Jamshedpur Fury: पारडीह में मजदूरों का बड़ा हंगामा! ट्रैफिक पुलिस से मारपीट के बाद सड़क जाम, चांडिल से आए श्रमिकों ने हाजिरी न मिलने तक न हटने की दी चेतावनी
जमशेदपुर के पारडीह चेक पोस्ट पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा मजदूरों से भरे पिकअप वाहन को रोकने और मारपीट के बाद बड़ा हंगामा हुआ। चांडिल से बावनगोड़ा जा रहे श्रमिकों ने सड़क जाम कर दिया और पुलिस पर ओवरलोड के नाम पर रोज परेशान करने और जुर्माना वसूलने का आरोप लगाया।
जमशेदपुर के पारडीह चेक पोस्ट पर बुधवार को रोजगार की तलाश में शहर आ रहे सैकड़ों मजदूरों का गुस्सा ट्रैफिक पुलिस पर भड़क उठा। कागज़ात की मांग को लेकर शुरू हुआ मामला इतना बढ़ा कि मजदूरों ने सड़क पर ही धरना दे दिया, जिससे मानगो-पारडीह रोड पर वाहनों का लंबा जाम लग गया और आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
यह घटना एक बार फिर ट्रैफिक पुलिस और आम जनता, खासकर रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे श्रमिकों के बीच के तनाव को उजागर करती है। चांडिल से जमशेदपुर के बावनगोड़ा जा रहे मजदूरों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस ने पिकअप वाहन को रोककर कागजात मांगे, और नहीं दिखाने पर चालक के साथ मारपीट भी की, जिससे मजदूर आक्रोशित हो उठे।
ओवरलोडिंग: वसूली का बहाना?
मजदूरों का मुख्य आरोप ट्रैफिक पुलिस के आए दिन के उत्पीड़न को लेकर है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब भी वे रोजगार के लिए शहर की ओर आते हैं, तो ट्रैफिक पुलिस उन्हें परेशान करती है:
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ओवरलोड का हवाला: मजदूरों का आरोप है कि ओवरलोड का हवाला देकर वाहन चालक को पकड़ लिया जाता है और उनसे भारी जुर्माना वसूला जाता है।
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रोजी-रोटी पर संकट: जुर्माना और लम्बी कागज़ी कार्रवाई के कारण मजदूरों का हर दिन का काम छूट जाता है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ जाता है।
रोजगार पर निकलने वाले श्रमिकों के लिए हर दिन कीमती होता है। पुलिस द्वारा वाहन को रोकने का मतलब है पूरे दिन की मजदूरी का नुकसान, जिसने मजदूरों के गुस्से को चरम पर पहुंचा दिया।
काम नहीं तो जाम नहीं खुलेगा: मजदूरों की चेतावनी
मजदूरों ने सड़क पर बैठकर साफ कर दिया कि वे तब तक जाम नहीं हटाएंगे, जब तक उनकी हाजिरी नहीं मिलेगी।
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हाजिरी की मांग: श्रमिकों की मांग है कि पुलिस की वजह से उनका जो काम छूटा है, उसका हर्जाना यानी हाजिरी उन्हें मिलनी चाहिए। यह मांग उनकी तात्कालिक जरूरत और विरोध की गंभीरता को दर्शाती है।
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पुलिस की चुप्पी: उधर, जब पुलिस से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो अधिकारी कैमरे के सामने आने से बचते रहे। पुलिस का यह रवैया मजदूरों के आरोपों को बल देता है।
समाचार लिखे जाने तक मानगो-पारडीह रोड पर मजदूरों का सड़क पर प्रदर्शन जारी था और वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई थीं। यह संघर्ष गरीब श्रमिकों के अधिकारों और पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई के बीच की खाई को उजागर करता है।
आपकी राय में, ट्रैफिक पुलिस को मजदूरों के रोजगार को बाधित किए बिना ओवरलोडिंग की समस्या से निपटने के लिए कौन सा व्यावहारिक समाधान अपनाना चाहिए?
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