Chakulia Mental Rescue: मानसिक रोगी के आतंक से परेशान गांव, पुलिस ने पकड़ा और कांके अस्पताल भेजा
भालुकापहाड़ी गांव में मानसिक रोगी वरूण महतो के आतंक से परेशान ग्रामीण, पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से पकड़ा और कांके मेंटल अस्पताल भेजा।
Chakulia Relief: चाकुलिया थाना क्षेत्र के भालुकापहाड़ी गांव में पिछले कई दिनों से मानसिक रोगी वरूण महतो (32) का आतंक बना हुआ था। वह दिन-रात गांव में उपद्रव मचाता था, जिससे ग्रामीण बेहद भयभीत थे। ग्रामीणों की सूचना पर चाकुलिया पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद उसे पकड़ा और बेहतर इलाज के लिए कांके मेंटल अस्पताल भेज दिया।
कई दिनों से उपद्रव मचा रहा था वरूण
वरूण महतो मानसिक रूप से बीमार था। वह कई दिनों से गांव में इधर-उधर घूमता रहता था और लोगों को परेशान करता था। कभी लोगों पर पत्थर फेंकता तो कभी जोर-जोर से चिल्लाकर माहौल खराब करता था। महिलाएं और बच्चे तो उसे देखकर ही डर जाते थे। गांव के लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था।
ग्रामीणों ने पुलिस को भेजी सूचना
ग्रामीणों ने काफी दिनों तक इस परेशानी को सहा। लेकिन जब स्थिति हाथ से निकलने लगी तो उन्होंने चाकुलिया थाना पुलिस को सूचना दी। ग्रामीणों का कहना था कि वरूण को न तो कोई समझा पा रहा था और न ही वह किसी की बात सुन रहा था। उसके कारण पूरे गांव का माहौल खराब था।
थाना प्रभारी राजेश कुमार ने की कार्रवाई
सूचना मिलते ही चाकुलिया थाना प्रभारी राजेश कुमार स्वयं गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से वरूण की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इसके बाद पुलिस टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से वरूण को तलाशना शुरू किया। गांव के जंगलों और आसपास के इलाकों में खोजबीन के बाद आखिरकार उसे पकड़ लिया गया।
मानसिक रोगी को पकड़ना था बेहद मुश्किल
वरूण को पकड़ना आसान नहीं था। वह काफी आक्रामक हो चुका था और किसी को नजदीक नहीं फटकने देता था। पुलिस और ग्रामीणों ने काफी सतर्कता बरतते हुए उसे घेरा। थाना प्रभारी राजेश कुमार ने बताया कि मानसिक रोगी को पकड़ते समय विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है, ताकि न वह खुद को चोट पहुंचाए और न ही दूसरों को।
बेहतर इलाज के लिए रांची भेजा गया
वरूण को पकड़ने के बाद पुलिस ने उसे बेहतर इलाज के लिए रांची के कांके स्थित मेंटल अस्पताल (राज्य मानसिक स्वास्थ्य संस्थान) भेजा। यह झारखंड का सबसे बड़ा मानसिक अस्पताल है। यहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में वरूण का इलाज किया जाएगा। पुलिस ने परिजनों से भी संपर्क किया और उन्हें पूरी जानकारी दी।
परिजन और ग्रामीण राहत की सांस ली
वरूण के परिजन भी काफी परेशान थे। वह उसे संभाल नहीं पा रहे थे और न ही उसका इलाज करवा सकते थे। अब पुलिस ने सरकारी अस्पताल में उसका इलाज सुनिश्चित कराकर परिजनों को राहत पहुंचाई है। ग्रामीणों ने भी पुलिस के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब गांव में शांति होगी और लोग निडर होकर घर से बाहर निकल सकेंगे।
एक अच्छा उदाहरण पेश किया
यह घटना साबित करती है कि पुलिस सिर्फ अपराधियों को ही नहीं धरती, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की भी सहायता करती है। थाना प्रभारी राजेश कुमार ने अपनी टीम और ग्रामीणों के सहयोग से एक मुश्किल काम को अंजाम दिया। यह मानसिक रोगियों और उनके परिजनों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि मदद की जा सकती है, बजाय इसके कि उन्हें समाज से अलग कर दिया जाए।
मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि झारखंड में मानसिक रोगियों के लिए पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है। सरकारी अस्पतालों की संख्या कम है और गांवों में जागरूकता भी बहुत कम है। सरकार को चाहिए कि मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक बजट आवंटित करे और गांवों में भी परामर्श केंद्र खोले। साथ ही, पुलिस को ऐसे मामलों के लिए पर्याप्त ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।
आपकी राय क्या है – क्या सरकार को गांवों में मानसिक रोगियों के लिए नियमित जांच शिविर और परामर्श सेवाएं शुरू करनी चाहिए? कमेंट में बताएं।
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