एक और हादसे को जन्म दिया। पोटका थाना क्षेत्र के धीरोल पंचायत अंतर्गत बांगो गांव में बीती रात अचानक हुए मूसलधार बारिश के कारण एक कच्चा मकान धराशायी हो गया। इस हादसे में घर के अंदर सो रहे चार लोग मलबे में दब गए। ग्रामीणों की तत्परता से सभी को बाहर निकाला गया, लेकिन दंपति गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तत्काल एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर में भर्ती कराया गया।
आधी रात का भयावह मंजर
मिली जानकारी के अनुसार, बांगो गांव निवासी मिश्री गोप अपने घर में पत्नी भवानी गोप और दो पुत्र मानव गोप एवं राजीव गोप के साथ सो रहे थे। देर रात तेज बारिश के चलते अचानक मकान का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया। मिश्री गोप और उनकी पत्नी भवानी मलबे में दब गए। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर दौड़े और मशक्कत के बाद परिवार को बाहर निकाला।
दो की हालत गंभीर
इस हादसे में मिश्री गोप और उनकी पत्नी भवानी को गंभीर चोटें आई हैं। दोनों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है और उनका इलाज एमजीएम अस्पताल में जारी है। वहीं दोनों बेटों को हल्की चोटें आईं और उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
प्रशासनिक टीम की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही अंचलाधिकारी निकिता बाला ने तुरंत राजस्व कर्मचारी वीर विजय सिंह को मौके पर भेजा। उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया और पीड़ित परिवार को तत्काल तिरपाल उपलब्ध कराया। साथ ही मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है ताकि परिवार को राहत मिल सके।
गांव में दहशत और चिंता
गांव में इस हादसे के बाद दहशत और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से कई कच्चे मकान खतरे में हैं और कभी भी इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द जोखिम वाले घरों का सर्वे कर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य : झारखंड में मानसून का संकट
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में मानसून के दौरान इस तरह की घटनाएं नई नहीं हैं। हर साल बारिश के मौसम में कच्चे मकानों के गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। 2017 और 2020 में भी इसी इलाके में ऐसे हादसे हुए थे जिनमें कई लोग मारे गए और घायल हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी और ईंट से बने मकान तेज बारिश में अधिक सुरक्षित नहीं रहते। यही कारण है कि प्रशासन समय-समय पर पक्के मकानों के निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे योजनाओं को बढ़ावा देता रहा है।
राहत और पुनर्वास की चुनौती
पीड़ित परिवार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है पुनर्वास की। हादसे में न केवल उनका घर उजड़ गया बल्कि जीवन यापन भी कठिन हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि मुआवजे के साथ-साथ पीड़ित परिवार को स्थायी आवास मुहैया कराया जाए।
पोटका का यह हादसा झारखंड में ग्रामीण इलाकों की नाजुक स्थिति की ओर इशारा करता है। जहां एक ओर मानसून राहत का अहसास कराता है, वहीं दूसरी ओर ऐसी त्रासदियों को जन्म देता है। सवाल उठता है कि आखिर कब तक गरीब परिवार असुरक्षित कच्चे मकानों में जिंदगी बिताने को मजबूर रहेंगे। प्रशासन के लिए यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की योजनाओं की मजबूती का एक बड़ा सबक है।
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