Palamu Rescue : पलामू में 'बच्चा चोर' के शक में महिला को घेरा, ऐन वक्त पर पुलिस ने किया रेस्क्यू, अफवाहों से दहला नेउरा गांव
पलामू के चैनपुर में बच्चा चोरी की अफवाह के बाद ग्रामीणों ने एक विक्षिप्त महिला को घेर लिया। पुलिस की तत्परता से टला बड़ा हादसा। अफवाहों के सच और रेस्क्यू की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
पलामू/चैनपुर, 11 अप्रैल 2026 – झारखंड के पलामू जिले में शनिवार को 'बच्चा चोरी' की एक खतरनाक अफवाह ने पुलिस और प्रशासन के होश उड़ा दिए। जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के नेउरा गांव में एक मानसिक रूप से कमजोर (विक्षिप्त) महिला को ग्रामीणों ने बच्चा चोर समझकर बंधक बना लिया। गनीमत यह रही कि हिंसा भड़कने से पहले ही चैनपुर थाना पुलिस मौके पर पहुँच गई और महिला को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। पलामू में पिछले कुछ दिनों से बच्चा चोरी की झूठी अफवाहें जंगल की आग की तरह फैल रही हैं, जिसे लेकर पुलिस ने पहले ही हाई अलर्ट जारी किया हुआ है।
नेउरा में तनाव: भीड़ के बीच फंसी बेकसूर महिला
शनिवार दोपहर नेउरा गांव में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक अज्ञात महिला को संदिग्ध अवस्था में घूमते देखा गया।
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घेराबंदी और शक: ग्रामीणों को लगा कि महिला बच्चों को निशाना बनाने आई है। देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई और महिला को गांव के बीचों-बीच बिठा लिया गया।
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पुलिस की एंट्री: चैनपुर थाना प्रभारी श्रीराम शर्मा को जैसे ही इसकी भनक लगी, वे दल-बल के साथ गांव पहुंचे। पुलिस ने सूझबूझ से काम लिया और ग्रामीणों को समझाकर महिला को अपने संरक्षण में लिया।
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यूपी कनेक्शन: शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि महिला उत्तर प्रदेश की रहने वाली है, लेकिन मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह अपना सटीक पता नहीं बता पा रही है।
अफवाहों का बाजार: पलामू में क्यों है दहशत?
चैनपुर थाना प्रभारी ने बताया कि महिला पूरी तरह सुरक्षित है और ग्रामीणों ने उसके साथ मारपीट नहीं की थी, वे केवल पूछताछ कर रहे थे।
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हाई अलर्ट मोड: पलामू जिले के कई इलाकों में हाल के दिनों में बच्चा चोरी की अफवाह के कारण निर्दोष लोगों के साथ मारपीट की खबरें आई हैं।
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पुलिस का जाल: अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने हर गांव में अपने नंबर साझा किए हैं। नेउरा की घटना में इसी नेटवर्क ने काम किया और समय रहते सूचना पुलिस तक पहुँच गई।
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परिजनों की तलाश: पुलिस अब उत्तर प्रदेश पुलिस से संपर्क कर महिला के परिवार का पता लगाने की कोशिश कर रही है ताकि उसे सुरक्षित घर पहुँचाया जा सके।
अफवाहें, भीड़ और 'मॉब लिंचिंग' की चुनौती
पलामू और गढ़वा का इलाका ऐतिहासिक रूप से अपनी भौगोलिक जटिलता और जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है, लेकिन यहाँ अफवाहों का इतिहास भी काफी पुराना और डरावना रहा है।
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90 के दशक की 'चोटिया' अफवाह: पलामू के इतिहास में कई बार ऐसी अफवाहें उड़ी हैं जिनसे जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है। चाहे वह 'चोटिया' काटने वाली अफवाह हो या 'मुंहनोचवा', पलामू के ग्रामीण अंचल में इन खबरों ने हमेशा तनाव पैदा किया है।
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बच्चा चोरी का ट्रिगर: 2017 और 2019 के दौरान झारखंड के कोल्हान और पलामू प्रमंडल में बच्चा चोरी की अफवाह के कारण मॉब लिंचिंग की कुछ दर्दनाक घटनाएं हो चुकी हैं। इसी इतिहास को देखते हुए पुलिस अब किसी भी छोटी सूचना पर 'वॉर फुटिंग' पर काम करती है।
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सोशल मीडिया का रोल: आधुनिक समय में व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी और सोशल मीडिया ने इन अफवाहों को और भी घातक बना दिया है। पलामू पुलिस अब साइबर सेल के जरिए इन भ्रामक वीडियो और मैसेज फैलाने वालों पर भी नजर रख रही है।
अगली कार्रवाई: पुलिस की अपील और सख्त चेतावनी
चैनपुर पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले में बच्चा चोरी की कोई भी घटना अब तक प्रमाणित नहीं हुई है।
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अफवाह फैलाने वालों पर FIR: पुलिस उन लोगों की पहचान कर रही है जिन्होंने नेउरा गांव में सबसे पहले यह अफवाह फैलाई थी। भ्रामक खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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सत्यापन अभियान: विक्षिप्त महिला को फिलहाल महिला थाने या सेफ शेल्टर होम में रखने की व्यवस्था की जा रही है। पुलिस उसकी तस्वीर यूपी के विभिन्न थानों में भेज रही है।
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ग्रामीणों को निर्देश: पुलिस ने अपील की है कि यदि कोई संदिग्ध दिखे, तो कानून हाथ में लेने के बजाय सीधे 100 नंबर या थाना प्रभारी को सूचित करें।
पलामू के नेउरा में शनिवार को जो हुआ, वह एक बड़ी अनहोनी की आहट थी। एक विक्षिप्त महिला, जो शायद रास्ता भटक गई थी, वह भीड़ की हिंसा का शिकार हो सकती थी। चैनपुर पुलिस की मुस्तैदी ने न केवल एक जान बचाई, बल्कि पलामू को एक और शर्मनाक घटना से बचा लिया। लेकिन सवाल अब भी वही है—आखिर कब तक मासूम और विक्षिप्त लोग इन अफवाहों की भेंट चढ़ते रहेंगे? पलामू पुलिस का हाई अलर्ट और ग्रामीणों की जागरूकता ही इस 'अफवाह के वायरस' का एकमात्र इलाज है।
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