Chaibasa Elephant Attack: 2 हाथियों ने रात में स्कूल में तोड़ा रसोईघर, बच्चों के लिए रखा राशन बर्बाद किया
हेन्देदिरी स्कूल में रात को हाथियों ने तोड़ा रसोईघर का दरवाजा, बच्चों के मध्याह्न भोजन का राशन खाया, बुधवार को नहीं मिला खाना।
Chaibasa Wild Night: झारखंड के कोल्हान प्रमंडल अंतर्गत सारंडा जंगल क्षेत्र स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, हेन्देदिरी में मंगलवार की मध्य रात्रि में जंगल से निकले 2 हाथियों ने भारी उत्पात मचाया। हाथियों ने स्कूल परिसर में घुसकर रसोईघर का दरवाजा तोड़ दिया और बच्चों के मध्याह्न भोजन के लिए रखे गए चावल, राशन व सब्जियां खा गए।
रसोईघर तोड़ा, राशन बर्बाद, मिड-डे मील तंत्र ठप
हाथियों ने न सिर्फ राशन खाया, बल्कि जमीन पर गिरे-बिखरे चावल और खाद्यान्न को भी रौंद दिया। रसोईघर में रखे अन्य सामानों को भी काफी नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद विद्यालय की मध्याह्न भोजन व्यवस्था पूरी तरह नष्ट हो गई है।
बुधवार को भूखे रहे बच्चे और डर का माहौल
राशन समाप्त हो जाने के कारण बुधवार को बच्चों को भोजन नहीं मिल सका। स्कूल पहुंचे बच्चे न सिर्फ भूखे रहे, बल्कि वातावरण डरावना था। अभिभावक भी चिंतित हैं कि कहीं स्कूल जाते वक्त ही हाथी न मिल जाएं।
दुविल गांव के ग्रामीण वीर सिंह हंसदा ने दी जानकारी
दुविल गांव निवासी वीर सिंह हंसदा ने बताया कि विद्यालय हेन्देदिरी टोला में स्थित है। उन्होंने बताया कि रात में हाथियों ने स्कूल में जमकर उत्पात मचाया और काफी नुकसान पहुंचाया। उन्होंने बताया कि हाथी अब भी आसपास के जंगलों में मौजूद हैं, जिससे गांव में जान-माल का खतरा बना हुआ है।
सारंडा जंगलों का खतरा
हेन्देदिरी गांव सारंडा जंगल के बीचोबीच स्थित है। सारंडा जंगल झारखंड के सबसे बड़े वन क्षेत्रों में से एक है, जो हाथियों के लिए जाना जाता है। अक्सर हाथियों के झुंड यहाँ से निकलकर बस्तियों में घुस जाते हैं। यह पहली बार नहीं है जब हाथियों ने स्कूल को निशाना बनाया हो, लेकिन मिड-डे मील राशन खा जाना एक नई तरह की घटना है। इससे पता चलता है कि हाथी पूरी तरह मानव बस्ती के संपर्क में आ चुके हैं।
बच्चे स्कूल जाने से डर रहे, अभिभावक चिंतित
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी अभी भी आसपास हैं और उनके जंगल में होने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। ऐसे में बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं। अभिभावकों को डर है कि कही कोई बच्चा जाते वक्त हाथी की जद में आकर हादसे का शिकार न हो जाए।
वन विभाग से जंगल की ओर खदेड़ने की मांग
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि हाथियों को जल्द गांव क्षेत्र से दूर जंगल की ओर खदेड़ा जाए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके। जब तक हाथी पास में रहेंगे, मिड-डे मील योजना को दोबारा शुरू करना मुश्किल होगा।
जिम्मेदार कौन?स्थानीय स्कूल बोर्ड, वन विभाग या जिला परिषद?
यह सवाल ग्रामीण और शिक्षक उठा रहे हैं। कौन स्कूल की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा? स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के बीच तालमेल न होने के कारण हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ रहा है। वन विभाग सिर्फ घटना के बाद रिपोर्ट दर्ज कर करता है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता।
मानव-हाथी संघर्ष का बढ़ता मामला
भारत में मानव-हाथी संघर्ष के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। झारखंड में हाथियों के लिए न तो पर्याप्त कोरिडोर हैं और न ही स्थायी पानी-चारे का प्रबंध। इस वजह से हाथी गांवों और फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। यह स्कूल हाथियों के रास्ते का बाधक बना हुआ था या उन्हें खाना खाने के लिए लुभावना लगा। यह तो जांच का विषय है।
आपकी राय क्या है – क्या वन विभाग को ग्रामीणों को सोलर फेंसिंग, ड्रोन निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया दल उपलब्ध कराने चाहिए? कमेंट में बताएं।
अगर आपके गांव के आसपास भी हाथी घूम रहे हैं तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
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