Jamshedpur Alert: बम की धमकी, जमशेदपुर कोर्ट की सुरक्षा चाक-चौबंद, सिटी एसपी ने खुद संभाली कमान, चप्पे-चप्पे पर पहरा
झारखंड के न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी के बाद जमशेदपुर पुलिस अलर्ट पर है। सिटी एसपी कुमार शिवाशीष ने सिविल कोर्ट के सभी गेटों और सुरक्षा पॉइंट की खुद जांच की। XLRI के बाद अब कोर्ट की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/झारखंड, 11 मार्च 2026 – झारखंड में अदालतों पर मंडरा रहे संभावित खतरे के बाद हड़कंप मचा हुआ है। राज्य के कई जिलों में न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकियां मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां 'हाइपर-अलर्ट' मोड में हैं। इसी कड़ी में, लौहनगरी जमशेदपुर में भी जिला प्रशासन ने सुरक्षा का घेरा इतना सख्त कर दिया है कि परिंदा भी पर न मार सके।
मंगलवार को जमशेदपुर के सिटी एसपी कुमार शिवाशीष के नेतृत्व में पुलिस की एक भारी-भरकम टीम सिविल कोर्ट परिसर पहुँची। यह कोई नियमित दौरा नहीं था, बल्कि संभावित खतरे को देखते हुए की गई एक 'प्रिवेंटिव स्ट्राइक' थी। सिटी एसपी ने खुद कोर्ट के गेट संख्या एक से लेकर तीन तक का निरीक्षण किया। हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखी जा रही है। मौके पर तैनात जवानों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ड्यूटी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संदिग्ध वस्तुओं और व्यक्तियों की जांच के लिए मेटल डिटेक्टर और अन्य उपकरणों का कड़ाई से उपयोग करने को कहा गया है।
हाल के दिनों में झारखंड के कई जिलों में न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकियां मिली हैं, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जमशेदपुर के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि इससे पहले शहर के प्रतिष्ठित संस्थान XLRI को भी ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। हालांकि, गहन जांच के बाद वहां कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला था, लेकिन अब कोर्ट को मिली धमकी को पुलिस जरा भी हल्के में नहीं ले रही है।
सिटी एसपी कुमार शिवाशीष ने शहरवासियों और वकीलों को भरोसा दिलाया है कि डरने की कोई बात नहीं है। उन्होंने अपील की है कि लोग सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी अपुष्ट जानकारी या अफवाह पर ध्यान न दें। पुलिस किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है। कोर्ट परिसर में सुरक्षा ऑडिट और गश्त बढ़ा दी गई है ताकि आम जनता और न्यायिक कार्यों में कोई बाधा न आए। जमशेदपुर सिविल कोर्ट की सुरक्षा को बढ़ाना केवल एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी का प्रमाण है। जब तक खतरा टल नहीं जाता, तब तक कोर्ट परिसर में इसी तरह की कड़ी जांच और सघन तलाशी अभियान जारी रहेगा।
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