Chaibasa Treasury Scam: सिपाही ने 9 साल में 26 लाख रुपये की गड़बड़ी, जीजा-साले-दोस्तों के खाते में ट्रांसफर किए पैसे
पुलिस विभाग के फंड से 9 साल में 26 लाख रुपये की गड़बड़ी, सिपाही देवनारायण मुर्मू गिरफ्तार, जीजा-साले-दोस्तों के खातों में ट्रांसफर, मुफ्फसिल थाने में केस दर्ज।
Chaibasa Shocker: पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा की ट्रेजरी से पुलिस विभाग के फंड में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। नौ वर्षों के दौरान 26 लाख 21 हजार 717 रुपये अवैध रूप से पांच से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। यह राशि पुलिसकर्मियों के लंबित वेतन, पेंशन और अन्य मदों से संबंधित बताई जा रही है।
एसपी कार्यालय के लेखा विभाग में कार्यरत था सिपाही
पुलिस ने एसपी कार्यालय के लेखा विभाग में कार्यरत सिपाही देवनारायण मुर्मू को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया है। वह वर्ष 2017 से 2025 तक लेखा विभाग में पदस्थापित रहा और इसी दौरान उसने कथित रूप से इस पूरी हेराफेरी को अंजाम दिया। वर्तमान में वह गोइलकेरा में सिपाही के पद पर तैनात था।
जीजा, साला और दोस्त भी थे शामिल
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस अवैध लेन-देन में आरोपी के करीबी रिश्तेदार और परिचित भी शामिल थे। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
-
गोरा चांदमाली (दोस्त)
-
अरुण कुमार वजीर (जीजा)
-
सरकार हेम्ब्रम (साला)
इन सभी के बैंक खातों का इस्तेमाल पैसे ट्रांसफर करने में किया गया। इस पूरे नेटवर्क का पता विभागीय जांच में चला।
फुटबॉलर सिपाही का दोहरा चेहरा
देवनारायण मुर्मू पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड के माको गांव का रहने वाला है। वह वर्ष 2009 में पुलिस सेवा में भर्ती हुआ था। उसकी एक अलग पहचान एक फुटबॉलर के रूप में भी है। एसपी कार्यालय में तैनाती के दौरान उसने ‘किंगफिशर एफसी’ नाम से फुटबॉल क्लब बनाया था, जिसके जरिए वह स्थानीय टूर्नामेंट से लेकर बड़ी प्रतियोगिताओं में टीम उतारता रहा। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर भी उसकी सक्रियता की चर्चा रही है। वह फुटबॉलर के साथ-साथ साइबर गतिविधियों में भी महारत रखता था।
यहाँ क्यों हो रही हैं वित्तीय गड़बड़ियाँ?
चाईबासा का ट्रेजरी कार्यालय पश्चिमी सिंहभूम जिले की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र है। यहाँ से पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विभागों के फंड का वितरण होता है। पिछले कुछ वर्षों में यहाँ वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं। इस बार की गड़बड़ी सबसे गंभीर है, क्योंकि यह सीधे पुलिसकर्मियों के वेतन और पेंशन से जुड़ी है। पुलिस विभाग के भीतर ही इतनी बड़ी धोखाधड़ी होना विभाग की आंतरिक जांच प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। पोटका का माको गांव, जहाँ से देवनारायण आता है, जेमको (JEMCO) क्षेत्र से सटा हुआ है – जो कभी औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था, लेकिन अब यह इलाका अव्यवस्था के लिए भी जाना जाता है।
गड़बड़ी कैसे हुई?
जांच में यह सामने आया कि देवनारायण मुर्मू ने अपने करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों के बैंक खातों का उपयोग कर इस अवैध राशि को ट्रांसफर किया। उसने इन खातों को फर्जी पुलिस कर्मियों के रूप में दर्शाया या फिर सीधे वेतन/पेंशन के नाम पर इन खातों में रकम डलवा दी। इतने सालों तक यह गड़बड़ी कैसे छिपी रही, यह जांच का प्रमुख बिंदु है। पुलिस अब यह भी देख रही है कि क्या इस मामले में उसके किसी वरिष्ठ अधिकारी की मिलीभगत थी।
मुफ्फसिल थाने में दर्ज हुआ केस
इस पूरे मामले में चाईबासा के मुफ्फसिल थाने में कांड संख्या 69/2026 दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अब आगे की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कुल कितनी रकम की हेराफेरी हुई, क्या यह सिर्फ 26 लाख थी या इससे अधिक और क्या इस गोलमाल में और भी लोग शामिल थे।
जांच में और खुलासे हो सकते हैं
अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर और भी खुलासे हो सकते हैं। पुलिस देवनारायण मुर्मू और उसके साथियों से लगातार पूछताछ कर रही है। अब तक बरामद दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो जाएगा।
आपकी राय क्या है – क्या सरकारी विभागों में लेखा प्रणाली को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए? कमेंट में बताएं।
इस खबर को शेयर करें, ताकि आपके दोस्त और परिवार सरकारी कोष में होने वाली गड़बड़ियों के बारे में जागरूक हो सकें।
अपडेट के लिए बने रहें।
What's Your Reaction?


