Jamshedpur Sand Mining: जमशेदपुर की नदियों का सीना चीर रहे तस्कर, एमजीएम के कुसतुलिया में दिन-रात अवैध खनन
जमशेदपुर की स्वर्णरेखा और खरकाई नदी में बालू माफियाओं का खुला तांडव जारी है। एमजीएम थाना क्षेत्र के कुसतुलिया में बेखौफ अवैध उत्खनन और प्रशासनिक लापरवाही की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/एमजीएम, 10 अप्रैल 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर की लाइफलाइन कही जाने वाली स्वर्णरेखा और खरकाई नदी इन दिनों माफियाओं के रहमोकरम पर है। शहर के एमजीएम थाना क्षेत्र अंतर्गत कुसतुलिया नदी घाट पर बालू का अवैध काला खेल दिन के उजाले में बेखौफ खेला जा रहा है। ट्रैक्टरों और ट्रकों का लंबा काफिला नदी का सीना चीरकर बालू निकाल रहा है, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि जिला प्रशासन और खनन विभाग ने इस पर पूरी तरह से मौन धारण कर रखा है। स्थानीय ग्रामीणों के आक्रोश और राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
कुसतुलिया का काला खेल: दिनदहाड़े लूट रहे कुदरत का खजाना
एमजीएम थाना क्षेत्र का कुसतुलिया इलाका अवैध बालू उत्खनन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।
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खुलेआम तस्करी: ग्रामीणों का आरोप है कि माफियाओं को अब रात के अंधेरे का भी डर नहीं रहा। दिन के उजाले में दर्जनों ट्रैक्टर और भारी वाहन नदी के बीचों-बीच खड़े होकर बालू की लोडिंग करते हैं।
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नदी का स्वरूप बिगड़ा: लगातार हो रहे उत्खनन से नदी की गहराई असंतुलित हो गई है। कई जगहों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं, जो भविष्य में बड़े हादसों और पर्यावरण असंतुलन का कारण बन सकते हैं।
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प्रशासनिक सुस्ती: हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस और माइनिंग विभाग की नाक के नीचे यह धंधा फल-फूल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
राजनीति और रंजिश: आरोप-प्रत्यारोप के बीच पिसती नदियाँ
जमशेदपुर में बालू खनन केवल एक अपराध नहीं, बल्कि राजनीतिक फुटबॉल बन गया है।
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पार्टियों की जंग: सत्तारूढ़ और विपक्षी दल इस मुद्दे पर एक-दूसरे को घेर रहे हैं। जहाँ एक पक्ष संरक्षण देने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे रोकने में विफलता का ठीकरा फोड़ रहा है।
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ग्रामीणों की मांग: कुसतुलिया के स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही अवैध खनन नहीं रुका, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
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पर्यावरण का संकट: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बालू का यही अनियंत्रित दोहन जारी रहा, तो मानसून के समय जलस्तर में भारी उतार-चढ़ाव और भू-क्षरण जैसी समस्याएं विकराल रूप ले लेंगी।
स्वर्णरेखा नदी का नाम ही उसकी विशेषता बताता है—वह नदी जिसकी रेत में कभी सोने के कण पाए जाते थे।
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स्वर्णरेखा और खरकाई का संगम: जमशेदपुर के अस्तित्व का आधार ये दो नदियाँ रही हैं। टाटा स्टील की स्थापना से लेकर आज के आधुनिक शहर तक, इन नदियों ने जीवनदायिनी की भूमिका निभाई है।
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निर्माण और मांग: जैसे-जैसे जमशेदपुर का विस्तार हुआ, कंक्रीट के जंगलों के लिए बालू की मांग बढ़ी। इसी मांग ने 90 के दशक के बाद यहाँ 'सैंड माफिया' को जन्म दिया।
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इतिहास की गूँज: पूर्व में भी जमशेदपुर के दोमुहानी और आदित्यपुर घाटों पर बालू के वर्चस्व को लेकर खूनी संघर्ष हो चुके हैं। प्रशासन ने कई बार 'सैंड ब्लॉक' की नीलामी की, लेकिन वैध से ज्यादा अवैध धंधे ने अपनी जड़ें गहरी कर ली हैं।
अगली कार्रवाई: ग्रामीणों का अल्टीमेटम और पुलिस की योजना
ग्रामीणों के बढ़ते दबाव के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में कुछ हलचल शुरू हुई है।
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छापेमारी की सुगबुगाहट: सूत्रों के अनुसार, एमजीएम थाना और जिला खनन विभाग एक संयुक्त 'सरप्राइज रेड' (Surprise Raid) की योजना बना रहे हैं। हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि सूचना लीक होने के कारण माफिया पहले ही भाग जाते हैं।
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चेक पोस्ट की मांग: स्थानीय लोगों ने कुसतुलिया की ओर जाने वाले मुख्य रास्तों पर पुलिस चेक पोस्ट लगाने की मांग की है ताकि अवैध वाहनों की आवाजाही रोकी जा सके।
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दोषियों पर सख्त धाराएं: प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और संचालकों पर गैर-जमानती धाराओं के तहत केस दर्ज होगा।
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