Ration Cancelled : झारखंड में 4.24 लाख राशन कार्ड अचानक रद्द, पूर्वी सिंहभूम में सबसे बड़ा एक्शन, 'साइलेंट' कार्डों पर गिरी गाज
झारखंड सरकार ने राशन वितरण व्यवस्था में बड़ी कार्रवाई करते हुए 4.24 लाख से अधिक राशन कार्ड रद्द कर दिए हैं। पूर्वी सिंहभूम में सबसे ज्यादा 1.47 लाख कार्डों पर गाज गिरी है। फर्जी और निष्क्रिय लाभुकों को हटाने के इस बड़े सरकारी फैसले की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/जमशेदपुर, 25 मार्च 2026 – झारखंड की राशन वितरण प्रणाली (PDS) में एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला बदलाव आया है। राज्य सरकार ने खाद्य आपूर्ति विभाग की गहन जांच के बाद एक झटके में 4,24,404 राशन कार्ड धारियों के नाम लाभुकों की सूची से हटा दिए हैं। यह कार्रवाई उन लोगों पर की गई है जो लंबे समय से सरकारी अनाज का उठाव नहीं कर रहे थे। इस बड़े फैसले ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है, खासकर उन जिलों में जहाँ फर्जी या निष्क्रिय कार्डों की संख्या सबसे अधिक पाई गई। सरकार का तर्क है कि इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' से सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और अनाज सीधे वास्तविक जरूरतमंदों की थाली तक पहुँचेगा।
'साइलेंट कार्ड' का मायाजाल: 8 लाख से ज्यादा लोग रडार पर
झारखंड में सरकारी आंकड़ों ने विभाग की नींद उड़ा दी थी, जब यह पता चला कि लाखों लोग कार्ड होने के बावजूद राशन नहीं ले रहे हैं।
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75% निष्क्रिय लाभुक: जांच में सामने आया कि कुल कार्ड धारियों में से करीब 75 प्रतिशत ऐसे हैं जो महीनों से डीलर के पास नहीं फटके।
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रोजगार का पलायन: अधिकारियों का मानना है कि इसका एक बड़ा कारण रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाना है। जो लोग झारखंड छोड़ चुके हैं, उनके नाम पर अब भी अनाज का आवंटन हो रहा था, जो सीधे तौर पर बर्बादी थी।
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साइलेंट कार्ड की फौज: राज्य में कुल 'साइलेंट राशन कार्ड' धारियों की संख्या 8,02,685 तक पहुँच गई है। फिलहाल इनमें से 4.24 लाख का पत्ता काट दिया गया है, जिनकी जानकारी विभाग के पास स्पष्ट नहीं थी।
जमशेदपुर में सबसे बड़ा प्रहार: 1.47 लाख कार्ड एक साथ रद्द
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) इस लिस्ट में सबसे ऊपर है।
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पूर्वी सिंहभूम का रिकॉर्ड: अकेले इस जिले में 1.47 लाख से अधिक कार्ड रद्द किए गए हैं। यह राज्य के किसी भी जिले में की गई अब तक की सबसे बड़ी कटौती है।
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इन जिलों में भी एक्शन: धनबाद, पश्चिम सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जैसे औद्योगिक जिलों में भी हजारों की संख्या में नाम काटे गए हैं।
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अगला नंबर किसका: अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यह प्रक्रिया थमी नहीं है। अभी करीब 1,95,142 राशन कार्डों की जांच बाकी है। यानी आने वाले दिनों में रद्द होने वाले कार्डों की संख्या 6 लाख के पार जा सकती है।
झारखंड में राशन का इतिहास और 'फर्जीवाड़े' की जड़ें
झारखंड जैसे राज्य में जहाँ कुपोषण और गरीबी एक बड़ी चुनौती है, वहां राशन कार्ड का महत्व किसी 'जीवनदान' से कम नहीं है।
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डिजिटलीकरण का दौर: 2016 के बाद से झारखंड में राशन कार्डों को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, ताकि बिचौलियों को खत्म किया जा सके।
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फर्जी कार्डों का दौर: इससे पहले, 'भूतिया लाभुकों' (Ghost Beneficiaries) के नाम पर करोड़ों का अनाज कालाबाजारी में बिक जाता था। वर्तमान सरकार की यह सख्ती उसी काली कमाई के रास्ते को बंद करने की एक कड़ी है।
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पारदर्शिता की मांग: खाद्य आपूर्ति विभाग का मानना है कि जब तक डेटाबेस पूरी तरह शुद्ध (Clean) नहीं होगा, तब तक उन गरीबों को वेटिंग लिस्ट से बाहर नहीं निकाला जा सकेगा जो वास्तव में अनाज के हकदार हैं।
अगला कदम: दोबारा कैसे जुड़ सकता है नाम?
जिन लोगों के नाम गलती से या जानकारी के अभाव में हट गए हैं, उनके लिए सरकार ने एक खिड़की खुली रखी है।
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सत्यापन की प्रक्रिया: अगर आपका कार्ड रद्द हुआ है और आप वास्तव में पात्र हैं, तो आप आवश्यक दस्तावेजों (आधार, आय प्रमाण पत्र आदि) के साथ अपने ब्लॉक या आपूर्ति कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं।
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नया आवंटन: रद्द किए गए 4.24 लाख स्लॉट्स अब उन लोगों को दिए जाएंगे जो लंबे समय से नए राशन कार्ड के लिए आवेदन देकर लाइन में खड़े हैं।
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डीलर पर नजर: विभाग अब उन डीलरों की भी कुंडली खंगाल रहा है जो इन 'साइलेंट कार्डों' का अनाज खुद डकार रहे थे।
झारखंड सरकार का यह कदम राशन वितरण प्रणाली को 'क्लीन' करने की दिशा में एक साहसिक प्रयास है। 4.24 लाख कार्डों का रद्द होना कोई छोटी घटना नहीं है, यह दर्शाता है कि सिस्टम में अब भी कितनी विसंगतियां मौजूद हैं। पूर्वी सिंहभूम में 1.47 लाख कार्डों का कटना बताता है कि शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में सत्यापन की कितनी सख्त जरूरत थी। क्या इस कार्रवाई के बाद वास्तव में जरूरतमंदों को समय पर अनाज मिलेगा? फिलहाल, आपूर्ति विभाग की जांच जारी है और बचे हुए 1.95 लाख कार्ड धारियों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
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