Sahibganj Strike: हजारों कछुए बरामद, ट्रेन के भीतर 22 बैगों में छिपा था खौफनाक राज, साहिबगंज में बड़ी कार्रवाई

बरहड़वा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने फरक्का एक्सप्रेस में छापेमारी कर 22 बैगों में बंद 1000 से अधिक जीवित कछुओं को बरामद किया है। वाराणसी से बंगाल की ओर जा रहे इस 'साइलेंट किलर' सिंडिकेट के तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। कोहरे के कारण ट्रेन लेट होने और वन्यजीवों की तस्करी के इस अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क के पीछे छिपी पूरी सच्चाई यहाँ दी गई है।

Dec 20, 2025 - 12:30
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Sahibganj Strike: हजारों कछुए बरामद, ट्रेन के भीतर 22 बैगों में छिपा था खौफनाक राज, साहिबगंज में बड़ी कार्रवाई
Sahibganj Strike: हजारों कछुए बरामद, ट्रेन के भीतर 22 बैगों में छिपा था खौफनाक राज, साहिबगंज में बड़ी कार्रवाई

साहिबगंज/बरहड़वा, 20 दिसंबर 2025 – भारतीय रेलवे के डिब्बों में सफर कर रहे यात्रियों को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उनके साथ वाली सीटों के नीचे कपड़ों के बैग नहीं, बल्कि हजारों जिंदगियां तड़प रही हैं। बरहड़वा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ (RPF) ने एक ऐसी तस्करी का पर्दाफाश किया है जिसने वन्यजीव संरक्षण विभाग के होश उड़ा दिए हैं। नई दिल्ली से फरक्का जा रही डाउन फरक्का एक्सप्रेस (15744) के भीतर 22 बैगों में ठूंसकर ले जाए जा रहे 1000 से अधिक प्रतिबंधित कछुओं को सुरक्षित निकाला गया है। इस खामोश तस्करी के पीछे उत्तर प्रदेश के एक संगठित गिरोह का हाथ सामने आया है।

इतिहास: वाराणसी और कछुओं की तस्करी का 'हॉटस्पॉट'

वाराणसी और आसपास के गंगा के तराई इलाके ऐतिहासिक रूप से कछुओं की कई दुर्लभ प्रजातियों के लिए जाने जाते हैं। यहाँ पाए जाने वाले कछुए पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए सफाईकर्मी का काम करते हैं। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में कछुओं के मांस और उनकी हड्डियों के पाउडर की बढ़ती मांग ने इन्हें 'सफेद सोना' बना दिया है। तस्करी का इतिहास बताता है कि वाराणसी से बंगाल के फरक्का और फिर वहां से सीमा पार कर बांग्लादेश के रास्ते अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक इन कछुओं को पहुँचाया जाता है। बरहड़वा की यह कार्रवाई इसी खूनी सिंडिकेट की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

कोहरे ने बिगाड़ा तस्करों का खेल: 8 घंटे की देरी बनी काल

तस्करों ने इस बार अपनी योजना बहुत सोच-समझकर बनाई थी, लेकिन कुदरत के आगे उनकी चालाकी धरी रह गई।

  • समय का फेर: फरक्का एक्सप्रेस को सुबह 8:15 बजे बरहड़वा पहुँचना था। अगर ट्रेन समय पर होती, तो शायद भीड़-भाड़ में तस्कर निकल जाते।

  • चेकिंग का मौका: कोहरे के कारण ट्रेन करीब 8 घंटे की देरी से शाम 5 बजे बरहड़वा पहुँची। इस देरी ने आरपीएफ टीम को गहन तलाशी (नियमित चेकिंग) का पर्याप्त समय दे दिया, जिससे संदिग्ध बैगों की पहचान हो सकी।

बैग खुलते ही सन्न रह गए जवान: 22 बैग, 1000+ कछुए

जब आरपीएफ जवानों ने कोच के भीतर रखे संदिग्ध बैगों को खोला, तो उनमें कपड़े नहीं बल्कि अलग-अलग साइज के कछुए तड़पते हुए मिले।

  1. गिरफ्तारी: पुलिस ने मौके से तीन तस्करों को दबोच लिया। इनकी पहचान सुल्तानपुर (UP) निवासी करण पाथकर (25), मंजू पाथकर (30) और उषा पाथकर के रूप में हुई है।

  2. फरार साथी: पुलिस की दबिश देखते ही कुछ अन्य तस्कर भीड़ का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे, जिनकी तलाश जारी है।

तस्करी कांड का संक्षिप्त विवरण

विवरण जानकारी
ट्रेन संख्या 15744 (डाउन फरक्का एक्सप्रेस)
बरामदगी 1000 से अधिक जीवित कछुए (22 बैग)
पकड़े गए आरोपी सुल्तानपुर (UP) का पाथकर परिवार
रूट वाराणसी (लोडिंग) से फरक्का (डिलीवरी)
प्रजाति भारतीय प्रतिबंधित कछुए (Indo-Gangetic Turtles)

आरपीएफ की जांच: वाराणसी का मास्टरमाइंड कौन?

आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि शुरुआती पूछताछ में तस्करों ने कबूल किया है कि इन्हें वाराणसी स्टेशन पर ट्रेन में लोड किया गया था। कछुओं की इस बड़ी खेप को फरक्का में किसी बड़े 'किंगपिन' (सरगना) को सौंपा जाना था। आरपीएफ अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जो गंगा के किनारों से इन कछुओं को पकड़ने से लेकर वाराणसी स्टेशन तक पहुँचाने में मदद करती हैं। यह जांच अब वन्यजीव विभाग (Forest Department) को सौंप दी गई है ताकि इन कछुओं को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके।

मासूम जिंदगियों का सौदा

बरहड़वा की यह घटना दिखाती है कि रेल मार्ग अब वन्यजीव तस्करी का मुख्य गलियारा बनते जा रहे हैं। कछुओं को जिस तरह बैगों में भरकर दम घोंटने वाली स्थिति में रखा गया था, वह मानवता के लिए शर्मसार करने वाला है। फिलहाल, तीनों तस्कर सलाखों के पीछे हैं, लेकिन सवाल यह है कि वाराणसी से बरहड़वा तक के लंबे सफर में किसी की नजर इन बैगों पर क्यों नहीं पड़ी?

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।