Giridih Raid: पकड़े गए, गिरिडीह के जंगलों में बैठकर लूट रहे थे दुनिया, प्रतिबिंब ऐप ने खोला करोड़ों का राज, 85 लाख की संपत्ति जब्त
गिरिडीह के गाण्डेय इलाके में साइबर पुलिस ने तेलखारी जंगल के अंदर चल रहे हाई-टेक ठगी अड्डे का भंडाफोड़ किया है। करोड़ों की संपत्ति बनाने वाले सरफराज और उसके साथियों की गिरफ्तारी और पुलिस के 'प्रतिबिंब' पोर्टल की इस जबरदस्त कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी साइबर सुरक्षा के इस बड़े अपडेट से चूक जाएंगे।
गिरिडीह, 30 दिसंबर 2025 – झारखंड का गिरिडीह जिला एक बार फिर साइबर अपराध के कारण सुर्खियों में है। जिले की साइबर पुलिस ने गाण्डेय थाना क्षेत्र के कछेल गांव स्थित तेलखारी जंगल में फिल्मी अंदाज में छापेमारी कर तीन शातिर अपराधियों को दबोचा है। ये ठग इतने शातिर थे कि पुलिस की नजरों से बचने के लिए घने जंगलों को अपना 'ऑफिस' बना रखा था। मंगलवार को साइबर क्राइम डीएसपी आबिद खान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बड़े गिरोह के खात्मे का ऐलान किया। इस कार्रवाई की सबसे बड़ी खासियत रही अत्याधुनिक 'प्रतिबिंब पोर्टल' का इस्तेमाल, जिसने ठगों के डिजिटल फुटप्रिंट को ट्रैक कर पुलिस को उनके सटीक ठिकाने तक पहुँचा दिया।
जंगल में चल रहा था 'कॉल सेंटर': ऐसे हत्थे चढ़े ठग
पकड़े गए अपराधियों ने पूछताछ में जो खुलासे किए हैं, वे किसी को भी हैरान कर सकते हैं।
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डिजिटल घेराबंदी: पुलिस को प्रतिबिंब पोर्टल के जरिए सूचना मिली थी कि तेलखारी के जंगलों से संदिग्ध मोबाइल सिग्नल एक्टिव हैं।
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मौके से गिरफ्तारी: जब पुलिस की टीम ने जंगल में दबिश दी, तो खुर्शीद अंसारी, आलमगीर आलम और सरफराज अंसारी लैपटॉप और मोबाइल लेकर ठगी करते रंगे हाथों पकड़े गए।
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बरामद सामान: पुलिस ने इनके पास से 8 मोबाइल, 10 सिम कार्ड, 2 बाइक और 2 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। ये सिम कार्ड अक्सर फर्जी आईडी पर दूसरे राज्यों से मंगाए जाते थे।
85 लाख का काला साम्राज्य: सरफराज का 'करोड़पति' बनने का सफर
गिरफ्तार ठगों में सबसे खतरनाक मो. सरफराज निकला, जिसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है।
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संपत्ति का खुलासा: जांच में सामने आया कि सरफराज ने ठगी के जरिए अब तक करीब 60 लाख रुपये की संपत्ति खड़ी की है। वहीं उसके साथी आलमगीर आलम ने भी 25 लाख रुपये की अवैध कमाई की है।
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इंटरस्टेट कनेक्शन: सरफराज के खिलाफ केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के थानों में भी साइबर अपराध के गंभीर मामले दर्ज हैं।
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अपराध की शैली: ये ठग वर्षों से इस धंधे में शामिल थे। ये कभी बैंक अधिकारी बनकर तो कभी बिजली बिल और केवाईसी अपडेट के नाम पर लोगों को चूना लगाते थे।
गिरिडीह साइबर ऑपरेशन: मुख्य विवरण (Crime Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| ठिकाना | तेलखारी जंगल, गाण्डेय (गिरिडीह) |
| मुख्य अपराधी | मो. सरफराज (60 लाख की संपत्ति का मालिक) |
| पकड़ा गया सामान | 8 मोबाइल, 10 सिम, 2 बाइक |
| तकनीक | प्रतिबिंब पोर्टल (Pratibimb Portal) |
| आपराधिक रिकॉर्ड | छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में केस दर्ज |
इतिहास और गिरिडीह: 'जामताड़ा' के नक्शेकदम पर नया गढ़?
झारखंड में साइबर अपराध का इतिहास जामताड़ा से शुरू हुआ था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में गिरिडीह और देवघर के जंगल इसके नए केंद्र बन गए हैं। ऐतिहासिक रूप से ये इलाके उग्रवाद प्रभावित रहे हैं, जिसका फायदा उठाकर अपराधियों ने यहाँ सुरक्षित ठिकाने बनाए। हालांकि, झारखंड पुलिस ने अब 'ऑपरेशन क्लीन' के तहत इन जंगलों में ड्रोन और हाई-टेक ट्रैकिंग सिस्टम तैनात किए हैं। डीएसपी आबिद खान के अनुसार, अपराधी अब घने पेड़ों की ओट में बैठकर भी सुरक्षित नहीं हैं क्योंकि पुलिस के पास अब उनके टावर लोकेशन का रीयल-टाइम डेटा मौजूद है।
प्रतिबिंब पोर्टल: अपराधियों के लिए बना काल
झारखंड पुलिस का 'प्रतिबिंब पोर्टल' साइबर ठगों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हो रहा है।
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कैसे करता है काम: जैसे ही किसी अपराधी का मोबाइल नंबर संदिग्ध गतिविधियों (जैसे बल्क मैसेज या फर्जी कॉल) में शामिल होता है, यह पोर्टल पुलिस को अलर्ट भेज देता है।
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गाण्डेय का ऑपरेशन: इसी पोर्टल की मदद से पुलिस ने कछेल गांव के जंगल का पिन-पॉइंट लोकेशन ट्रैक किया और अपराधियों को भागने का मौका भी नहीं दिया।
आपकी सावधानी ही असली बचाव है
गिरिडीह पुलिस की यह सफलता बताती है कि कानून के हाथ अब जंगलों की गहराइयों तक पहुँच चुके हैं। सरफराज और उसके गिरोह की गिरफ्तारी से छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड पुलिस को भी बड़ी राहत मिली है। हालांकि, पुलिस ने अपील की है कि लोग किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही फोन पर अपनी गोपनीय जानकारी साझा करें, क्योंकि एक छोटी सी गलती आपके जीवनभर की कमाई इन ठगों की जेब में डाल सकती है।
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