Palamu Digital: पलामू में 'ऑनलाइन' हो गया अफीम का धंधा! तस्करों ने बदला रास्ता, बैंक खातों से खुलासा, कहीं आपका नाम तो नहीं जुड़ा?
क्या आप जानते हैं कि पलामू में अफीम तस्करों ने करोड़ों के कारोबार के लिए नकद लेनदेन क्यों छोड़ दिया? उत्तर प्रदेश के बरेली से जुड़े इस डिजिटल नेटवर्क का खुलासा कैसे हुआ? तस्कर छोटी-छोटी रकम बैंक खातों में क्यों ट्रांसफर कर रहे थे? क्या पुलिस ने पिपराटांड़ और चतरा के कई ऐसे खातों की पहचान कर ली है जिनका इस्तेमाल तस्करी के लिए हो रहा था? पूरी जानकारी पढ़ें और जानें डिजिटल तस्करी का नया खतरा!
पलामू, 29 अक्टूबर 2025 – झारखंड में अफीम तस्करी के धंधे ने अब एक चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। लाखों रुपये के नकद लेनदेन से खतरा बढ़ने के बाद, तस्करों ने अब पूरी तरह से डिजिटल दुनिया को अपना लिया है। पलामू पुलिस की हालिया कार्रवाई में इस अत्याधुनिक तस्करी तंत्र का खुलासा हुआ है, जो न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अपराध भी समय के साथ कितना 'अपडेट' हो चुका है।
यूपी से कनेक्शन: लेस्लीगंज में डिजिटल नेटवर्क का भंडाफोड़
पलामू के लेस्लीगंज थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक अंतरराज्यीय अफीम नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार उत्तर प्रदेश के बरेली तक फैले हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे डिजिटल सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया है।
लेस्लीगंज थाना प्रभारी, उत्तम कुमार राय ने पुष्टि की है कि यह नेटवर्क पूरी तरह से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए चलाया जा रहा था। यह खुलासा झारखंड में दशकों से चली आ रही अफीम तस्करी के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।
तस्करों ने क्यों छोड़ा 'कैश'? लूट और हत्या का डर
पुलिस पूछताछ में तस्करों ने जो कारण बताए, वे चौंकाने वाले हैं।
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नकद का खतरा: तस्कर अब लाखों रुपये नकद लेकर झारखंड में घूमना नहीं चाहते। पिछले तीन महीनों में पलामू पुलिस ने अफीम के साथ-साथ लाखों रुपये की नकदी भी जब्त की थी।
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लूट और हत्या का डर: नकद सौदे के दौरान कई बार लूट और हत्या की खौफनाक घटनाएं हो चुकी हैं। इन जोखिमों से बचने के लिए, तस्करों ने अपने धंधे को डिजिटल कर दिया।
अब वे अफीम की खरीद-बिक्री के लिए बैंक खातों में छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन कर रहे हैं। छोटे ट्रांजैक्शन इसलिए किए जाते थे, ताकि बैंकों या सुरक्षा एजेंसियों को कोई शक न हो।
पलामू-चतरा के कई बैंक खाते जांच के घेरे में
इस डिजिटल खुलासे के बाद पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस को पलामू के पिपराटांड़ और चतरा क्षेत्र के कई लोगों के बैंक खातों की जानकारी मिली है।
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ट्रांसफर का जाल: ये खाते तस्करों के डिजिटल धन को ट्रांसफर करने के लिए 'मनी म्यूल' के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे। यानी, वे किसान या स्थानीय लोग, जिनके खातों में तस्करी का पैसा छोटे हिस्सों में भेजा जाता था।
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गहन जांच शुरू: उत्तम कुमार राय ने स्पष्ट किया कि पुलिस अब इन सभी खातों की गहराई से जांच कर रही है। कई व्यक्तियों की पहचान कर ली गई है, जिन पर जल्द ही कार्रवाई होगी।
यह गिरफ्तारी सिर्फ चार तस्करों की नहीं है, बल्कि उस पूरे डिजिटल नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में पहला कदम है, जिसने झारखंड की जमीन से होने वाली अफीम तस्करी को एक नया और खतरनाक रूप दे दिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस डिजिटल गोरखधंधे में और कितने स्थानीय लोग शामिल हैं।
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