Chakulia Terror : बंगाल बॉर्डर पर हाथियों का महाडेरा, गजराज 'रामलाल' ने पिकअप वैन को फुटबॉल की तरह ढकेला, बहरागोड़ा तक दहशत
चाकुलिया और बहरागोड़ा से सटे पश्चिम बंगाल के जंगलों में 9 हाथियों के झुंड ने डेरा डाल दिया है। कुख्यात हाथी 'रामलाल' द्वारा पिकअप वैन को ढकेलने का लाइव वीडियो वायरल होने के बाद सीमावर्ती गांवों में हाई अलर्ट जारी है। पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/चाकुलिया, 21 मई 2026 – झारखंड-पश्चिम बंगाल की सीमाओं पर स्थित पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया और बहरागोड़ा वन क्षेत्र में एक बार फिर हाथियों के भीषण आतंक ने दस्तक दी है। बंगाल सीमा से सटे लोधाशोली और अमतोलिया के घने जंगलों में हाथियों के एक आक्रामक झुंड के परमानेंट डेरा डाल देने से सीमावर्ती दर्जनों गांवों के ग्रामीण और किसान खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार, अमतोलिया जंगल में इस वक्त 7 से 9 हाथियों का एक शक्तिशाली झुंड मौजूद है, जो कभी भी चाकुलिया के रिहायशी इलाकों में घुस सकता है। इसी बीच, बहरागोड़ा से सटे लोधाशोली जंगल की कच्ची सड़क पर खड़ी एक पिकअप वैन को 'रामलाल' नाम के एक विशालकाय हाथी द्वारा खिलौने की तरह ढकेल कर रास्ता साफ करने का एक बेहद रोमांचक और डरावना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना ने चाकुलिया वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
वारदात की दास्तां: गजराज 'रामलाल' का लाइव एक्शन, अमतोलिया में चक्रव्यूह और फसलों पर मंडराता खतरा
चाकुलिया वन क्षेत्र के सूत्रों और सीमावर्ती ग्रामीणों से मिले लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, हाथियों का यह मूवमेंट इस साल के सबसे बड़े 'मैन-एनिमल कॉन्फ्लिक्ट' (मानव-हाथी द्वंद्व) का संकेत दे रहा है।
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पिकअप वैन को फुटबॉल की तरह ढकेला: लोधाशोली जंगल के किनारे एक कच्ची सड़क पर एक पिकअप वैन खड़ी थी। तभी अचानक जंगल से निकलकर 'रामलाल' नामक कुख्यात हाथी वहाँ आ धमका। रास्ते में गाड़ी को बाधा बनते देख रामलाल ने बिना किसी उग्रता या तोड़फोड़ के, अपने सूंड और माथे के दम पर भारी-भरकम पिकअप वैन को पीछे ढकेल दिया और अपना रास्ता साफ कर सीधे घने जंगल में समा गया। खुशकिस्मती से गाड़ी में कोई इंसान मौजूद नहीं था।
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चाकुलिया-बहरागोड़ा बॉर्डर पर हाई अलर्ट: हाथियों का यह झुंड अमतोलिया और लोधाशोली के जंगलों में घूम रहा है, जो चाकुलिया वन क्षेत्र के बॉर्डर से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर है। किसानों को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि अगर हाथियों का यह दल रात के अंधेरे में खेतों में घुस गया, तो उनकी महीनों की मेहनत से उगाई गई हरी फसलें और धान के बिचड़े चंद मिनटों में मटियामेट हो जाएंगे।
प्रशासनिक रुख: पश्चिम बंगाल आबकारी व वन विभाग से संपर्क, पटाखों और मशालों का इंतजाम
चाकुलिया वन विभाग के अधिकारियों ने बॉर्डर इलाकों में गश्त बढ़ा दी है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है।
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क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) तैनात: वन विभाग ने हाथियों को खदेड़ने और उनके मूवमेंट पर नजर रखने के लिए सीमावर्ती गांवों में स्थानीय हुल्ला पार्टी (हाथी भगाने वाले एक्सपर्ट्स) और वनकर्मियों की क्विक रिस्पॉन्स टीम को तैनात कर दिया है।
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रात में घरों से न निकलने की अपील: प्रशासन ने माइकिंग के जरिए ढीपा, कालियाम, और बहरागोड़ा के सीमावर्ती टोलों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे रात के वक्त अकेले जंगलों की तरफ या शौच के लिए बाहर न निकलें और हाथियों को देखने के लिए भीड़ न लगाएं।
सौर ऊर्जा संचालित बिजली बाड़ (सोलर फेंसिंग) और हाथियों के लिए परमानेंट ट्रेंच समय की मांग
चाकुलिया और बहरागोड़ा के वन विभाग ने हाथियों की निगरानी के लिए टीमें तो तैनात कर दी हैं, लेकिन यह इस गंभीर समस्या का कोई परमानेंट इलाज नहीं है। जब तक झारखंड और पश्चिम बंगाल का वन विभाग संयुक्त रूप से मिलकर इस एलिफेंट कॉरिडोर को इंसानी अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराएगा, तब तक 'रामलाल' जैसे हाथियों का आतंक कम नहीं होगा। जिला प्रशासन को तुरंत बॉर्डर से सटे कृषि प्रधान गांवों के चारों तरफ 'सोलर पावर फेंसिंग' (सौर ऊर्जा संचालित कम झटके वाली बिजली की बाड़) लगानी चाहिए और गहरे गड्ढे (एलिफेंट ट्रेंच) खोदने चाहिए ताकि हाथी खेतों में न घुस सकें। किसानों की फसलों के उचित मुआवजे की प्रक्रिया को भी डिजिटल और तेज करना होगा, तभी इस क्षेत्र के इंसानों और हाथियों के बीच का यह ऐतिहासिक संघर्ष रुक पाएगा।
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