Budget 2026: मिडिल क्लास को राहत या नया झटका? कारोबारी खुश या नाराज़—Budget 2025 से कितना अलग है ये बजट, पूरी सच्चाई
Budget 2026 में टैक्स छूट, TCS राहत और नए कानून का ऐलान हुआ, लेकिन शेयर बाजार और सोने में गिरावट क्यों आई? मिडिल क्लास और कारोबारियों के लिए कितना फायदेमंद है यह बजट—पूरी तुलना Budget 2025 से।
बजट 2026 बनाम बजट 2025: मिडिल क्लास को राहत, कारोबारियों को संदेश — फायदे भी, झटके भी
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026–27 यह साफ संकेत देता है कि सरकार अब पोस्ट-कोविड रिकवरी से आगे बढ़कर सरल टैक्स सिस्टम, अनुपालन में आसानी और दीर्घकालिक ढांचागत सुधारों पर फोकस कर रही है। जहां एक ओर मिडिल क्लास को कुछ बड़ी राहतें मिली हैं, वहीं बाजार और कारोबारी वर्ग को कुछ फैसलों ने असहज भी किया है।
अगर बजट 2026 की तुलना बजट 2025 से की जाए, तो तस्वीर संतुलित लेकिन मिश्रित नजर आती है।
मिडिल क्लास के लिए बजट 2026: राहत है, लेकिन पूरी खुशी नहीं
मिडिल क्लास के लिए सकारात्मक पहलू
1. टैक्स सिस्टम को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम
बजट 2025 में जहां सरकार का जोर राजकोषीय मजबूती और पूंजीगत खर्च पर था, वहीं बजट 2026 में आम करदाता को केंद्र में रखा गया है।
आयकर अधिनियम 2025 को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की घोषणा, नए और आसान ITR फॉर्म्स के साथ, मिडिल क्लास के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। इससे टैक्स फाइलिंग, नोटिस और विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
2. सड़क हादसों के पीड़ितों को पूरी मुआवजा राशि
Motor Accident Claims Tribunal (MACT) द्वारा दिए जाने वाले ब्याज को पूरी तरह टैक्स-फ्री कर दिया गया है और TDS भी हटा दिया गया है।
बजट 2025 में इस पर टैक्स लगता था, जिससे पीड़ित परिवारों को कम राशि मिलती थी। बजट 2026 का यह फैसला सामाजिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।
3. विदेश में पढ़ाई और इलाज अब थोड़ा सस्ता
LRS के तहत शिक्षा और मेडिकल खर्च पर TCS को 5% से घटाकर 2% किया गया है।
यह उन मिडिल क्लास परिवारों के लिए बड़ी राहत है जो बच्चों की विदेश में पढ़ाई या इलाज के लिए पैसा भेजते हैं। बजट 2025 में यह बोझ ज्यादा था।
4. विदेशी टूर पैकेज पर टैक्स की मार कम
ओवरसीज टूर पैकेज पर TCS अब सीधे 2% कर दिया गया है, वह भी बिना किसी न्यूनतम सीमा के।
हालांकि यह आम मिडिल क्लास के लिए प्राथमिक मुद्दा नहीं है, लेकिन गैर-जरूरी टैक्स जटिलता जरूर कम हुई है।
मिडिल क्लास के लिए नकारात्मक पहलू
1. शेयर बाजार की गिरावट ने निवेशकों को झटका दिया
बजट 2026 में कमोडिटी फ्यूचर्स पर STT बढ़ाने के ऐलान के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट देखने को मिली।
मिडिल क्लास का बड़ा हिस्सा SIP, म्यूचुअल फंड और रिटायरमेंट निवेश से जुड़ा है। बजट 2025 में बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहा था, लेकिन 2026 ने निवेशकों को चौंका दिया।
2. सोना-चांदी में भारी गिरावट से पारंपरिक निवेश प्रभावित
सोने की कीमतों में करीब 20% और चांदी में 9% की गिरावट ने उन परिवारों को नुकसान पहुंचाया है जो इन्हें सुरक्षित निवेश मानते हैं।
बजट 2025 में बुलियन मार्केट में ऐसी अस्थिरता नहीं दिखी थी।
कारोबारी वर्ग के लिए बजट 2026: लंबी दौड़ का सोच, छोटी दौड़ की चोट
कारोबारियों के लिए अच्छे संकेत
1. TDS नियमों में स्पष्टता
मैनपावर सप्लाई को स्पष्ट रूप से कांट्रैक्टर पेमेंट के तहत लाया गया है, जिस पर 1% या 2% TDS लगेगा।
बजट 2025 में इस विषय पर अस्पष्टता थी, जिससे MSME और सर्विस कंपनियां परेशान रहती थीं।
2. छोटे विदेशी एसेट्स पर राहत
₹20 लाख तक के गैर-अचल विदेशी एसेट्स की गैर-घोषणा पर प्रोसिक्यूशन से इम्युनिटी दी गई है, जो अक्टूबर 2024 से लागू मानी जाएगी।
यह कदम भय के बजाय स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देगा।
3. रेलवे कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स को मजबूती
मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, चेन्नई-बेंगलुरु जैसे सात ग्रीन पैसेंजर कॉरिडोर और दनकुनी-सूरत फ्रेट कॉरिडोर उद्योगों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
4. केमिकल पार्क और रेयर अर्थ कॉरिडोर
हर राज्य में केमिकल पार्क और चार राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर का ऐलान भारत को चीन पर निर्भरता से बाहर निकालने की रणनीति का हिस्सा है।
बजट 2025 में यह दिशा संकेत मात्र थी, 2026 में इसे आकार मिला है।
कारोबारियों के लिए नकारात्मक फैसले
1. STT बढ़ने से ट्रेडर्स नाराज़
कमोडिटी फ्यूचर्स पर STT बढ़ाकर 0.05% करने से ट्रेडिंग लागत बढ़ी है।
बजट 2025 बाजार-अनुकूल माना गया था, जबकि 2026 ने राजस्व प्राथमिकता दिखाई।
2. बायबैक टैक्स नियम बदले
अब शेयर बायबैक से मिलने वाली राशि को कैपिटल गेन माना जाएगा। इससे कॉरपोरेट्स की फाइनेंशियल प्लानिंग प्रभावित हो सकती है।
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