Jharkhand Weather: बंगाल की खाड़ी से नया दबाव, झारखंड में फिर बरसेंगे बादल
झारखंड में मौसम का मिजाज बदल रहा है। रांची समेत कई जिलों में अगले पांच दिन तक बारिश की संभावना। बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव क्षेत्र बन रहा है, जिससे झारखंड में फिर भारी बारिश हो सकती है।
झारखंड का मौसम इन दिनों लगातार करवट ले रहा है। रांची समेत कई जिलों में पिछले कुछ दिनों से बारिश का सिलसिला जारी है और मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि यह दौर अभी थमने वाला नहीं। वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव क्षेत्र बन रहा है, जिसका सीधा असर झारखंड पर पड़ेगा।
बंगाल की खाड़ी में नया दबाव
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, वर्तमान में बना निम्न दबाव अब कमजोर हो चुका है, लेकिन म्यांमार और पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के तटीय इलाकों में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हो गया है। इसके चलते 25 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर एरिया विकसित होगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका असर 30 सितंबर तक झारखंड पर रहेगा और कई जिलों में बारिश की संभावना बनी रहेगी।
रांची में 50% ज्यादा बारिश
ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 24 सितंबर तक रांची में 1509.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य औसत 1003.2 मिमी से लगभग 50% अधिक है। मंगलवार को मांडर में सबसे ज्यादा 140.2 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, रामगढ़, खूंटी, गुमला और हजारीबाग जैसे जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हुई।
बारिश की अधिकता से जहां किसानों को धान की खेती में फायदा हो रहा है, वहीं निचले इलाकों में जलजमाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव
बादल छाए रहने के कारण राज्य में तापमान में खास बदलाव नहीं दिख रहा। रांची का अधिकतम तापमान बुधवार को 29.7 डिग्री और न्यूनतम 22.4 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, गोड्डा सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले पांच दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी।
बिजली गिरने का अलर्ट
मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि अगले पांच दिनों तक झारखंड के कई जिलों में बादल छाए रहेंगे और बारिश की संभावना बनी रहेगी। साथ ही विभाग ने गरज के साथ वज्रपात का अलर्ट भी जारी किया है। ग्रामीण इलाकों में लोगों को खुले में काम करने और बिजली गिरने के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।
झारखंड का मानसून इतिहास
झारखंड में मानसून का आगमन आमतौर पर जून के पहले सप्ताह में होता है और सितंबर के अंत तक सक्रिय रहता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बंगाल की खाड़ी में बार-बार बनने वाले निम्न दबाव क्षेत्रों ने राज्य में बारिश के पैटर्न को बदल दिया है।
2019 में जहां सूखे जैसी स्थिति बन गई थी, वहीं 2021 और 2022 में सितंबर तक अच्छी बारिश हुई। 2023 में भी देर से आए मानसून ने अक्टूबर तक कई जिलों में बरसात का सिलसिला जारी रखा।
यह बार-बार बनने वाले दबाव क्षेत्र ही हैं जो झारखंड के मानसून को अप्रत्याशित बना रहे हैं।
जनता की चिंता और उम्मीद
बारिश से जहां किसान खुश हैं, वहीं शहरी इलाकों में जलजमाव और ट्रैफिक जाम ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे बड़े शहरों में बारिश के बाद सड़कें तालाब जैसी हो जाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “बारिश फसल के लिए वरदान है, लेकिन सरकार को ड्रेनेज सिस्टम मजबूत करना होगा, वरना हर साल यही परेशानी झेलनी पड़ेगी।”
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 25 सितंबर को बनने वाला नया दबाव झारखंड के लिए कितनी बारिश लेकर आएगा? क्या यह किसानों के लिए खुशखबरी साबित होगा या शहरी इलाकों के लिए आफत बनेगा — इसका जवाब आने वाले दिनों में साफ होगा।
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