MGM Death: जमशेदपुर में चूल्हे की चिंगारी से चुन्नी में लगी आग, 9 दिन तक एमजीएम अस्पताल में लड़ी जंग, 20 वर्षीय रौमनी ने तोड़ा दम

जमशेदपुर के एमजीएम थाना क्षेत्र के इदिलबेड़ा में खाना बनाते समय चूल्हे की चिंगारी से 20 वर्षीय रौमनी सिंह की चुन्नी में आग लग गई। 70 प्रतिशत जल चुकी युवती ने 9 दिनों के इलाज के बाद एमजीएम बर्न यूनिट में दम तोड़ दिया। बेसहारा मां और बहनों की इस हृदयविदारक रिपोर्ट को यहाँ देखें।

Mar 24, 2026 - 13:57
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MGM Death: जमशेदपुर में चूल्हे की चिंगारी से चुन्नी में लगी आग, 9 दिन तक एमजीएम अस्पताल में लड़ी जंग, 20 वर्षीय रौमनी ने तोड़ा दम
MGM Death: जमशेदपुर में चूल्हे की चिंगारी से चुन्नी में लगी आग, 9 दिन तक एमजीएम अस्पताल में लड़ी जंग, 20 वर्षीय रौमनी ने तोड़ा दम

जमशेदपुर/एमजीएम, 24 मार्च 2026 – लौहनगरी के एमजीएम थाना क्षेत्र अंतर्गत इदिलबेड़ा गांव में एक चूल्हे की छोटी सी चिंगारी ने हंसते-खेलते परिवार की खुशियां राख कर दीं। घर के आंगन में खाना बना रही 20 वर्षीय युवती रौमनी सिंह की झुलसने के 9 दिन बाद अस्पताल में मौत हो गई। मंगलवार को जब एमजीएम अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस से उसका शव बाहर निकला, तो परिजनों की चीख-पुकार से पूरा परिसर दहल उठा। पिता के साये के बिना चार बेटियों को पाल रही एक बेसहारा मां के लिए यह वज्रपात से कम नहीं है। 14 मार्च की उस मनहूस शाम ने एक होनहार बेटी को छीन लिया, जो अपनी मां और बहनों का सहारा बनने का सपना देख रही थी।

14 मार्च की वो 'खौफनाक' शाम: आंगन में मची चीख-पुकार

हादसे की शुरुआत इदिलबेड़ा गांव के एक साधारण से कच्चे मकान के आंगन में हुई।

  • अचानक लगी आग: रौमनी हमेशा की तरह शाम का खाना बनाने के लिए चूल्हे के पास बैठी थी। घर में उस वक्त केवल उसकी बूढ़ी मां मौजूद थी। तभी चूल्हे से उठी एक चिंगारी उसकी चुन्नी (दुपट्टा) पर जा गिरी।

  • सूझबूझ की कमी और दहशत: सूती चुन्नी होने के कारण आग ने पल भर में विकराल रूप ले लिया। जब तक मां ने शोर मचाया और पड़ोसी मदद के लिए दौड़े, रौमनी आग की लपटों में पूरी तरह घिर चुकी थी।

  • 70 प्रतिशत झुलसी: पड़ोसियों के सहयोग से आग बुझाकर उसे तुरंत एमजीएम अस्पताल के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, वह करीब 70 प्रतिशत तक जल चुकी थी, जिससे उसकी स्थिति शुरू से ही नाजुक बनी हुई थी।

9 दिनों का संघर्ष: बर्न यूनिट में हार गई जिंदगी

एमजीएम अस्पताल के डॉक्टरों ने रौमनी को बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन संक्रमण (Infection) और गहरे जख्मों ने उसे बेदम कर दिया।

  1. पिता का साया पहले ही उठा: रौमनी के पिता की बहुत पहले ही मौत हो चुकी है। घर की पूरी जिम्मेदारी उसकी मां के कंधों पर थी। रौमनी अपनी चार बहनों में तीसरे नंबर पर थी और घर के कामों में हाथ बटाती थी।

  2. सोमवार को तोड़ा दम: 9 दिनों तक असहनीय दर्द सहने के बाद, सोमवार 23 मार्च की शाम रौमनी ने अस्पताल के बेड पर आखिरी सांस ली।

  3. पोस्टमार्टम के बाद विदाई: मंगलवार सुबह पुलिस ने कागजी प्रक्रिया पूरी कर शव का पोस्टमार्टम कराया और उसे परिजनों को सौंप दिया। गांव में शव पहुँचते ही हर आँख नम थी।

चूल्हे की आग और ग्रामीण इलाकों का 'साइलेंट किलर'

जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों जैसे एमजीएम, पटमदा और बोड़ाम में आज भी मिट्टी के चूल्हों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।

  • सुरक्षा मानकों का अभाव: खुले आंगन में या तंग जगहों पर चूल्हा जलाना अक्सर जानलेवा साबित होता है। चुन्नी या ढीले कपड़ों का आग पकड़ना एक आम दुर्घटना बन गई है।

  • बर्न यूनिट की सीमाएं: एमजीएम अस्पताल की बर्न यूनिट पर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों का भारी दबाव रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 50 प्रतिशत से अधिक जलने वाले मरीजों के बचने की संभावना ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण कम हो जाती है।

  • इतिहास की पुनरावृत्ति: इदिलबेड़ा और आसपास के गांवों में पहले भी चूल्हे की आग से महिलाओं के झुलसने की घटनाएं सामने आई हैं, जो घरेलू सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़ी करती हैं।

अगला कदम: सुरक्षा ऑडिट और सरकारी सहायता

इस घटना के बाद अब प्रशासन और स्थानीय सामाजिक संगठनों की भूमिका अहम हो गई है।

  • मुआवजे की मांग: ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक और प्रशासन से मांग की है कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए, क्योंकि घर में कोई कमाने वाला पुरुष सदस्य नहीं है।

  • जागरूकता अभियान: स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीण इलाकों में खाना बनाते समय सुरक्षा सावधानियों (जैसे- कपड़ों का चुनाव और आग बुझाने के तरीके) को लेकर कैंप लगाने की जरूरत है।

  • अंतिम संस्कार: रौमनी का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव इदिलबेड़ा में आज शाम किया जाएगा। पुलिस ने इस संबंध में अस्वाभाविक मौत (UD Case) का मामला दर्ज किया है।

रौमनी सिंह की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गरीब परिवार के संघर्षों का दुखद अंत है। पिता के बिना चार बेटियों को पालना वैसे ही एक चुनौती थी, ऊपर से एक जवान बेटी का इस तरह चले जाना उस मां की कमर तोड़ देगा। चूल्हे की वो चिंगारी केवल एक शरीर को नहीं जलाती, बल्कि एक पूरे भविष्य को स्वाहा कर देती है। क्या प्रशासन इस गरीब परिवार की मदद के लिए हाथ बढ़ाएगा? फिलहाल, पूरा इदिलबेड़ा गांव रौमनी की असमय मौत के शोक में डूबा है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।