Gumla Elephant Attack : गुमला में जंगली हाथी ने टेक्नीशियन को पटककर मार डाला, झाड़ी से अचानक निकला और बाइक सवार को लिया चपेट में
गुमला के घाघरा में जंगली हाथी के हमले में 28 वर्षीय युवक अनूप पांडे की दर्दनाक मौत हो गई है। पावर ग्रिड टेक्नीशियन पर हुए इस घातक हमले और वन विभाग की कार्रवाई की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
गुमला/घाघरा, 10 अप्रैल 2026 – झारखंड के गुमला जिले में इंसानों और हाथियों के बीच चल रहे संघर्ष ने एक और घर का चिराग बुझा दिया है। घाघरा थाना क्षेत्र के बुरहु पतरा में शुक्रवार को एक जंगली हाथी ने 28 वर्षीय युवक अनूप कुमार पांडे को कुचलकर मार डाला। पावर ग्रिड में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत अनूप अपनी ड्यूटी पर जा रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस घटना के बाद पूरे घाघरा इलाके में दहशत फैल गई है और ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।
भीड़ देखना पड़ा भारी: झाड़ी से यमराज बनकर निकला हाथी
मृतक अनूप कुमार पांडे बुरहु का ही निवासी था और अपनी मेहनत से परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। शुक्रवार को वह अपनी बाइक से सांवरिया बिजली का काम करने जा रहा था।
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अचानक हमला: रास्ते में पतरा के पास लोगों की भीड़ देखकर अनूप कौतूहलवश रुक गया। उसे अंदाजा भी नहीं था कि पास की झाड़ियों में मौत छिपी है।
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अफरा-तफरी: जैसे ही जंगली हाथी झाड़ियों से बाहर निकला, वहां भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाकर भागे, लेकिन अनूप हाथी की सीधी चपेट में आ गया।
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दर्दनाक अंत: विशालकाय हाथी ने अनूप को संभलने का मौका तक नहीं दिया और उसे कुचल दिया, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
वन विभाग की कार्रवाई: मुआवजे का मरहम और रेकी
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुँची।
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तत्काल सहायता: फॉरेस्टर बिरसा लोहरा और उनकी टीम ने शोक संतप्त परिवार को तत्काल 25 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की। विभाग ने भरोसा दिलाया कि कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही कुल 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
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पोस्टमार्टम: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गुमला सदर अस्पताल भेज दिया है।
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सतर्कता की अपील: वन प्रमंडल पदाधिकारी बेलाल अहमद ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के झुंड के पास न जाएं और न ही उन्हें छेड़ने की कोशिश करें।
हाथियों के कॉरिडोर में बसती मौत की आहट
गुमला और लोहरदगा का यह क्षेत्र दशकों से हाथियों के प्रवास मार्ग (Elephant Corridor) का हिस्सा रहा है, लेकिन अब यह इलाका 'खूनी संघर्ष' का गवाह बन रहा है।
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प्राचीन मार्ग: ऐतिहासिक रूप से गुमला के जंगल छत्तीसगढ़ और सिमडेगा के हाथियों के आने-जाने का मुख्य रास्ता रहे हैं। पुराने समय में हाथियों और इंसानों के बीच एक सामंजस्य था, लेकिन जंगलों की कटाई ने हाथियों को बस्तियों की ओर धकेल दिया है।
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बढ़ता संघर्ष: पिछले 5 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि गुमला में हाथियों के हमले में जान गंवाने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। 2020 के बाद से घाघरा और बिशुनपुर जैसे प्रखंडों में हाथियों ने न केवल जान ली है, बल्कि करोड़ों की फसल भी बर्बाद की है।
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पतरा क्षेत्र का खौफ: बुरहु पतरा का इलाका अपनी घनी झाड़ियों के लिए जाना जाता है, जो हाथियों को छिपने के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान करती हैं। यही कारण है कि यहाँ अक्सर लोग अचानक हमले का शिकार हो जाते हैं।
अगली कार्रवाई: हाथियों को खदेड़ने के लिए गज-दल की तैनाती
हाथी अभी भी आसपास के जंगलों में ही डटा हुआ है, जिससे ग्रामीणों की नींद उड़ी हुई है।
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रेकी जारी: वन विभाग की विशेष टीम टॉर्च और पटाखों के साथ हाथी की गतिविधियों पर नजर रख रही है। विभाग का प्रयास है कि हाथी को रिहायशी इलाकों से दूर घने जंगलों की ओर खदेड़ा जाए।
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पावर ग्रिड में शोक: अनूप की मौत से उसके सहकर्मियों में भी गम का माहौल है। एक होनहार टेक्नीशियन का इस तरह जाना बिजली विभाग के लिए भी बड़ी क्षति है।
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ग्रामीणों की मांग: स्थानीय लोगों ने वन विभाग से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में 'ट्रेंच' (गहरी खाई) बनाई जाए या सोलर फेंसिंग की व्यवस्था की जाए ताकि हाथी गांवों में प्रवेश न कर सकें।
अनूप पांडे की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि वन्यजीव प्रबंधन की विफलताओं का परिणाम है। 28 साल की उम्र में एक करियर और परिवार को पीछे छोड़कर चले जाना अत्यंत पीड़ादायक है। गुमला के जंगलों में गजराज का यह कहर तब तक नहीं थमेगा जब तक हाथियों के लिए सुरक्षित गलियारे सुनिश्चित नहीं किए जाते। मुआवजा किसी की जान की भरपाई नहीं कर सकता। फिलहाल, वन विभाग हाथी को ट्रैक कर रहा है और ग्रामीण अपने घरों में दुबक कर रहने को मजबूर हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
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