West Singhbhum : खौफनाक, किरीबुरू में लोहा लदे डंपर ने रेल ड्राइवर को रौंदा, हाथी चौक पर बिछी लाश, बदला इलाका
किरीबुरू के हाथी चौक पर तेज रफ्तार डंपर ने डांगुआपोशी के रेल चालक एसके रावत को मोटरसाइकिल समेत कुचल दिया है। नोआमुंडी अस्पताल में मचे हाहाकार और बिना लाइसेंस के 'मौत' बनकर दौड़ रहे भारी वाहनों की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इस माइनिंग बेल्ट के खूनी रास्तों का कड़वा सच कभी नहीं जान पाएंगे।
चक्रधरपुर/किरीबुरू, 7 जनवरी 2026 – पश्चिम सिंहभूम के किरीबुरू माइनिंग एरिया में रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार की सुबह करीब 8 बजे हाथी चौक के पास एक अनियंत्रित डंपर ने मोटरसाइकिल सवार रेल चालक एसके रावत को बेरहमी से कुचल दिया। डांगुआपोशी सेक्शन में पदस्थापित रावत अपनी बाइक से राउरकेला जा रहे थे, तभी सामने से आ रहे भारी वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। यह हादसा इतना भीषण था कि मोटरसाइकिल के परखच्चे उड़ गए और रेल चालक खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़े। इस घटना ने एक बार फिर सारंडा के जंगलों में चल रहे खनिजों के 'खूनी परिवहन' को बेनकाब कर दिया है।
हाथी चौक पर 'यमराज' बना डंपर: सुबह-सुबह मची चीख-पुकार
किरीबुरू की घुमावदार सड़कों पर सुबह का वक्त अक्सर शांत होता है, लेकिन आज की सुबह चीखों से भर गई।
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सीधी भिड़ंत: चश्मदीदों के मुताबिक, डंपर की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। टक्कर के बाद डंपर रेल चालक को घसीटते हुए कुछ दूर तक ले गया।
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अस्पताल में जंग: घायल रावत को स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में नोआमुंडी टाटा स्टील अस्पताल पहुँचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत नाजुक देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।
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पुलिस की दबिश: किरीबुरू थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए डंपर को जब्त कर लिया है और चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
मेंस कांग्रेस का आक्रोश: "सड़कों पर बिना लाइसेंस दौड़ रही है मौत"
हादसे की खबर मिलते ही रेलकर्मी और शुभचिंतक बड़ी संख्या में अस्पताल पहुँचे। मेंस कांग्रेस डांगुआपोशी शाखा सचिव सुभाष मजूमदार ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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अवैध ड्राइवर: आरोप है कि इस क्षेत्र में चल रहे ज्यादातर डंपर और भारी वाहनों के चालकों के पास वैध लाइसेंस तक नहीं है।
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नियमों की धज्जियां: माइनिंग बेल्ट में चलने वाले इन वाहनों में न तो कोई सहायक (खलासी) होता है और न ही ये गति सीमा का पालन करते हैं।
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लगातार हादसे: डांगुआपोशी और किरीबुरू सेक्शन में पिछले कुछ महीनों में कई रेलकर्मी इन भारी वाहनों का शिकार हो चुके हैं।
किरीबुरू डंपर हादसा: मुख्य जानकारी (Incident Summary)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| पीड़ित व्यक्ति | एसके रावत (रेल चालक, डांगुआपोशी) |
| घटनास्थल | हाथी चौक, किरीबुरू (प. सिंहभूम) |
| समय | सुबह तकरीबन 08:00 बजे |
| वाहन | माइनिंग डंपर (जब्त) |
| मुख्य मांग | परिवहन विभाग की कड़ी कार्रवाई |
इतिहास और रसूख: किरीबुरू की सड़कों पर 'लाल धूल' और 'सफ़ेद कफ़न'
किरीबुरू और नोआमुंडी का इतिहास लौह अयस्क (Iron Ore) के उत्पादन से जुड़ा है, लेकिन इसका एक स्याह पहलू भी है। 1980 के दशक से ही यह क्षेत्र एशिया के सबसे बड़े माइनिंग हब के रूप में उभरा, लेकिन सड़कों का ढांचा भारी ट्रकों के लोड को सहने लायक नहीं रहा। ऐतिहासिक रूप से देखें तो सारंडा वन क्षेत्र की सड़कों पर होने वाले हादसों में 70% कारण माइनिंग वाहनों की अनियंत्रित गति रही है। स्थानीय लोगों के लिए ये सड़कें अब 'डेथ जोन' बन चुकी हैं। एसके रावत के साथ हुई यह घटना उस सिस्टम की पोल खोलती है जहाँ खनिजों की ढुलाई इंसानी जान से ज्यादा कीमती समझी जाती है।
परिवहन विभाग की सुस्ती: दहशत में स्थानीय लोग
पश्चिम सिंहभूम में भारी वाहनों के कारण होने वाली मौतों ने लोगों में गहरा भय पैदा कर दिया है।
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चेकिंग का अभाव: किरीबुरू-बड़बिल रोड पर नाममात्र की पुलिस चेकिंग होती है, जिसका फायदा उठाकर ओवरलोडेड गाड़ियां सरपट दौड़ती हैं।
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रेल कर्मियों में रोष: रेल चालक दल ने चेतावनी दी है कि अगर परिवहन विभाग ने बिना लाइसेंस वाले ड्राइवरों और ओवरस्पीडिंग पर नकेल नहीं कसी, तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे।
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जांच के बिंदु: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या डंपर चालक नशे में था या गाड़ी की ब्रेक फेल हुई थी।
कब थमेगा सड़कों पर ये खूनी खेल?
एसके रावत की जिंदगी और मौत के बीच की यह जंग किरीबुरू के हर नागरिक की कहानी है। जब तक प्रशासन माइनिंग कंपनियों और उनके बेकाबू ड्राइवरों पर शिकंजा नहीं कसता, तब तक हाथी चौक जैसे व्यस्त चौराहे सुरक्षित नहीं हो पाएंगे।
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