Sidhgora Arrest: बड़ा एक्शन, थाने से फरार पॉक्सो आरोपी दबोचा, जमशेदपुर कोर्ट में सरेंडर से पहले ही पुलिस ने घेरा

जमशेदपुर की सिदगोड़ा पुलिस ने थाने से फरार चल रहे पॉक्सो और अवैध हथियार के आरोपी मोहित सिंह को कोर्ट परिसर से नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया है। सादे लिबास में तैनात पुलिसकर्मियों की बिछाई गई इस खौफनाक जाल और सरेंडर की नाकाम साजिश की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी पुलिस को चकमा देने वाले इस शातिर के पकड़े जाने की असली कहानी कभी नहीं जान पाएंगे।

Jan 6, 2026 - 21:12
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Sidhgora Arrest: बड़ा एक्शन, थाने से फरार पॉक्सो आरोपी दबोचा, जमशेदपुर कोर्ट में सरेंडर से पहले ही पुलिस ने घेरा
Sidhgora Arrest: बड़ा एक्शन, थाने से फरार पॉक्सो आरोपी दबोचा, जमशेदपुर कोर्ट में सरेंडर से पहले ही पुलिस ने घेरा

जमशेदपुर, 6 जनवरी 2026 – लौहनगरी की सिदगोड़ा थाना पुलिस ने मंगलवार को एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए कानून को चुनौती देने वाले शातिर आरोपी मोहित कुमार सिंह को जमशेदपुर कोर्ट परिसर से गिरफ्तार कर लिया है। नाबालिग से छेड़छाड़ (POCSO Act) और अवैध हथियार रखने के आरोपी मोहित ने मई के महीने में सिदगोड़ा थाने से फरार होकर पुलिस की साख पर बट्टा लगा दिया था। पिछले कई महीनों से वह पुलिस के साथ 'चूहे-बिल्ली' का खेल खेल रहा था, लेकिन मंगलवार को जैसे ही वह सरेंडर करने की नीयत से कोर्ट पहुँचा, सादे लिबास में तैयार पुलिस की 'स्पेशल टीम' ने उसे फिल्मी अंदाज में दबोच लिया।

थाने से फरारी और 8 महीने का वनवास: मोहित की पूरी कहानी

मोहित कुमार सिंह की गिरफ्तारी पुलिस के लिए साख की लड़ाई बन गई थी।

  • मई की वो घटना: पिछले साल मई में पुलिस ने मोहित को पॉक्सो एक्ट के गंभीर मामले में पकड़ा था। लेकिन थाने में मौजूद सुरक्षा में सेंध लगाकर वह चकमा देकर भाग निकला।

  • लगातार दबिश: फरारी के बाद सिदगोड़ा पुलिस ने उसके परिजनों और संदिग्ध ठिकानों पर इतनी छापेमारी की कि मोहित बुरी तरह दबाव में आ गया।

  • सरेंडर का दांव: बचने का कोई रास्ता न देख मोहित ने कोर्ट में आत्मसमर्पण (Surrender) करने की योजना बनाई, लेकिन उसकी यह गुप्त सूचना पुलिस के मुखबिरों तक पहुँच गई।

सादे लिबास में बिछाया गया जाल: कोर्ट परिसर बना 'ट्रैप जोन'

मंगलवार सुबह जैसे ही पुलिस को खबर मिली कि मोहित सरेंडर करने आ रहा है, सिदगोड़ा थाना प्रभारी ने एक सटीक रणनीति तैयार की।

  1. सादे लिबास में पुलिस: कोर्ट के मुख्य द्वारों और गलियारों में पुलिसकर्मियों को आम जनता और वकीलों के भेष में तैनात किया गया ताकि मोहित को शक न हो।

  2. नाकेबंदी: पूरे परिसर को चुपचाप घेर लिया गया। जैसे ही मोहित ने कोर्ट के अंदर कदम रखा, पहले से घात लगाकर बैठी टीम ने उसे चारों ओर से घेर लिया।

  3. दबोचा गया आरोपी: मोहित को संभलने का मौका तक नहीं मिला और पुलिस उसे जीप में डालकर सीधे थाने ले आई।

सिदगोड़ा पुलिस कार्रवाई: केस प्रोफाइल (Criminal Profile)

विवरण जानकारी (Details)
आरोपी का नाम मोहित कुमार सिंह
मुख्य आरोप पॉक्सो एक्ट (POCSO) और आर्म्स एक्ट
गिरफ्तारी स्थल जमशेदपुर कोर्ट परिसर
पुरानी घटना मई 2025 में थाने से हुआ था फरार
वर्तमान स्थिति पुलिस हिरासत में पूछताछ जारी

इतिहास और रंजिश: जमशेदपुर कोर्ट और फरारी का रिकॉर्ड

जमशेदपुर कोर्ट परिसर ऐतिहासिक रूप से केवल न्याय का मंदिर ही नहीं, बल्कि अपराधियों के पकड़ने और भागने का केंद्र भी रहा है। 2000 के दशक में कुख्यात अपराधियों ने कोर्ट परिसर में ही अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर सनसनी फैलाई थी। वहीं, थाने से किसी अपराधी का भागना पुलिस मैनुअल की सबसे बड़ी चूक मानी जाती है। मोहित सिंह की फरारी ने सिदगोड़ा थाने की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए थे, जिसे अब 8 महीने बाद इस गिरफ्तारी से सुधारा गया है। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि जमशेदपुर में पॉक्सो एक्ट के आरोपियों द्वारा कोर्ट में सरेंडर करने की कोशिश आम है, ताकि वे 'पुलिस रिमांड' के दौरान होने वाली कड़ाई से बच सकें।

पूछताछ में खुलेंगे राज: अवैध हथियार का क्या था लिंक?

मोहित पर केवल नाबालिग से छेड़खानी का ही आरोप नहीं है, बल्कि वह अवैध हथियारों की तस्करी या उसे रखने के मामले में भी वांछित था।

  • गहन पूछताछ: पुलिस अब मोहित से यह उगलवाने की कोशिश कर रही है कि फरारी के दौरान उसे किसने शरण दी और वह हथियार कहाँ से लाया था।

  • न्यायिक हिरासत: पूछताछ पूरी होने के बाद पुलिस उसे दोबारा उसी कोर्ट में पेश करेगी जहाँ वह खुद जाना चाहता था, लेकिन इस बार वह पुलिस की मजबूत पकड़ में होगा।

  • पुलिस की सतर्कता: सिदगोड़ा थाना पुलिस ने इस कार्रवाई को अपनी सटीक रणनीति का परिणाम बताया है।

कानून के लंबे हाथ

मोहित कुमार सिंह की गिरफ्तारी उन सभी अपराधियों के लिए एक सबक है जो यह सोचते हैं कि वे पुलिस की आंखों में धूल झोंककर बच निकलेंगे। 8 महीने तक फरार रहने के बावजूद, अंततः उसे पुलिस की गिरफ्त में आना ही पड़ा। सिदगोड़ा पुलिस की इस मुस्तैदी ने शहरवासियों में कानून के प्रति विश्वास को दोबारा जगाया है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।