Jamshedpur Negligence : एमजीएम अस्पताल की घोर संवेदनहीनता से टूटा गम्हरिया के परिवार का सब्र, गोद में मासूम का शव ढोने को मजबूर हुए लाचार परिजन!

जमशेदपुर के एकमात्र सरकारी एमजीएम अस्पताल में गम्हरिया के 13 वर्षीय मासूम की मौत के बाद स्ट्रेचर व शव वाहन न मिलने और परिजनों द्वारा गोद में लाश ले जाने की पूरी लाइव ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।

Jun 1, 2026 - 15:05
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Jamshedpur Negligence :  एमजीएम अस्पताल की घोर संवेदनहीनता से टूटा गम्हरिया के परिवार का सब्र, गोद में मासूम का शव ढोने को मजबूर हुए लाचार परिजन!
Jamshedpur Negligence : एमजीएम अस्पताल की घोर संवेदनहीनता से टूटा गम्हरिया के परिवार का सब्र, गोद में मासूम का शव ढोने को मजबूर हुए लाचार परिजन!

जमशेदपुर/साकची, 1 जून 2026 – लौह नगरी जमशेदपुर के एकमात्र और सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल (MGM Hospital Jamshedpur) से सरकारी स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को विधिक रूप से शर्मसार करने वाली, मानवता को झकझोरने वाली और एक बेहद दर्दनाक डार्क खबर सामने आई है। यहाँ सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर अंतर्गत गम्हरिया निवासी एक गरीब परिवार के 13 वर्षीय मासूम बच्चे की इलाज के दौरान विधिक मौत हो गई। मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही और डार्क संवेदनहीनता का वह डार्क चेहरा ऑन-फील्ड देखने को मिला, जिसने पूरे कोल्हान प्रमंडल की विधिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृत मासूम के शोकाकुल परिजनों को वार्ड से बाहर तक शव ले जाने के लिए एक अदद स्ट्रेचर (Stretcher) तक उपलब्ध नहीं कराया गया। कड़कड़ाती बेबसी के बीच पूरा परिवार एक विभाग से दूसरे विभाग विधिक सहायता के लिए भटकता रहा, लेकिन कस्टडी कर्मियों ने उन्हें दुत्कार कर टाल दिया। अंततः मजबूर होकर बिलखते पिता और स्वजनों को अपने कलेजे के टुकड़े की लाश को गोद में उठाकर अस्पताल परिसर से बाहर निकलना पड़ा। इस डार्क और खौफनाक मंजर को देखकर ऑन-फील्ड मौजूद आम जनता का विधिक आक्रोश भड़क उठा है।

लापरवाही की लाइव इनसाइड स्टोरी: गम्हरिया से एमजीएम का सफर, दम तोड़ता मासूम और विधिक संवेदनहीनता का डार्क रूप

एमजीएम अस्पताल इमरजेंसी वार्ड लॉग-बुक, बाल रोग विभाग (Pediatrics Department) और स्थानीय नागरिक सुरक्षा मंच के आंतरिक विधिक सूत्रों से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, यह पूरी घटना अस्पताल के भीतर बुनियादी जवाबदेही की डार्क और खोखली कड़ियों को उजागर करती है।

  • मधुमेह से पीड़ित था बच्चा: गम्हरिया निवासी 13 वर्षीय मासूम बच्चा गंभीर रूप से टाइप-1 मधुमेह (Juvenile Diabetes) से पीड़ित था। शनिवार-रविवार की रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे उम्मीद के साथ सरकारी एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंचे थे।

  • चिकित्सकों और सुविधाओं का विधिक अभाव: परिजनों का सीधा आरोप है कि अस्पताल के इमरजेंसी और स्पेशल वार्ड्स में समय पर पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सक (Specialist Doctors) और आवश्यक लाइफ-सेविंग इंफ्रास्ट्रक्चर विधिक रूप से उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते बच्चे की हालत लगातार डार्क जोन में चली गई और उसने दम तोड़ दिया।

  • शव वाहन देने से भी विधिक इनकार: त्रासदी यहीं खत्म नहीं हुई; बच्चे की मौत के बाद जब बिलखते परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से नियमानुसार विधिक शव वाहन (Hearse Van) की मांग की, तो कस्टडी क्लर्कों ने वाहन देने से साफ मना कर दिया। मजबूरन परिवार को एक निजी वाहन का भारी-भरकम खर्च उठाकर शव को अपने पैतृक निवास ले जाना पड़ा।

सरकारी वार्ड्स में डिजिटल व्हीलचेयर ट्रैकिंग और शव वाहन बेड़े की विधिक नाकेबंदी समय की मांग

गम्हरिया के पीड़ित परिवार ने जिस मुस्तैदी और भारी मन से ऑन-फील्ड अपनी पीड़ा को मीडिया और जिला प्रशासन के समक्ष रखा, वह लाचार नागरिकों के विधिक अधिकारों की रक्षा का एक बहुत बड़ा माइलस्टोन बन गया है। इस डार्क वाकये के बाद स्थानीय सामाजिक संगठनों ने एमजीएम अधीक्षक दफ्तर के बाहर विधिक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक विधिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। लेकिन केवल जांच का दिलासा देना इस गहरे डार्क और संवेदनहीन हेल्थकेयर संकट का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। 2026 के इस आधुनिक और डिजिटल युग में झारखंड स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन को तुरंत संयुक्त संज्ञान लेते हुए पूरे एमजीएम अस्पताल परिसर में 'आरएफआईडी-सक्षम डिजिटल स्ट्रेचर ट्रैकिंग सिस्टम' (RFID Stretcher Tracking) का विधिक इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना होगा। इसके साथ ही, जिला कलेक्ट्रेट के नियंत्रण में '24x7 निशुल्क एम्बुलेंस और शव वाहन गेटवे' विधिक रूप से अनिवार्य करना होगा ताकि किसी भी लाचार मां-बाप को अपने बच्चे का शव गोद में ढोने पर विधिक रूप से विवश न होना पड़े। जब तक इन लापरवाह स्वास्थ्य कर्मियों और लापरवाह प्रभारियों के खिलाफ कठोर विधिक कस्टडी और निलंबन की सजा सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक कोल्हान के इस ऐतिहासिक, प्रतिष्ठित और एकमात्र बड़े सरकारी चिकित्सा गलियारे को संवेदनहीनता के इस डार्क, खौफनाक और कलंकित इतिहास से पूरी तरह मुक्त नहीं कराया जा सकेगा।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।