Golmuri Bhagwat Katha : गोलमुरी में कन्हैया ने उंगली पर उठाया पहाड़, गोवर्धन लीला देख मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु, आचार्य सुरेश ने खोला माखन चोरी का रहस्य
गोलमुरी के मनिंदर टावर में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गोवर्धन पर्वत की अलौकिक झांकी और कान्हा की बाल लीलाओं ने सबका मन मोह लिया। इंद्र के अहंकार और प्रकृति पूजा के उस महान संदेश की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप शहर का यह सबसे बड़ा आध्यात्मिक उत्सव मिस कर देंगे।
जमशेदपुर/गोलमुरी, 23 फरवरी 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित मनिंदर टावर में भक्ति की ऐसी गंगा बह रही है कि हर कोई उसमें सराबोर होना चाहता है। चम्पा-रतन अग्रवाल (गोयल परिवार) द्वारा आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन सोमवार को पंडाल तब तालियों और जयकारों से गूंज उठा जब नन्हे कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। वृंदावन से पधारे आचार्य पंडित सुरेश चन्द्र शास्त्री जी महाराज ने भगवान की बाल लीलाओं का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि भक्तों को लगा मानो वे साक्षात द्वापर युग के गोकुल धाम में पहुँच गए हों।
माखन चोरी: दिल चुराने की कला है यह!
आचार्य सुरेश शास्त्री ने कथा की शुरुआत भगवान की नटखट बाल लीलाओं से की। उन्होंने माखन चोरी के प्रसंग पर बड़ा ही सुंदर प्रकाश डाला:
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प्रेम का प्रतीक: आचार्य ने बताया कि कृष्ण की माखन चोरी कोई सामान्य घटना नहीं थी। माखन दरअसल भक्त के हृदय में छिपे प्रेम और शुद्ध भक्ति का प्रतीक है, जिसे भगवान स्वयं चुराने आते हैं।
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भक्तों का समर्पण: गोपियों के घरों में जाकर माखन खाना, उनके प्रेम और अटूट समर्पण को स्वीकार करने का भगवान का अपना तरीका था।
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वेणु गीत: जब कन्हैया की मुरली बजी, तो उसकी धुन में समस्त गोपियां और ब्रज के जीव-जंतु मोहित हो गए, जो आत्मा का परमात्मा से मिलन दर्शाता है।
गोवर्धन लीला: प्रकृति और पर्यावरण का संदेश
कथा का मुख्य आकर्षण 'गोवर्धन लीला' रही। आचार्य ने बताया कि जब इंद्र ने अपने अहंकार में आकर ब्रज पर भारी वर्षा की, तब सात वर्षीय बालक कृष्ण ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की।
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इंद्र का मान-मर्दन: इस लीला के जरिए भगवान ने सिद्ध किया कि भक्ति के आगे अहंकार कभी टिक नहीं सकता।
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प्रकृति पूजा: कृष्ण ने ब्रजवासियों को सिखाया कि हमें कर्मकांडों से ऊपर उठकर प्रकृति (पर्वत, जल, वृक्ष) की पूजा करनी चाहिए क्योंकि वही हमारा भरण-पोषण करती है।
भागवत कथा अपडेट: आज का मुख्य आकर्षण (Event Snapshot)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Facts) |
| मुख्य प्रसंग | गोवर्धन पूजा, माखन चोरी, बाल लीला |
| संदेश | प्रकृति का सम्मान और अहंकार का त्याग |
| आयोजक | गोयल परिवार (चम्पा-रतन अग्रवाल) |
| विशेष अतिथि | पार्वती देवी, रतन-चम्पा, गोविंद, माधव अग्रवाल |
| अगला पड़ाव | 24 फरवरी: महारास, कंस वध, रुक्मिणी विवाह |
मंगलवार को होगा 'रुक्मिणी विवाह' का भव्य आयोजन
कथा के छठवें दिन यानी मंगलवार, 24 फरवरी को उत्सव और भी बड़ा होने वाला है। आचार्य ने बताया कि कल श्रद्धालु महारास की दिव्य लीला के साथ-साथ मथुरा गमन, कंस वध और भगवान के विवाह प्रसंग का आनंद लेंगे।
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रुक्मिणी विवाह: पंडाल में भगवान श्री कृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह की जीवंत झांकी सजाई जाएगी, जिसमें श्रद्धालु बाराती बनकर झूमते नजर आएंगे।
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कंस वध: अधर्म के विनाश का वो ऐतिहासिक प्रसंग सुनाया जाएगा जो हर इंसान को बुराई के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देता है।
भक्ति में डूबी लौहनगरी
गोविंदपुर और गोलमुरी के सैकड़ों श्रद्धालु रोजाना इस कथा का लाभ उठा रहे हैं। गोयल परिवार की इस पहल ने न केवल समाज को जोड़ा है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से रूबरू कराने का एक बेहतरीन मंच प्रदान किया है।
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