Jamtara Cyber : जामताड़ा के बाबुडीह में किश्त के नाम पर 'सफाई', QR कोड भेजकर उड़ाए लाखों, 2 सगे भाई और नाबालिग पकड़ाया

जामताड़ा के करमाटांड़ में किश्त जमा करने के नाम पर QR कोड भेजकर बैंक खाते खाली करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। राजेंद्र और गणेश रवानी की गिरफ्तारी, मोबाइल-सिम की बरामदगी और जामताड़ा के इस नए 'फिशिंग' जाल की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

Apr 6, 2026 - 18:17
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Jamtara Cyber : जामताड़ा के बाबुडीह में किश्त के नाम पर 'सफाई', QR कोड भेजकर उड़ाए लाखों, 2 सगे भाई और नाबालिग पकड़ाया
Jamtara Cyber : जामताड़ा के बाबुडीह में किश्त के नाम पर 'सफाई', QR कोड भेजकर उड़ाए लाखों, 2 सगे भाई और नाबालिग पकड़ाया

जामताड़ा, 6 अप्रैल 2026 – साइबर अपराध की दुनिया का 'मक्का' कहे जाने वाले जामताड़ा में पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। करमाटांड़ थाना क्षेत्र के बाबुडीह गांव में छापेमारी कर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो पूरे भारत में 'वाहन किश्त' (Vehicle EMI) के नाम पर डिजिटल डकैती कर रहा था। साइबर थाना प्रभारी के नेतृत्व में हुई इस सर्जिकल स्ट्राइक में दो सगे भाइयों समेत एक नाबालिग को दबोचा गया है। जामताड़ा पुलिस की इस मुस्तैदी ने एक ऐसे नेटवर्क को ध्वस्त किया है, जो तकनीक का सहारा लेकर आम लोगों की गाढ़ी कमाई पर पल भर में हाथ साफ कर देता था।

बाबुडीह में पुलिस की दबिश: तड़के हुई छापेमारी में दबोचे गए ठग

गुप्त सूचना के आधार पर जामताड़ा साइबर थाना पुलिस ने बाबुडीह गांव में जाल बिछाया था।

  • घेराबंदी और गिरफ्तारी: पुलिस टीम ने गांव के एक संदिग्ध ठिकाने को घेरकर दबिश दी। मौके से राजेंद्र रवानी (28 वर्ष) और गणेश रवानी (25 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। इनके साथ एक 17 वर्षीय किशोर को भी निरुद्ध (Detain) किया गया है।

  • बरामदगी की सूची: तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से 7 मोबाइल फोन और 7 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस की तकनीकी टीम इन सिम कार्ड्स के जरिए हुए पिछले ट्रांजैक्शन और कॉल लॉग्स को खंगाल रही है।

  • कांड संख्या 20/26: जामताड़ा साइबर थाना में इस गिरोह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

ठगी का नया 'मोडस ऑपेरंडी': QR कोड का वो खूनी जाल

पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासा किया है, वह चौंकाने वाला है। वे लोगों को लूटने के लिए किसी ओटीपी (OTP) का इंतजार नहीं करते थे।

  1. किश्त का झांसा: आरोपी खुद को बड़ी ऑटो-फाइनेंस कंपनियों का कर्मचारी बताकर वाहन मालिकों को कॉल करते थे। वे दावा करते थे कि उनकी गाड़ी की किश्त (EMI) बकाया है।

  2. QR कोड का खेल: विश्वास जीतने के बाद, वे भुगतान के लिए व्हाट्सएप पर एक QR कोड भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस कोड को स्कैन कर अपना पिन डालता, उसके ई-वॉलेट (E-wallet) से पैसे कटने के बजाय आरोपियों के खाते में 'उड़' जाते थे।

  3. ई-वॉलेट से हेराफेरी: यह गिरोह डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल कर पैसों को तुरंत अलग-अलग लेयर्स (Multiple accounts) में ट्रांसफर कर देता था, जिससे उन्हें ट्रैक करना नामुमकिन हो जाता था।

'फिशिंग' से 'QR कोड' तक का सफर

जामताड़ा जिला पिछले दो दशकों से साइबर ठगी के लिए बदनाम रहा है। यहाँ के युवाओं ने वक्त के साथ अपनी ठगी के तरीके बदले हैं।

  • करमाटांड़ की बदनामी: जामताड़ा का करमाटांड़ इलाका वही जगह है जहाँ से देश की पहली बड़ी 'फिशिंग' कॉल शुरू हुई थी। यहाँ के झोपड़ियों में रहने वाले लड़कों ने आधुनिक तकनीक को अपनी अवैध कमाई का जरिया बना लिया है।

  • बदलता नेटवर्क: पहले जहाँ केवल बैंक मैनेजर बनकर कॉल किए जाते थे, अब यह गिरोह किश्त, बिजली बिल और सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को निशाना बना रहा है।

  • अखिल भारतीय जाल: बाबुडीह से पकड़े गए इस गिरोह का नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि इनके शिकार दिल्ली, मुंबई और दक्षिण भारत के राज्यों में भी मिले हैं।

अगली कार्रवाई: रडार पर 'मास्टरमाइंड' और सिम सप्लायर

जामताड़ा पुलिस अब इस गिरोह के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच कर रही है।

  • सिम कार्ड का राज: बरामद किए गए 7 सिम कार्ड फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए थे। पुलिस अब उन रिटेलर्स की पहचान कर रही है जिन्होंने बिना वेरिफिकेशन के ये सिम जारी किए।

  • वित्तीय जांच: आरोपियों के बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि अब तक इन्होंने कितने करोड़ की ठगी की है।

  • फरार साथियों की तलाश: सूत्रों की मानें तो इस गिरोह के कुछ और सदस्य अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जो तकनीकी मदद और डेटा उपलब्ध कराते थे।

जामताड़ा के बाबुडीह में हुई यह कार्रवाई साबित करती है कि साइबर अपराधी अब और भी शातिर हो गए हैं। QR कोड भेजकर किश्त जमा कराने के नाम पर की जा रही यह ठगी सीधे तौर पर आम आदमी की अज्ञानता का फायदा उठाती है। पुलिस ने राजेंद्र और गणेश को जेल भेज दिया है और नाबालिग को सुधार गृह भेजा गया है, लेकिन जामताड़ा में ऐसे हजारों 'रवानी' और 'मसात' अब भी सक्रिय हैं। साइबर थाना प्रभारी की यह कार्रवाई एक चेतावनी है, लेकिन असली सुरक्षा आपकी जागरूकता में है—किसी भी अनजान QR कोड को स्कैन करना आपके खाते को शून्य बना सकता है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।